“फाइल कैंसिल हुई तो छलके आंसू: 7,500 रुपये वापस मांगता रहा पीड़ित, तहसील सभागार में गूंजती रही ‘साहब हमारा पैसा वापस करा दो’ की गुहार”
लेखपाल पर रकम लेने का आरोप, अधिकारियों के सामने फूट-फूटकर रोया परिवार—बोला, साहब! योजना का लाभ नहीं मिला तो हमारे पैसे ही वापस करा दो
अमृतपुर।
सरकारी योजना की फाइल, कथित तौर पर लिया गया पैसा और फिर फाइल निरस्त होने के बाद रकम वापस मांगता एक बेबस पीड़ित—अमृतपुर तहसील में शनिवार को सामने आए इस घटनाक्रम ने सरकारी दफ्तरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। तहसील सभागार में अधिकारियों के सामने पीड़ित फूट-फूटकर रोता रहा और बार-बार अपने रुपये वापस दिलाने की गुहार लगाता रहा।
तहसील क्षेत्र के गांव कुतूलूपुर निवासी श्रीदेवी पत्नी सुरेंद्र शर्मा के मुताबिक, उनके पति की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। परिवार ने कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत सहायता के लिए फाइल लगाई थी। आरोप है कि संबंधित लेखपाल धीरेन ने फाइल के सिलसिले में उनसे रुपये लिए। बाद में बटाईदार होने के आधार पर फाइल निरस्त कर दी गई।
फाइल निरस्त होने की जानकारी मिलने पर पीड़ित तहसील पहुंचा और लेखपाल से कथित तौर पर दिए गए रुपये वापस करने की मांग की। पीड़ित का आरोप है कि इस दौरान उसके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। इसके बाद मामला तहसील सभागार तक पहुंच गया, जहां अधिकारियों के सामने पीड़ित अपनी व्यथा सुनाते-सुनाते फूट-फूटकर रो पड़ा।
पीड़ित ने अधिकारियों से कहा कि उसने ब्याज पर रुपये लेकर 5,000 रुपये, फिर 2,000 रुपये और फाइल फीडिंग के नाम पर 500 रुपये दिए थे। उसका कहना था कि जब उसकी फाइल ही निरस्त हो गई है तो कम से कम उसके दिए रुपये वापस करा दिए जाएं।तहसील सभागार में पीड़ित की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वह अधिकारियों के सामने लगातार अपनी रकम वापस कराने की गुहार लगाता रहा। इसी दौरान उसे हवालात में बंद किए जाने के निर्देश दिए जाने की बात भी सामने आई। पीड़ित का कहना था कि वह किसी विवाद के लिए नहीं, बल्कि अपने रुपये वापस मांगने के लिए अधिकारियों के पास आया है।घटनाक्रम ने तहसील में सरकारी योजनाओं की फाइलों के निस्तारण और कथित लेन-देन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं तो सरकारी योजना की फाइल के नाम पर रकम लेने की शिकायत बेहद गंभीर है और जांच के बाद जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। वहीं, यदि आरोप गलत हैं तो निष्पक्ष जांच कर स्थिति साफ करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।हालांकि, लेखपाल पर रिश्वत लेने के आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले में प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और कथित रकम किस आधार पर ली गई थी।
अब निगाह प्रशासन की जांच पर है—क्या पीड़ित को उसके कथित रुपये वापस मिलेंगे या फिर यह मामला भी तहसील की फाइलों में दबकर रह जाएगा।