Public App Logo
Jansamasya
News
पुलिस
Maharashtra
Bjp
National
Police
Bihar
Coronavirus
कांग्रेस
मौत
Accident
Congress
Modi
Delhi
Viral
मध्यप्रदेश
Bollywood
Breakingnews
Narendramodi
Madhya_pradesh
Mp
Madhyapradesh
Pmmodi
Rahulgandhi
Chhattisgarh
Uttarpradesh
Haryana
Uttarakhand
लखनऊ
No video available

सहसवान के नगरपालिका अध्यक्ष मीर हादी अली बाबर मियां से खास बातचीत #Budaun #Sahaswan #budaun

Sahaswan, Budaun | Jan 10, 2022

MORE NEWS

हरिओम की मौत एक बेहद दुखद घटना है। पीड़ित परिवार के दर्द को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। ऐसे समय में गुस्सा और आक्रोश स्वाभाविक है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी पूरी तरह उचित है।

लेकिन नाधा में जो कुछ हुआ, उसने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया। पुलिस और प्रशासन करीब पांच घंटे तक परिजनों से वार्ता करते रहे। छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका था। अधिकारियों ने संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच और कार्रवाई का भी आश्वासन दिया। यानी प्रशासन की ओर से कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही थी।

इसके बावजूद एक व्यक्ति द्वारा अपने ऊपर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किए जाने से पूरा माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को हटाया। लाठीचार्ज की घटना निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है और इसकी भी निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए, क्योंकि किसी निर्दोष व्यक्ति को चोट पहुंचना स्वीकार्य नहीं हो सकता।

लेकिन यह भी उतना ही सच है कि एक व्यक्ति के इस कदम का खामियाजा वहां मौजूद दर्जनों लोगों को भुगतना पड़ा। कई लोग भगदड़ में गिरे, कई को पुलिस की लाठियां झेलनी पड़ीं और पूरे आंदोलन का स्वरूप बदल गया।

लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन कानून के दायरे में रहकर किया गया विरोध ही सबसे प्रभावी और सम्मानजनक माना जाता है। जब प्रशासन कार्रवाई कर रहा हो और बातचीत का रास्ता खुला हो, तब ऐसा कोई कदम नहीं उठना चाहिए जिससे हालात और बिगड़ जाएं।

न्याय जरूरी है, लेकिन संयम भी उतना ही जरूरी है। भावनाओं में लिया गया एक फैसला कभी-कभी सैकड़ों लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। यही इस पूरे घटनाक्रम से सबसे बड़ी सीख है।

हरिओम की मौत एक बेहद दुखद घटना है। पीड़ित परिवार के दर्द को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। ऐसे समय में गुस्सा और आक्रोश स्वाभाविक है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी पूरी तरह उचित है। लेकिन नाधा में जो कुछ हुआ, उसने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया। पुलिस और प्रशासन करीब पांच घंटे तक परिजनों से वार्ता करते रहे। छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका था। अधिकारियों ने संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच और कार्रवाई का भी आश्वासन दिया। यानी प्रशासन की ओर से कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही थी। इसके बावजूद एक व्यक्ति द्वारा अपने ऊपर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किए जाने से पूरा माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को हटाया। लाठीचार्ज की घटना निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है और इसकी भी निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए, क्योंकि किसी निर्दोष व्यक्ति को चोट पहुंचना स्वीकार्य नहीं हो सकता। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि एक व्यक्ति के इस कदम का खामियाजा वहां मौजूद दर्जनों लोगों को भुगतना पड़ा। कई लोग भगदड़ में गिरे, कई को पुलिस की लाठियां झेलनी पड़ीं और पूरे आंदोलन का स्वरूप बदल गया। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन कानून के दायरे में रहकर किया गया विरोध ही सबसे प्रभावी और सम्मानजनक माना जाता है। जब प्रशासन कार्रवाई कर रहा हो और बातचीत का रास्ता खुला हो, तब ऐसा कोई कदम नहीं उठना चाहिए जिससे हालात और बिगड़ जाएं। न्याय जरूरी है, लेकिन संयम भी उतना ही जरूरी है। भावनाओं में लिया गया एक फैसला कभी-कभी सैकड़ों लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। यही इस पूरे घटनाक्रम से सबसे बड़ी सीख है।

Sahaswan, Budaun | Jul 15, 2026

हरिओम की मौत एक बेहद दुखद घटना है। पीड़ित परिवार के दर्द को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। ऐसे समय में गुस्सा और आक्रोश स्वाभाविक है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी पूरी तरह उचित है।

लेकिन नाधा में जो कुछ हुआ, उसने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया। पुलिस और प्रशासन करीब पांच घंटे तक परिजनों से वार्ता करते रहे। छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका था। अधिकारियों ने संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच और कार्रवाई का भी आश्वासन दिया। यानी प्रशासन की ओर से कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही थी।

इसके बावजूद एक व्यक्ति द्वारा अपने ऊपर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किए जाने से पूरा माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को हटाया। लाठीचार्ज की घटना निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है और इसकी भी निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए, क्योंकि किसी निर्दोष व्यक्ति को चोट पहुंचना स्वीकार्य नहीं हो सकता।

लेकिन यह भी उतना ही सच है कि एक व्यक्ति के इस कदम का खामियाजा वहां मौजूद दर्जनों लोगों को भुगतना पड़ा। कई लोग भगदड़ में गिरे, कई को पुलिस की लाठियां झेलनी पड़ीं और पूरे आंदोलन का स्वरूप बदल गया।

लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन कानून के दायरे में रहकर किया गया विरोध ही सबसे प्रभावी और सम्मानजनक माना जाता है। जब प्रशासन कार्रवाई कर रहा हो और बातचीत का रास्ता खुला हो, तब ऐसा कोई कदम नहीं उठना चाहिए जिससे हालात और बिगड़ जाएं।

न्याय जरूरी है, लेकिन संयम भी उतना ही जरूरी है। भावनाओं में लिया गया एक फैसला कभी-कभी सैकड़ों लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। यही इस पूरे घटनाक्रम से सबसे बड़ी सीख है।

हरिओम की मौत एक बेहद दुखद घटना है। पीड़ित परिवार के दर्द को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। ऐसे समय में गुस्सा और आक्रोश स्वाभाविक है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी पूरी तरह उचित है। लेकिन नाधा में जो कुछ हुआ, उसने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया। पुलिस और प्रशासन करीब पांच घंटे तक परिजनों से वार्ता करते रहे। छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका था। अधिकारियों ने संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच और कार्रवाई का भी आश्वासन दिया। यानी प्रशासन की ओर से कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही थी। इसके बावजूद एक व्यक्ति द्वारा अपने ऊपर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किए जाने से पूरा माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को हटाया। लाठीचार्ज की घटना निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है और इसकी भी निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए, क्योंकि किसी निर्दोष व्यक्ति को चोट पहुंचना स्वीकार्य नहीं हो सकता। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि एक व्यक्ति के इस कदम का खामियाजा वहां मौजूद दर्जनों लोगों को भुगतना पड़ा। कई लोग भगदड़ में गिरे, कई को पुलिस की लाठियां झेलनी पड़ीं और पूरे आंदोलन का स्वरूप बदल गया। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन कानून के दायरे में रहकर किया गया विरोध ही सबसे प्रभावी और सम्मानजनक माना जाता है। जब प्रशासन कार्रवाई कर रहा हो और बातचीत का रास्ता खुला हो, तब ऐसा कोई कदम नहीं उठना चाहिए जिससे हालात और बिगड़ जाएं। न्याय जरूरी है, लेकिन संयम भी उतना ही जरूरी है। भावनाओं में लिया गया एक फैसला कभी-कभी सैकड़ों लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। यही इस पूरे घटनाक्रम से सबसे बड़ी सीख है।

Sahaswan, Budaun | Jul 15, 2026

🚨 बदायूं ब्रेकिंग

जरीफनगर थाना क्षेत्र के गांव कादरनगर उर्फ कादरचौक निवासी हरिओम की पुरानी रंजिश में हुए विवाद के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना से आक्रोशित परिजनों ने सहसवान–इस्लामनगर रोड पर नाधा पुलिस चौकी के सामने जाम लगाकर आरोपियों की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की। मौके पर पुलिस व प्रशासन लोगों को समझाने में जुटा है।

#Budaun #Sahaswan #Jarifnagar #BreakingNews #UttarPradesh
#CrimeNews

🚨 बदायूं ब्रेकिंग जरीफनगर थाना क्षेत्र के गांव कादरनगर उर्फ कादरचौक निवासी हरिओम की पुरानी रंजिश में हुए विवाद के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना से आक्रोशित परिजनों ने सहसवान–इस्लामनगर रोड पर नाधा पुलिस चौकी के सामने जाम लगाकर आरोपियों की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की। मौके पर पुलिस व प्रशासन लोगों को समझाने में जुटा है। #Budaun #Sahaswan #Jarifnagar #BreakingNews #UttarPradesh #CrimeNews

Sahaswan, Budaun | Jul 14, 2026