समाहरणालय पूर्णिया,
जनसंपर्क कार्यालय,
प्रेस विज्ञप्ति:-1287,
दिनांक 6 सितंबर2026,
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पूर्णिया में 15 दिवसीय आम्रपाली प्रशिक्षण कार्यक्रम का 13 वां दिन:---- बधाइयां सोहर, देवी पचरा और झूमर लोकगीत और सोहर,झूमर एवं जाट जतिन
लोकनृत्य के अभ्यास से लाभान्वित हुए प्रतिभागी।
कला एवं संस्कृति विभाग तथा जिला प्रशासन, पूर्णिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 15 दिवसीय विलुप्तप्राय लोकगीत एवं लोकनृत्य प्रशिक्षण कार्यक्रम के 13 वे दिन रविवार को प्रेक्षागृह सह आर्ट गैलरी (आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र) पूर्णिया में प्रशिक्षण कार्यशाला में बधाइयां,झूमर,सोहर के साथ-साथ देवी पचरा,के लोकगीत एवं लोक नृत्य विद्या के विभिन्न प्रकार प्रतिभागियों को सीखने को मिला।
25 अगस्त से शुरू होकर 08 सितंबर 2026 तक चलने वाली इस निःशुल्क कार्यशाला में अररिया से चलकर आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र में आए हुए अतिथि प्रशिक्षक प्रसिद्ध लोक गायक श्री अमर आनंद ने विभिन्न प्रकार के लोकगीतों से बच्चों एवं कलाकारों को परिचय कराया उसके साथ ही साथ बिहार की समृद्ध लोक परंपराओं का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया।
प्रशिक्षण में लोक विधाओं का अभ्यास:-- प्रतिभागियों को झूमर , सोहर,बधाइयां , देवी पचरा एवं लोकनृत्य में सोहर, कजरी, झूमर, जाट जतिन लोक नृत्य का अभ्यास कराया गया।
मंचीय प्रस्तुति पर जोर:-
प्रशिक्षकों ने विविध प्रकार के सोहर, बधाइयां, खिलौना, झूमर एवं पचरा लोकगीत एवं लोक नृत्य का आज अभ्यास कराया।
लोक विधाओं के मूल एवं परंपरागत स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए कलाकारों को उसके शास्त्र पक्ष के साथ-साथ प्रयोग पक्ष एवं बेहतर मंचीय प्रस्तुति को ध्यान में रखते हुए लोक गायन और लोक नृत्य के गुर सिखाएं गएं।
सांस्कृतिक संरक्षण:-- कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बिहार की विलुप्तप्राय लोकगीत व लोकनृत्य विधाओं को जीवंत बनाए रखना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
रविवार को प्रशिक्षकों के द्वारा देवी पचरा के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के लोकगीत एवं लोक नृत्य का प्रशिक्षण दिया गया । जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्री पंकज कुमार पटेल के द्वारा अतिथि प्रशिक्षक प्रसिद्ध लोक गायक श्री अमर आनंद को इस कार्यशाला में आकर प्रशिक्षण देने के लिए धन्यवाद दिया गया।इस अवसर पर 15 दिवसीय विलुप्तप्राय लोकगीत एवं लोक नृत्य के प्रशिक्षक श्री अमित कुमार एवं लोक गीत के प्रशिक्षक श्रीमती चांदनी शुक्ला के द्वारा भी विभिन्न प्रकार के विलुप्तप्राय लोकगीत एवं लोक नृत्य का प्रशिक्षण लगातार दिया जा रहा है।
Purnia, Bihar | Sep 6, 2026