*काकुईता देशाउली संरक्षण हेतु ऐतिहासिक बैठक संपन्न, समिति का हुआ गठन*
काकुईता, 21 जून 2026 (रविवार):
आज काकुईता देशाउली के संरक्षण, संवर्धन एवं भविष्य की सुरक्षा को लेकर मोंगरा, हेस्सापी और काकुईता गांव के ग्रामीणों की एक महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में तीनों गांवों के सैकड़ों पुरुष एवं महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और देशाउली की गरिमा एवं सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए अपने विचार प्रस्तुत किए।
काकुईता देशाउली तीनों गांवों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। वर्षों से यह स्थल ग्रामीणों के धार्मिक विश्वास और सामुदायिक एकता का प्रतीक रहा है। हाल के दिनों में देशाउली क्षेत्र में बाहरी लोगों की गतिविधियों तथा संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए यह बैठक आयोजित की गई, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस पवित्र स्थल को सुरक्षित रखा जा सके।
बैठक में मुख्य रूप से देशाउली संरक्षण समिति के गठन एवं सुदृढ़ीकरण, देशाउली क्षेत्र का सीमांकन, संरक्षण एवं संवर्धन की योजना, देशाउली सीमा में पथलगड़ी, तथा बाहरी लोगों के प्रवेश संबंधी नियम एवं प्रतिबंध जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। उपस्थित ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि देशाउली केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उनके पूर्वजों की धरोहर है, जिसकी रक्षा करना प्रत्येक ग्रामीण का दायित्व है।
बैठक के दौरान श्री सुखमोहन सिंकु, अर्जुन सिंकु, निर्मल सिंकु, सुरेंद्र सिंकु, गुराय सिंकु, चिरु सिंकु, मनोज तुबिड, सरजोम सिंकु सहित अनेक ग्रामीणों ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने देशाउली की पवित्रता बनाए रखने, प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने तथा बाहरी हस्तक्षेप को नियंत्रित करने की आवश्यकता पर बल दिया। सभी ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि सामूहिक प्रयासों और संगठित व्यवस्था के माध्यम से ही देशाउली का प्रभावी संरक्षण संभव है।
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय “काकुईता देशाउली संरक्षण समिति” का सर्वसम्मति से गठन रहा। समिति के गठन का उद्देश्य देशाउली क्षेत्र की सुरक्षा, विकास, संरक्षण तथा संबंधित नियमों के क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है।
देशाउली संरक्षण समिति (2026)
अध्यक्ष: रेशमा सिंकु
उपाध्यक्ष: सुरेंद्र सिंकु
सचिव: मनोज तुबिड
सह सचिव: अजय सिंकु
कोषाध्यक्ष: सुदर्शन सिंकु
सह कोषाध्यक्ष: सरजोम सिंकु
संयोजक: निर्मल सिंकु
सलाहकारगण:
सुखमोहन सिंकु, गुराय सिंकु, जड़ेयां सिंकु, चोटोराय सिंकु, चिरू सिंकु एवं मार्शल सिंकु
सदस्यगण:
गुरचरण सिंकु (हेस्सापी मुंडा), बिंदराय सिंकु, सुरेश चंद्र लागुरी, नंदलाल सिंकु, योगेश गोप, निर्मल सिंकु (दियुरी हेस्सापी), वीरसिंह बुड़िउली, डेविड सिंकु (मुंडा मोंगरा) एवं सतारी समुएल सिंकु (मुंडा काकुईता)।
बैठक के अंत में उपस्थित ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि काकुईता देशाउली की पवित्रता, प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक महत्व को हर परिस्थिति में सुरक्षित रखा जाएगा। साथ ही देशाउली क्षेत्र में प्रवेश, गतिविधियों एवं संरक्षण संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए समिति को पूर्ण सहयोग देने का भी निर्णय लिया गया।
यह बैठक तीनों गांवों की एकता, जागरूकता और अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी। ग्रामीणों ने विश्वास व्यक्त किया कि नवगठित समिति के नेतृत्व में काकुईता देशाउली का संरक्षण और विकास और अधिक सुदृढ़ रूप से आगे बढ़ेगा तथा यह पवित्र स्थल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और आस्था का केंद्र बना रहेगा।