पटवारी साहब का ‘मन का नियम’! फोन उठेगा या नहीं, अब मूड तय करेगा? ग्रामीण परेशान, पत्रकारों पर भी गंभीर आरोप
छतरपुर में पटवारियों को लेकर ग्रामीणों की परेशानियां और बढ़ते सवालों ने नई बहस छेड़ दी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जमीन, मकान और राजस्व संबंधी कामों के लिए पटवारियों से संपर्क करना मुश्किल हो रहा है। दावा है कि कुछ मामलों में फोन उठाना भी पटवारी की इच्छा पर निर्भर बताया जा रहा है।
इसी बीच पत्रकारों पर “पैसे लेकर खबर चलाने” जैसे आरोप लगाए जाने की बात भी सामने आई है। सवाल है—अगर ऐसे आरोप हैं, तो क्या उनके समर्थन में कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक किए जाएंगे?
लोकतंत्र में सवाल उठाना गलत है या सवालों का जवाब देना जरूरी है?
अब छतरपुर की जनता जानना चाहती है—ग्रामीणों की शिकायतें कौन सुनेगा और जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
आपकी राय क्या है? कमेंट में बताइए।
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