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पुलिस उप निरीक्षक डॉ अशोक को सम्मान पुलिस बल के सर्वोच्च रक्तदाता, मानव सेवा को समर्पित; नशा मुक्ति अभियान के लिए साइकिल को बनाया प्रमुख साधन करनाल। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हरियाणा पुलिस के उपनिरीक्षक एवं हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में जागरूकता कार्यक्रम एवं पुनर्वास प्रभारी डॉ. अशोक कुमार वर्मा को उनकी उल्लेखनीय पुलिस सेवाओं, नशा मुक्ति अभियान, रक्तदान तथा व्यापक सामाजिक सेवाओं के लिए फरीदाबाद में हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री विपुल गोयल द्वारा सम्मानित किया गया। उनके नाम की अनुशंसा हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के उप पुलिस महानिरीक्षक श्री राजेंद्र कुमार मीणा, आईपीएस द्वारा की गई थी। डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने पुलिस सेवा को केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे मानव सेवा और सामाजिक जागरूकता का माध्यम बनाया। करनाल में जन्मे डॉ वर्मा ने 26 नवंबर 1998 को हरियाणा पुलिस में आरक्षक के रूप में अपनी सेवा प्रारंभ की। कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और निरंतर परिश्रम के बल पर पदोन्नति प्राप्त करते हुए वे उपनिरीक्षक बने। पुलिस सेवाओं में उत्कृष्ट एवं सराहनीय योगदान के लिए उन्हें 26 जनवरी 2020 को राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त राज्यपाल द्वारा उन्हें दो बार स्वर्ण पदक प्रदान किए जा चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्हें सम्मान प्राप्त हुआ है तथा उनकी सेवाओं के लिए अनेक प्रशस्ति-पत्र और अन्य सम्मान मिल चुके हैं। वर्ष 2001 से नशा मुक्ति अभियान में सक्रिय नशे के विरुद्ध डॉ. वर्मा का अभियान लंबे समय से जारी है। वे वर्ष 2001 से ही नशा मुक्ति जागरूकता के कार्य से जुड़े रहे और बाद में हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में दायित्व मिलने के बाद उन्होंने इसे व्यापक सामाजिक अभियान का रूप दे दिया। उन्होंने नशा मुक्ति जागरूकता को केवल सरकारी दायित्व न मानकर अपने जीवन का मिशन बना लिया। विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, ग्रामों, औद्योगिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों में लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर वे युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनके प्रयासों से 4,800 से अधिक जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से 19 लाख से अधिक लोगों को नशा मुक्ति की शपथ दिलाई गई है। वहीं 600 से अधिक नशा ग्रस्त लोगों को उपचार के लिए नशा मुक्ति केंद्रों तक पहुँचाने तथा 2,500 से अधिक परिवारों को परामर्श देने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जब हरियाणा सरकार द्वारा पूरे प्रदेश में नशामुक्ति के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए साइक्लोथॉन यात्राएँ आयोजित की गईं, तब डॉ. वर्मा हजारों पुलिसकर्मियों और युवाओं के साथ अग्रिम पंक्ति में साइकिल चलाते दिखाई दिए। पहली यात्रा 1 सितंबर 2023 से 25 सितंबर 2023 तथा दूसरी यात्रा 5 अप्रैल 2025 से 27 अप्रैल 2025 तक आयोजित हुई। साइकिल बनी जनजागरण का माध्यम नशामुक्ति संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने के लिए साइकिल डॉ. वर्मा के जीवन का प्रमुख साधन बन चुकी है। वे विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा अन्य संस्थानों के परिसरों में साइकिल चलाते हुए विद्यार्थियों और युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश देते हैं। उनका मानना है कि साइकिल केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्त समाज का संदेश देने का प्रभावी माध्यम है। वे अक्सर लंबी दूरी भी साइकिल से तय करते हैं और जहां भी जाते हैं, वहां लोगों से संवाद कर नशामुक्ति, रक्तदान और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करते हैं। उनके लिए साइकिल एक साधन से बढ़कर जनसेवा और जनजागरण का चलता-फिरता संदेश बन चुकी है। 184 बार रक्तदान, 90 बार प्लेटलेट्स दान रक्तदान के क्षेत्र में डॉ. वर्मा का योगदान अत्यंत उल्लेखनीय है। वे 184 बार रक्तदान, 90 बार प्लेटलेट्स दान तथा एक बार प्लाज्मा दान कर चुके हैं। उनके परिवार में भी रक्तदान की परंपरा है। उनकी पत्नी, पुत्र, पुत्रियां, परिवार के अन्य सदस्य और रिश्तेदार नियमित रूप से रक्तदान करते हैं। वर्ष 2010 से अब तक उनके प्रयासों से 601 से अधिक स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। इन शिविरों में 21,359 यूनिट से अधिक रक्त सरकारी रक्त कोषों तक पहुँचा, जिससे लगभग 64,077 मरीजों को लाभ मिला। रक्तदान के प्रति उनके समर्पण के कारण उन्हें पुलिस बल के सर्वोच्च रक्तदाताओं में विशेष पहचान प्राप्त है। डॉ. वर्मा का कहना है कि किसी अजनबी के शरीर में बहता अपना रक्त मानवता का सबसे सुंदर परिचय है। दुर्घटना पीड़ितों से लेकर बेसहारा पशुओं तक सेवा मानव सेवा का उनका दायरा रक्तदान और नशामुक्ति तक सीमित नहीं है। सड़क दुर्घटनाओं में घायल 47 से अधिक लोगों की समय पर सहायता, प्राथमिक उपचार, अस्पताल पहुँचाने और उपचार में सहयोग करने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बेसहारा एवं मृत पशुओं के अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कार्यों में भी वे आगे रहते हैं। रोटी बैंक के माध्यम से जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाने, वस्त्र वितरण, शिक्षा सहायता और विभिन्न सामाजिक अभियानों में भी वे सक्रिय भूमिका निभाते हैं। 18 हजार से अधिक पौधों का संरक्षण पर्यावरण संरक्षण भी उनके सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनके नेतृत्व और प्रेरणा से 18,000 से अधिक पौधे लगाए एवं संरक्षित किए जा चुके हैं। वे लोगों से केवल पौधा लगाने की अपील नहीं करते, बल्कि उसे वृक्ष बनने तक उसकी देखभाल करने का संदेश देते हैं। साइकिल चलाना, पौधारोपण और नशा मुक्ति जागरूकता उनके सामाजिक अभियान के प्रमुख आधार बन चुके हैं। अंगदान और नेत्रदान के लिए भी करते हैं प्रेरित डॉ. वर्मा स्वयं रक्तदान, नेत्रदान, अंगदान और देहदान का संकल्प ले चुके हैं। उन्होंने हजारों लोगों को भी अंगदान और नेत्रदान के लिए प्रेरित किया है। अपने दो सगे भाइयों के निधन के बाद उनके नेत्रदान करवाकर उन्होंने समाज के सामने मानवता और संवेदनशीलता का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। डॉ. वर्मा लेखक और कवि भी हैं। नशामुक्ति, रक्तदान, पर्यावरण संरक्षण और मानव सेवा से जुड़े उनके लेख एवं कविताएँ विभिन्न समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। सम्मान प्राप्त करने पर डॉ. वर्मा ने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार किसी जरूरतमंद का जीवन बचाना, किसी युवा को नशे से बचाना और किसी परिवार के चेहरे पर मुस्कान लौटाना है। उनका संदेश है— “रक्तदान जीवनदान है, नशा मुक्ति राष्ट्र रक्षा है, वृक्षारोपण भविष्य की सुरक्षा है और मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।” - Karnal News