आज वही गणेश बारैया डॉक्टर हैं, लोगों की जिंदगी बचा रहे हैं और 15 अगस्त 2026 को भावनगर जिला होमगार्ड कार्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
यह वही गणेश हैं जिन्होंने अपनी शारीरिक चुनौतियों के बावजूद नीत क्वालिफाई किया, एमबीबीएस पूरा किया और डॉक्टर बनने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।
आज उनके हाथों में सम्मान था, सामने तिरंगा था और पीछे एक ऐसी कहानी थी जो हर उस इंसान को जवाब देती है जो किसी की क्षमता को उसके शरीर या कद से आंकता है।
कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के बलिदान को नमन करने के साथ रक्तदान, अंगदान और देहदान के महत्व पर भी जागरूकता अभियान चलाया गया। उपस्थित लोगों ने स्वैच्छिक देहदान की प्रतिज्ञा लेकर सेवा और मानवता का संदेश दिया।
जिस बच्चे को कभी दुनिया तमाशे का हिस्सा बनाना चाहती थी, आज वही दुनिया के सामने इंसानियत की मिसाल बनकर खड़ा है।
कद छोटा हो सकता है... हौसला नहीं