चित्रकूट की एक ऐसी जमीनी खबर से, जहां प्रशासनिक दावों की धज्जियां उड़ रही हैं। सवाल
गड्ढों में सड़क ढूंढनी पड़ रही है या सड़क के नाम पर सिर्फ तालाब बचे हैं... यह सवाल अब हम नहीं, बल्कि चित्रकूट जिले की मऊ तहसील की बेबस जनता पूछ रही है! बम्बुरा चौराहा से मंडौर-मटियारा और सुरौधा को जोड़ने वाला यह मुख्य संपर्क मार्ग अब सड़क कम और कोई गहरा तालाब ज्यादा नजर आ रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस मार्ग की बर्बादी का सबसे बड़ा कारण दिन-रात दौड़ने वाले ओवरलोड वाहन हैं। जिस संपर्क मार्ग से कभी रोजाना हजारों गाड़ियों की आवाजाही होती थी, आज वहां हादसों के डर से महज 10 से 15 गाड़ियां ही गुजर पा रही हैं। यह सिर्फ एक रास्ता नहीं है, बल्कि आसपास के 40 से 50 गांवों की लाइफलाइन है, जो आज पूरी तरह से ठप्प पड़ी है। सूत्रों की मानें तो बीते 10 सालों से इस क्षेत्र के ग्रामीण एक अदद पक्की सड़क के निर्माण का इंतजार कर रहे हैं। आए दिन इस रास्ते पर गाड़ियां पलटती हैं और लोग चोटिल होते हैं। कई बार सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों के जरिए इस मुद्दे पर आवाज उठाई गई, लेकिन चित्रकूट का पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है। अधिकारियों पर गंभीर आरोप हैं कि वे मौके पर जाए बिना ही ट्विटर और सरकारी फाइलों में सब कुछ ठीक होने की फर्जी रिपोर्ट लगा देते हैं। कागजों पर सड़क गड्ढा-मुक्त दिखाई जाती है, लेकिन धरातल पर सच्चाई प्रशासनिक दावों की धज्जियां उड़ा रही है! अब सवाल यह उठता है कि आखिर चित्रकूट का पीडब्ल्यूडी प्रशासन कब जागेगा? क्या इन खतरनाक गड्ढों को भरने के लिए किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है? या फिर हर बार की तरह जनता को सिर्फ चुनाव बीतने के बाद काम शुरू होने का झुनझुना थमाया जाएगा?
हम प्रशासन से सीधा जवाब मांगते हैं—चित्रकूट की इस जनता को गड्ढा-मुक्त सड़क आखिरकार कब मिलेगी?