एसआईआर के विरोध में सीटू और किसान सभा का प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
-निरथ, रामपुर, निरमंड, बायल और झाकड़ी में प्रदर्शन; जंतर-मंतर को विरोध स्थल से हटाने का आदेश रद्द करने की उठाई मांग
Bushahr Today TV
रामपुर बुशहर। सीटू और हिमाचल किसान सभा ने शुक्रवार को निरथ, रामपुर, निरमंड, बायल और झाकड़ी में प्रदर्शन कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग उठाई। संगठनों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के माध्यम से मेहनतकश जनता को मताधिकार से वंचित करने का आरोप लगाते हुए इस प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की। साथ ही दिल्ली पुलिस की ओर से जंतर-मंतर को शांतिपूर्ण विरोध स्थल से हटाने के आदेश को रद्द करने की मांग भी की गई।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए हिमाचल किसान सभा के राज्य अध्यक्ष राकेश सिंघा, राज्य सचिव देवकी नंद, सीटू के शिमला जिला अध्यक्ष कुलदीप सिंह, जिला सचिव नील दत्त, दिनेश मेहता, किसान सभा के जिला अध्यक्ष रणजीत ठाकुर, महासचिव प्रेम चौहान सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त का रवैया मनमाना और तानाशाहीपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के कारण कामगारों, गरीबों, प्रवासी मजदूरों और हाशिये पर रहने वाले लोगों के मताधिकार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
सीटू जिला अध्यक्ष कुलदीप सिंह ने 23 सितंबर 2026 को द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। इनमें मतदाता सूची के आंकड़ों का केंद्रीकरण, क्षेत्रीय अधिकारियों के लिए ईसीआई नेट प्रणाली की अनुपलब्धता और पश्चिम बंगाल में मताधिकार से वंचित मतदाताओं के दावों के खिलाफ कथित अनधिकृत अपीलें शामिल हैं। वक्ताओं ने कहा कि ऐसी प्रक्रियाओं से पात्र मतदाताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और कई लोगों को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए अपनी रोजी-रोटी छोड़कर भटकना पड़ रहा है।
वक्ताओं ने आशंका जताई कि मतदाता सूची में नाम नहीं होने पर सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित करने संबंधी कुछ मुख्यमंत्रियों के बयानों से गरीबों और कामगारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि यदि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभ के लिए मतदाता पहचान पत्र को अनिवार्य किया गया, तो मतदाता सूची से बाहर हुए पात्र लोग सरकारी सहायता से भी वंचित हो सकते हैं। संगठनों ने इसे लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों के लिए गंभीर खतरा बताया।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता
सीटू और किसान सभा ने एसआईआर का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों, विशेषकर छात्रों और युवाओं के प्रति एकजुटता जताई। संगठनों ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। उन्होंने दिल्ली पुलिस पर प्रदर्शनकारियों के साथ दमनात्मक कार्रवाई करने तथा महिला छात्रों और पत्रकारों के कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों की तत्काल जांच की मांग की। उन्होंने दोषियों की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग भी उठाई।
संगठनों ने राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर अवैध रूप से घरों में नजरबंद किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई नागरिकों की निजता और लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने सरकार से ऐसी कार्रवाई रोकने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के लिए अनुकूल माहौल सुनिश्चित करने की मांग की।
सात प्रमुख मांगें उठाईं
सीटू और किसान सभा ने मांग की कि एसआईआर के दौरान सामने आए कथित उल्लंघनों और अनियमितताओं की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। चुनाव आयोग का गठन निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार करने, एसआईआर को तत्काल रोकने और मताधिकार से वंचित सभी पात्र लोगों को मतदाता सूची में शामिल करने की मांग भी उठाई गई।
इसके अलावा जंतर-मंतर को शांतिपूर्ण विरोध स्थल से हटाने का आदेश रद्द करने, प्रदर्शनकारियों पर हमलों और महिला छात्रों व पत्रकारों के कथित यौन उत्पीड़न की जांच कराने तथा राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं को अवैध रूप से नजरबंद करने की प्रथा बंद करने की मांग की गई।
प्रदर्शन में काम राज, राजकुमार, राहुल विद्यार्थी, देविंदर, आशा, राजपाल भंडारी, प्रमोद, संजीव, तिलक और अजय शर्मा सहित कई कार्यकर्ता शामिल रहे।
Rampur, Shimla | Oct 23, 2026