➡️ सेवा संकल्प अभियान 2026: सेवा की कहानी
➡️ औषधीय फसल अश्वगंधा की खेती से किसानों को मिल रहे अतिरिक्त आय के अवसर
सेवा संकल्प अभियान 2026 के तहत ‘कहानी सेवा की’ श्रृंखला में आज हम बात कर रहे हैं, सागर जिले के रहली विकासखंड के किसानों की, जो औषधीय फसल अश्वगंधा की खेती अपनाकर कृषि में नवाचार और आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
रहली विकासखंड में पिछले वर्ष कुछ किसानों ने लगभग 5 एकड़ क्षेत्र में अश्वगंधा की खेती की थी। इसके उत्साहजनक परिणामों के बाद इस वर्ष किसानों ने इसका रकबा बढ़ाकर लगभग 200 एकड़ कर दिया है। ग्राम रजवास, बरखेरा, कैलवास, बैदवारा, बलेह एवं रहली में अश्वगंधा की फसल लहलहा रही है। उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को औषधीय फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
ग्राम रजवास के युवा कृषक प्रशांत पटेल बताते हैं कि अश्वगंधा की खेती में अपेक्षाकृत कम लागत और प्रबंधन की आवश्यकता होती है। फसल के विभिन्न हिस्सों का उपयोग होने से किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलते हैं। उन्नत किस्मों और उचित कृषि प्रबंधन के माध्यम से किसान इस खेती को लाभकारी उद्यम के रूप में विकसित कर सकते हैं।
रहली के वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी श्री विदेश कुमार प्रजापति बताते हैं कि पूर्व में औषधीय क्षेत्र विस्तार योजना के अंतर्गत किसानों को अश्वगंधा और सफेद मूसली जैसी फसलों के बीज उपलब्ध कराए जाते थे। स्थानीय बाजार की उपलब्धता नहीं होने के कारण उस समय किसानों की रुचि सीमित थी। अब किसान अपनी उपज को मध्यप्रदेश की नीमच मंडी में बेचकर बेहतर मूल्य प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।
कोविड काल के बाद से औषधीय उत्पादों की मांग बढ़ने के कारण अश्वगंधा की खेती किसानों के लिए आय के नए अवसर प्रस्तुत कर रही है। जड़ों की गुणवत्ता और ग्रेडिंग के आधार पर बाजार में इसके मूल्य लगभग 20 हजार से 45 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बताए गए हैं।
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Sagar, Madhya Pradesh | Oct 11, 2026