ग्राम धरमपुरा के किसान श्री बालाराम साहू ने बताया कि नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग से उनके धान का उत्पादन अन्य खेतों की तुलना में अधिक हुआ और फसल की गुणवत्ता में भी सुधार आया।
उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरक पौधों द्वारा सीधे अवशोषित हो जाते हैं, जिससे पर्यावरण एवं जल प्रदूषण कम होता है तथा इनके उपयोग और परिवहन में भी सुविधा रहती है।
Kabirdham, Chhattisgarh | Jun 3, 2026