मसूरी में कूड़े के विशाल ढेर में लगी भीषण आग ने नगर पालिका की कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आईडीएच क्षेत्र में लगी आग पर काबू पाने के लिए तीन दमकल वाहनों को करीब पांच घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी। फायर हाइड्रेंट की व्यवस्था न होने से राहत कार्य भी प्रभावित रहा।
सवाल यह है कि रिहायशी क्षेत्र के पास इतनी बड़ी मात्रा में कूड़ा आखिर किस सुरक्षा मानक के तहत जमा किया गया था? अगर समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
क्या नगर पालिका इस लापरवाही की जिम्मेदारी तय करेगी या फिर हादसे के बाद भी सब कुछ पहले जैसा ही चलता रहेगा?
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