रायबरेली: बीईओ के व्हाट्सएप स्टेटस पर उठा विवाद, सरकारी अधिकारी की सोशल मीडिया मर्यादा पर छिड़ी बहस
रायबरेली में सतांव की खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) सुश्री शीतल श्रीवास्तव के एक व्हाट्सएप स्टेटस को लेकर चर्चा और विवाद का माहौल बन गया है। राम मंदिर में हुई कथित चोरी की घटना को लेकर देशभर में विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच बीईओ के व्हाट्सएप स्टेटस में लिखी एक टिप्पणी ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
स्टेटस में लिखा गया था, "अच्छा हुआ कि राम जी की सेना में वानर थे, अयोध्या ट्रस्ट वाले होते तो सोने की लंका देखकर रावण की साइड हो जाते।" इस टिप्पणी को कुछ लोग व्यंग्य के रूप में देख रहे हैं, जबकि कई लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं और सार्वजनिक संस्थाओं पर कटाक्ष बताते हुए आपत्ति जताई है।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि संबंधित व्हाट्सएप प्रोफाइल पर विभागीय पहचान के साथ सर्व शिक्षा अभियान का लोगो भी प्रदर्शित बताया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस प्रकार की टिप्पणी को केवल निजी अभिव्यक्ति माना जाए या फिर इसे एक सरकारी अधिकारी की सार्वजनिक टिप्पणी के रूप में देखा जाए।
सरकारी सेवकों से अपेक्षा की जाती है कि वे सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर संतुलित, निष्पक्ष और मर्यादित आचरण बनाए रखें। शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी और भी अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि वे विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
स्थानीय स्तर पर इस स्टेटस को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। लोगों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी द्वारा आचरण नियमावली के विपरीत गतिविधि की जाती है तो विभाग कार्रवाई करता है, ऐसे में इस मामले में भी तथ्यों के आधार पर विभागीय स्तर पर स्पष्टीकरण लिया जाना चाहिए।
हालांकि, इस मामले में अभी तक संबंधित अधिकारी की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारियों की निगाहें भी इस प्रकरण पर टिकी हुई हैं। अब देखना यह होगा कि बेसिक शिक्षा विभाग इस मामले को किस रूप में लेता है और क्या कोई औपचारिक जांच या स्पष्टीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाती है।