श्रीनाथजी की हवेली में दशहरे पर निभाई गई सदियों पुरानी पूजन परंपरा ।
_सरस्वती, शमी, शस्त्र और अश्व पूजन विधिवत संपन्न_
पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रधान पीठ श्रीनाथजी की हवेली में दशहरे के पावन अवसर पर सदियों से चली आ रही सरस्वती पूजन, शमी वृक्ष पूजन, शस्त्र पूजन एवं अश्व पूजन की परंपरा का विधि-विधान से निर्वाह किया गया।
तिलकायत श्री की आज्ञा से मंदिर अधिकारी सुधाकर उपाध्याय के सान्निध्य में मंदिर के पंड्या परेश नागर ने शास्त्रोक्त एवं वैदिक रीति से सभी पूजन संपन्न कराए।
राजभोग दर्शन के उपरांत पुस्तकालय में सरस्वती पूजन किया गया, पुष्टिमार्गीय साहित्य और संस्कृति के प्रचार-प्रसार व अधिकाधिक वैष्णवजनों तक पहुँचाने की प्रार्थन की गई, यह परंपरा लगभग ढाई सो वर्षों से निरंतर चली आ रही है।
वहीं आरती दर्शन के बाद सनातन संस्कृति और पौराणिक मान्यता के अनुसार विजयश्री एवं सर्वत्र मंगल की कामना से शमी वृक्ष का पूजन किया व महाप्रभुजी की बैठक में विजयश्री और राजशाही के प्रतीक के रूप में अश्व का पूजन मंदिर अधिकारी सुधाकर उपाध्याय द्वारा किया गया, जिसके उपरांत मंदिर मंडल के कमांडिंग को तिलक लगाकर पैरावणी दी गई।
इस अवसर पर मंदिर के सीईओ जितेंद्र कुमार पंड्या, सहायक अधिकारी अनिल सनाढ्य, तिलकायत सचिव लीलाधर पुरोहित, कैलाश पालीवाल सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।