डरी हुई सरकार और लाचार प्रशासन यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि उत्तर प्रदेश में "सन ऑफ मल्लाह" के आने से कानून-व्यवस्था बिगड़ जाती है।
कुछ दिन पहले गाजीपुर में स्वर्गीय कमलेश बिंद जी के परिजनों से मिलने जा रहे VIP सुप्रीमो एवं पूर्व मंत्री श्री मुकेश सहनी जी को पुलिस प्रशासन ने कई घंटों तक रास्ते में रोककर वाराणसी वापस भेज दिया था।
आज जौनपुर के चर्चित दूल्हा अजीत बिंद हत्याकांड में पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे श्री मुकेश सहनी जी को आजमगढ़ में, घटना स्थल से लगभग 150 किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया। जबकि मृतक की बहन कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठी हैं।
यदि सरकार को श्री मुकेश सहनी जी से राजनीतिक आपत्ति है, तो यह भी बताए कि इन मामलों के आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई? पीड़ित परिवार को न्याय कब मिलेगा?
जब किसी पूर्व मंत्री के दौरे की सूचना प्रशासन को पहले से दी जाती है, तो उसी समय अनुमति या रोक का निर्णय क्यों नहीं लिया जाता? आखिरी समय में रोक लगाना क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप है?
जनता जानना चाहती है कि आखिर सरकार पीड़ितों तक विपक्षी नेताओं को पहुंचने से क्यों रोक रही है।
Dumra, Sitamarhi | Jun 28, 2026