*-4 जिला बैंकों को करोड़ों की चपत, फिर भी दस्तावेजों के फेर में उलझी जांच; पूर्व CEO अरस्तु प्रभाकर पर अपेक्स बैंक सख्त-*
जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक गुना, शिवपुरी, मुरैना और भिण्ड को आर्थिक रूप से चूना लगाने के आरोपी पूर्व मुख्य कार्यपालन अधिकारी अरस्तु प्रभाकर के खिलाफ विभागीय जांच कागजों में ही अटकी हुई है। लापरवाही इतनी कि जांच अधिकारी को सौंपे गए आरोप पत्र को ही जांच अधिकारी ने अपर्याप्त बता दिया। अब अपेक्स बैंक को मैदान में उतर कर सख्ती दिखानी पड़ी है।
मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) भोपाल ने स्पीड पोस्ट से जारी आदेश क्रमांक M.P. (H.O.)/पदर/प्रसं/1816 दिनांक 16-10-2026 में साफ कहा है कि श्री प्रभाकर पर प्रतिनियुक्ति अवधि में ऋण वितरण और वसूली के सरकारी लक्ष्यों को जानबूझकर नजरअंदाज करने का गंभीर आरोप है। आरोप पत्र के मुताबिक उनके कार्यकाल में लक्ष्य के अनुरूप काम नहीं होने से गुना, शिवपुरी और भिण्ड जिला बैंकों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी। इसको लेकर जिला बैंक मुरैना द्वारा 05 अगस्त 2025 को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
मामले की जांच के लिए शासन ने संयुक्त आयुक्त सहकारिता चंबल संभाग मुरैना सुश्री अनीता उईके को जांच अधिकारी और शीर्ष बैंक ग्वालियर शाखा के प्रबंधक को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त किया है। 18 जून 2026 को जांच अधिकारी के समक्ष हुई आमने-सामने की चर्चा में बड़ा खुलासा हुआ। जांच अधिकारी ने दो टूक कहा कि मुरैना बैंक की ओर से जो आरोप पत्र और फोटोकॉपी दस्तावेज दिए गए हैं, वे विभागीय जांच के लिए पर्याप्त नहीं हैं। नियम के अनुसार पदेन सीईओ के हस्ताक्षर वाला पृथक आरोप पत्र, आरोपों का सिलसिलेवार विवरण, आरोप सिद्ध करने वाले मूल दस्तावेजों की सत्यापित सूची और गवाहों की सूची चाहिए।
जांच अधिकारी की इस आपत्ति के बाद जिला बैंक मुरैना ने 18 जुलाई 2026 को पत्र क्रमांक 1443 और 1445 लिखकर अपेक्स बैंक से गुहार लगाई थी कि संबंधित तीनों जिला बैंकों से दस्तावेज जुटाकर उपलब्ध कराए जाएं। इसी पर अब अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक मनोज कुमार गुप्ता ने सख्त रुख अपनाते हुए गुना, शिवपुरी और भिण्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को आदेशित किया है कि अपने-अपने बैंक में उपलब्ध ऋण वितरण, वसूली, लक्ष्य पूर्ति, ऑडिट आपत्ति और संबंधित पत्रावलियों की सत्यापित प्रतियां तुरंत प्रस्तुतकर्ता अधिकारी को सौंपें।
सूत्र बताते हैं कि यह मामला सहकारिता विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ करोड़ों के नुकसान का आरोप है तो दूसरी तरफ जांच ही दस्तावेजों के अभाव में लटकी है। इससे सवाल उठ रहा है कि क्या संबंधित जिला बैंक जानबूझकर दस्तावेज देने में देरी कर रहे हैं ताकि पूर्व सीईओ को बचाया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि सहकारी बैंकों में इस तरह लक्ष्य से कम वसूली और वितरण का सीधा असर किसानों और छोटे कर्जदारों पर पड़ता है। यदि समय पर ऋण वसूली नहीं होती है तो बैंकों की एनपीए बढ़ती है और अंततः आम किसानों को नए ऋण मिलने में परेशानी होती है। इसलिए इस जांच को केवल एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरी सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को दुरुस्त करने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
अब गेंद गुना, शिवपुरी और भिण्ड जिला बैंकों के पाले में है। यदि समय पर दस्तावेज नहीं दिए गए तो जांच अधिकारी पूरी रिपोर्ट शासन को भेजकर बैंकों की भूमिका पर भी सवाल खड़ा कर सकते हैं। अपेक्स बैंक ने स्पष्ट कर दिया है कि जांच में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने पर अरस्तु प्रभाकर के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई तय है।