औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय में भव्य योग उत्सव: "योग भारतीय परंपरा, अब वैश्विक पहचान" - प्रधान जिला जज।
21 जून 2026 को जिला विधिक सेवा प्राधिकार और न्यायालय के संयुक्त आयोजन में जज-कर्मियों ने किया सामूहिक योग।
थीम: "स्वस्थ आयु के लिए योग" - तान्या पटेल बोलीं, विधिक समस्याओं की जड़ मानसिक तनाव, योग से होगा समाधान*
*औरंगाबाद, 21 जून 2026 |
औरंगाबाद में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 को व्यवहार न्यायालय में "योग उत्सव" के रूप में मनाया गया। बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और उच्च न्यायालय पटना के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार और व्यवहार न्यायालय, औरंगाबाद के संयुक्त तत्वावधान में ये भव्य आयोजन हुआ।
कार्यक्रम की अगुआई राजीव रंजन कुमार, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने की।
*दीप प्रज्ज्वलन से हुई शुरुआत, बेसमेंट में लगा योग का मेला*
योग शुरू करने से पहले प्रधान जिला जज राजीव रंजन कुमार और अन्य न्यायाधीशों ने सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
मुख्य आयोजन व्यवहार न्यायालय के नव निर्मित भवन के बेसमेंट में हुआ। वहां जज, कर्मी और विधिक सेवा प्राधिकार के पदाधिकारी एक साथ योग मैट पर बैठे।
प्रशिक्षित योग शिक्षक योगेन्द्र भूषण ने सभी को विभिन्न योग आसन कराए।
*प्रधान जिला जज ने कहा: योग को दिनचर्या बनाएं*
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजीव रंजन कुमार ने कहा: "योग भारत में आदि काल से चला आ रहा है। ऋषि-मुनियों की परंपरा अब वैश्विक पहचान बना चुकी है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून को 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' घोषित किया है। योग सिर्फ बीमारियों से लड़ने की क्षमता नहीं बढ़ाता, मनुष्य को मानसिक समस्याओं से भी निजात दिलाता है। योग का अर्थ ही 'जोड़' है - जब शरीर और एकाग्र मन जुड़ते हैं तो स्वस्थ शरीर बनता है।"_
उन्होंने हर व्यक्ति और परिवार से अपील की कि योग को रोज की दिनचर्या में शामिल करें।
*सचिव तान्या पटेल: "योग से विधिक समस्याएं भी घटेंगी"*
जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल ने कहा कि इस बार योग का थीम "स्वस्थ आयु के लिए योग" है।
उन्होंने बताया: _"अगर व्यक्ति योग को जीवन में आत्मसात करता है तो शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है। अक्सर देखा गया है कि कई विधिक समस्याओं की जड़ में मानसिक परेशानी होती है। अगर व्यक्ति योग से जुड़ा हो तो मानसिक समस्या दूर रहेगी तो विधिक समस्या भी नहीं होगी। मनुष्य की समस्याओं का निदान योग में निहित है, बस करने की जरूरत है।"_
*संदेश: स्वस्थ शरीर = स्वस्थ समाज = स्वस्थ न्याय व्यवस्था*
न्यायालय के सभी पदाधिकारियों ने एक साथ योग कर संदेश दिया कि स्वस्थ जज और कर्मी ही बेहतर न्याय दे सकते हैं। तनाव मुक्त मन से ही सही निर्णय संभव है।
इस योग में हिस्सा लेने वालों में अरुण कुमार प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय,
विश्व विभूति गुप्ता,अशोक कुमार गुप्ता, लक्ष्मीकांत मिश्रा,संतोष कुमार झा, कन्हैया लाल यादव,विवेक कुमार सिंह,उमेश प्रसाद, मनीष कुमार जायसवाल, पंकज पांडेय - सभी जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश,
लाल बिहारी पासवान मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, डा. दीवान फहद खान, सुशील प्रसाद सिंह, संदीप कुमार सिंह, अनिश कुमार - अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी/अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी, अभय सिंह, कुमार अभिजीत राय, मिस नीकिता राज, मिस शिवांगी - न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, तान्या पटेल सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार के साथ समस्त न्यायिक पदाधिकारी व कर्मचारीगण उपस्थित थे।
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