अभी से खंडहर बनने की कगार पर बिल्डिंग, काम अधूरा, लेकिन दीवारों में दरारें और पानी का रिसाव शुरू; भ्रष्टाचार के गहरे जख्म आए सामने,
मुरैना के अंबाह सिविल हॉस्पिटल की नवनिर्मित बिल्डिंग भ्रष्टाचार और घोर लापरवाही का ऐसा अखाड़ा बन चुकी है, जिसकी पोल अब खुलकर सामने आने लगी है। स्थिति यह है कि जनता के करोड़ों रुपये से बन रही इस बिल्डिंग में घपले-घोटालों को छिपाने के लिए अब 'सेंसरशिप' का सहारा लिया जा रहा है!
पर्दाफाश से घबराए लोग, पत्रकारों को रोका!
जब मीडियाकर्मी इस नई चमचमाती बिल्डिंग की जमीनी हकीकत जानने पहुंचे, तो तथाकथित ठेकेदारों और प्रबंधकों के पेट में चूहे दौड़ने लगे। पत्रकारों को अंदर जाने से यह कहकर रोक दिया गया कि "अंदर जाना खतरनाक है, सुरक्षा कारणों से मनाही है!"
अरे भाई! सुरक्षा सिर्फ पत्रकारों के लिए है क्या?
तड़कता-भड़कता सवाल यह है कि अगर अंदर जाना इतना ही खतरनाक था, तो ठीक उसी बिल्डिंग के बगल में मासूम मजदूर बिना किसी सुरक्षा उपकरण (बिना हेलमेट, बिना सेफ्टी बेल्ट) के जान जोखिम में डालकर दूसरी मंजिल पर काम क्यों कर रहे थे? जब मौके पर मौजूद निजी कारिंदों को इस दोहरे रवैये और मजदूरों की जान से खिलवाड़ का आईना दिखाया गया, तो उनकी बोलती बंद हो गई और वे एकदम मौन व्रत पर चले गए!
काम पूरा नहीं, उससे पहले ही टपकने लगी इमारत!
हदों तो तब पार हो गईं जब पता चला कि यह बिल्डिंग अभी पूरी तरह तैयार भी नहीं हुई है, लेकिन इससे पहले ही इसके घटिया निर्माण की पोल पट्टी उखड़ने लगी है। नई-नवेली दीवारों में अभी से बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं और बारिश या सीलन के नाम पर पानी का रिसाव भी शुरू हो गया है। साफ है कि सरकारी पैसों की किस तरह से लीपापोती की जा रही है।
अब देखना यह होगा कि इस सनसनीखेज खुलासे के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या फिर इस भ्रष्टाचार के खेल पर पर्दा डालने की कोशिश जारी रखते हैं!