मिट्टी के दीयों की बिक्री पर नहीं लगेगा टैक्स, हाट-बाजारों में कुम्हारों को मिलेगी मुफ्त जगह
नवरात्रि-दीपावली से पहले कुम्हारों को राहत, स्थानीय निकायों और ग्रामीण हाट-बाजारों में बिक्री के लिए जगह देने के निर्देश
देवास। नवरात्रि और दीपावली से पहले मिट्टी के दीये और पारंपरिक माटी उत्पाद बनाने वाले कुम्हारों के लिए राहत की खबर है। अब त्योहारों के दौरान अपने बनाए दीये, मिट्टी के खिलौने और सजावटी सामान बेचने के लिए उन्हें बाजार में जगह के लिए शुल्क नहीं देना होगा। साथ ही इन उत्पादों की बिक्री पर किसी तरह की कर वसूली भी नहीं की जाएगी।
कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने जिले के नगरीय निकायों और ग्रामीण क्षेत्रों में लगने वाले हाट-बाजारों में माटी शिल्पियों के लिए उचित स्थान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य त्योहारों के दौरान स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले मिट्टी के उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देना है।
चाक से बाजार तक आसान होगी पहुंच
त्योहारों के सीजन में मिट्टी के दीयों और सजावटी सामान की मांग बढ़ती है, लेकिन छोटे कारीगरों के सामने उत्पाद बेचने के लिए जगह और बाजार शुल्क जैसी दिक्कतें रहती हैं। प्रशासन के इस फैसले से माटी शिल्पियों को सीधे बाजार में अपनी दुकान लगाने का अवसर मिलेगा।
नगरीय और ग्रामीण हाट-बाजारों में उनके लिए उपयुक्त स्थान तय किए जाएंगे। यहां वे मिट्टी के दीये, खिलौने और अन्य पारंपरिक उत्पाद बेच सकेंगे।
स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा
प्रशासन की ओर से उठाए गए इस कदम से एक तरफ माटी शिल्पियों को त्योहारों में बिक्री का बाजार मिलेगा, वहीं स्थानीय स्तर पर तैयार पारंपरिक उत्पादों को भी बढ़ावा मिलेगा। खासकर दीपावली के दौरान मिट्टी के दीयों की बिक्री बढ़ने से कुम्हार परिवारों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
कलेक्टर ने संबंधित स्थानीय निकायों और ग्रामीण क्षेत्रों में बाजार व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।