समन्वित कृषि प्रणाली से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
प्राकृतिक खेती एवं कृषि नवाचारों को अपनाकर कृषक ने बढ़ाई आय
मण्डला जिले के विकासखंड बीजाडांडी के ग्राम बारंगदा निवासी प्रगतिशील कृषक श्री तान सिंह मरावी ने समन्वित कृषि प्रणाली, प्राकृतिक खेती एवं कृषि नवाचारों को अपनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। उनके द्वारा कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं मुर्गीपालन जैसी विभिन्न गतिविधियों का सफल समन्वय कर अपने खेत को समन्वित कृषि मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
प्राकृतिक खेती से कम लागत में बेहतर उत्पादन
श्री तान सिंह मरावी द्वारा खेती में जीवामृत एवं घनजीवामृत जैसे प्राकृतिक जैविक आदानों का उपयोग किया जा रहा है। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के उद्देश्य से वे निरंतर कृषि नवाचारों को अपना रहे हैं।
वर्ष 2025 के रबी मौसम में कृषक द्वारा 0.20 हेक्टेयर क्षेत्र में काला गेहूं (श्याम व्हीट) की खेती की गई। इससे लगभग 3.50 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ और लगभग 22,750 रुपए की आय अर्जित हुई। इसी प्रकार 0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में चिया सीड्स की खेती से लगभग 3 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त हुआ तथा लगभग 45,000 रुपये की आय अर्जित की गई।
मत्स्य पालन से अतिरिक्त आय
कृषक द्वारा बलराम तालाब योजना एवं प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत तालाब का निर्माण कराया गया। तालाब में मत्स्य पालन कर उन्होंने लगभग 25,000 रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित की। इस प्रकार फसल उत्पादन के साथ मत्स्य पालन को जोड़कर उन्होंने आय के अतिरिक्त स्त्रोत विकसित किए हैं।
कृषि विभाग एवं आत्मा विभाग के कृषि अधिकारी श्रीमती संगीता श्रीवास्तव, सहायक तकनीकी प्रबंधक श्री मोहित गोल्हानी, उद्यान विकास अधिकारी श्री डी.एस. पटेल से मिला मार्गदर्शन। श्री तान सिंह मरावी को उनके उत्कृष्ट कृषि कार्यों के लिए आत्मा योजना के अंतर्गत विकासखंड स्तरीय सर्वोत्तम कृषक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
आत्मा योजना के माध्यम से कृषक को कृषि नवाचारों, प्राकृतिक खेती, प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रमों से जोड़ा गया। कृषक द्वारा समन्वित कीट प्रबंधन के अंतर्गत लाइट ट्रैप का उपयोग किया जा रहा है, जिससे फसलों में कीट नियंत्रण के लिए प्राकृतिक एवं पर्यावरण अनुकूल उपायों को बढ़ावा मिल रहा है।
हरी खाद एवं देशी धान की ओर बढ़ते कदम
वर्तमान में आत्मा योजना के नवाचार कार्यक्रम के अंतर्गत प्राप्त सनई के बीज कृषक द्वारा अपने खेत में बोए गए हैं। सनई को हरी खाद के रूप में खेत में मिलाकर उसके पश्चात देशी धान की रोपाई करने की तैयारी की जा रही है। कृषक का उद्देश्य अपने खेत को प्राकृतिक खेती आधारित मॉडल फार्म के रूप में विकसित करना है।
समन्वित कृषि मॉडल बना प्रेरणास्त्रोत
जंगल के समीप नाला पार स्थित श्री तान सिंह मरावी के मॉडल फार्म में मत्स्य पालन, उद्यानिकी फसलें, फलोद्यान, पशुपालन, मुर्गीपालन तथा आधुनिक कृषि नवाचारों का सफल समन्वय देखने को मिलता है।
समन्वित कृषि प्रणाली के माध्यम से कृषि अवशेषों एवं उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा रहा है। इससे उत्पादन लागत में कमी, अतिरिक्त आय के स्त्रोतों का विकास तथा कृषि जोखिम में कमी लाने में सहायता मिल रही है।
श्री तान सिंह मरावी का समन्वित कृषि मॉडल आसपास के किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गया है। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि प्राकृतिक खेती, कृषि विविधीकरण एवं आधुनिक कृषि नवाचारों को अपनाकर किसान कम लागत में अधिक आय प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन सकता है। श्री तान सिंह मरावी की सफलता यह संदेश देती है कि समन्वित कृषि प्रणाली अपनाएं, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करें और आत्मनिर्भर कृषि की ओर बढ़ें।
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