देख तेरे बागों की हालत...क्या हो गई सरकार...क्या अब रहा नहीं कोई सरोकार ?
प्रस्तुति - कमल कलसी/एस०के० जैन-
हरियाणा की शान कहे जाने वाले शिवालिक पहाड़ियों की गोद में बसे, खूबसूरत शहर पंचकूला के सेक्टर-20, में बने एक बड़े व्यापारिक केंद्र (COMMERCIAL HUB) जो की पॉच खण्डों में बना हुआ है, में सड़क किनारे पार्किंग के साथ लगते तीन बागों (GREEN BELTS) जिनका क्षेत्रफल करीब 4500 वर्ग मीटर है, की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उन्हें खस्ताहाल कहना भी मुनासिब नहीं होगा। प्रशासन की अनदेखी के चलते इस प्रकार शहर की ग्रीन बेल्टस खत्म होती गई तो शहर के वातावरण में से प्राणवायु यानि ऑषजन, की भारी कमी हो जाएगी।
बागों के चारों ओर लगी लोहे की रेलिंग टूट चुकी है और कहीं-कहीं तो गायब ही है। अब इन्हें बाग कहना भी बाग शब्द का अपमान होगा क्योंकि कहीं भी घास का नामों - निशां तक नहीं बचा है और ना ही बैठने की कोई जगह नजर आती है। यहाँ बने शोरूमों और दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारी वगैरा लंच के समय एवं बाजारों में खरीदारी करने के लिए आए बुजुर्ग महिलाएं व बच्चे कुछ देर सुस्ताने के लिए इन बागों में बैठ जाया करते थे।
कूड़े के ढेर बाग के अन्दर कई जगहें दिखाई देते हैं।स्टेनलेस स्टील के डिब्बे (DUST BINS) टूट फूट चुके हैं और गिरे पड़े हैं।कुछ दिनों के बाद ये यहां से गायब भी हो जाएंगे।आसपास खड़े रेहड़ी फड़ी वालों ने अपना - अपना सामान बागों के अन्दर रखकर अतिक्रमण किया हुआ है। रेहड़ी-फड़ी वालों के लिए कोई सुनिश्चित जगह न होने के कारण, पैदल चलने के लिए बनाई गई पटरियों पर भी उनका अतिक्रमण देखा जा सकता है। इसके चलते गाड़ियों को पार्क करने में भी असुविधा होती है। कुछ लोगों ने तो गाड़ियों को भी बागों के अन्दर पार्क किया हुआ है। कई जगह तो अनाधिकृत लोहे के फ्रेम स्ट्रक्चर भी बने हुए हैं। वैसे तो कानून को अंधा कहा जाता है। लेकिन क्या कानून को लागू करवाने वाले जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों की भी आंखों में मोतियाबिंद आ चुका है ?
इस प्रकार जनता द्वारा दिए गए पैसे की बर्बादी क्या न्यायसंगत है ? सवाल तो उठेंगे ही। जिम्मेदार कर्मचारियों, अधिकारियों, शहर के मेयर, नगर निगम कमिश्नर व शहर के "पितामह" को तुरंत संज्ञान लेने की आवश्यकता है, ऐसा यहां आने वाले ग्राहकों और दुकानदारों का कहना है। अब आगे देखना यह है कि प्रशासन की कुंभकर्णी नींद कब खुलेगी ?