नहर टूटी, खेतों में बहा पानी; सी ग्रुप रेगुलेशन पर संकट के बादल!
सिद्धमुख फीडर में 100 फुट लंबा कटाव, रबी की सिंचाई पर संकट; विनोद जांगिड़ ने रेगुलेशन तत्काल निरस्त कर नए सिरे से निर्धारित करने की उठाई मांग
नोहर 29 अक्टूबर रबी सीजन में सिंचाई पानी की आस लगाए बैठे नोहर-सिद्धमुख क्षेत्र के किसानों की उम्मीदों को सिद्धमुख फीडर में आए कटाव ने झटका दिया है। हरियाणा के हिसार जिले के कालीरावण गांव के पास शुक्रवार को आरडी 70 हजार के नजदीक फीडर नहर में करीब 100 फुट लंबा कटाव आ गया। इससे नहरी पानी आसपास के खेतों में फैल गया और फसलों को नुकसान पहुंचा। सी ग्रुप रेगुलेशन के बीच हुई इस घटना ने नोहर क्षेत्र की निर्धारित सिंचाई व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है। सबसे गंभीर पहलू यह है कि नोहर-सिद्धमुख सिंचाई परियोजना की महत्वपूर्ण जलापूर्ति व्यवस्था का आधार मानी जाने वाली सिद्धमुख फीडर में भारी मात्रा में सिल्ट जमा है तथा जगह-जगह पेड़-पौधे उगे हुए हैं। नहर की यह स्थिति नियमित सफाई, निरीक्षण और रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते सफाई और तकनीकी निरीक्षण किया जाता तो क्या इस तरह की स्थिति से बचा जा सकता था? यह सवाल अब किसानों के साथ-साथ सिंचाई विभाग के सामने भी है। गौरतलब है कि नोहर क्षेत्र में 28 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक सी ग्रुप रेगुलेशन निर्धारित है। रेगुलेशन के दौरान ही फीडर क्षतिग्रस्त होने से निर्धारित जलापूर्ति प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है। किसानों के सामने विडंबना यह है कि एक ओर रबी फसलों की बुवाई और सिंचाई के लिए पानी की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर फीडर में कटाव के चलते पानी की उपलब्धता ही अनिश्चित हो गई है।
इस स्थिति को देखते हुए जिले के निवर्तमान लोकपाल विनोद जांगिड़ ने सी ग्रुप रेगुलेशन तत्काल निरस्त करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि जब फीडर क्षतिग्रस्त है और नोहर-सिद्धमुख क्षेत्र तक पानी पहुंचने की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं है, तब मौजूदा रेगुलेशन जारी रखने का औचित्य नहीं है। पहले फीडर की मरम्मत करवाकर जलापूर्ति सुचारु की जाए और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होने के बाद किसानों की जरूरत के अनुरूप नया रेगुलेशन निर्धारित किया जाए। जांगिड़ ने फीडर की युद्धस्तर पर मरम्मत, जमा सिल्ट की निकासी, उगे पेड़-पौधों की सफाई और पूरी नहर की तकनीकी जांच करवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि केवल टूटे हिस्से की मरम्मत कर विभाग अपनी जिम्मेदारी पूरी न माने, बल्कि पूरी फीडर की स्थिति का आकलन कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी उपाय करे।
उल्लेखनीय है कि खरीफ सीजन में अल्पवृष्टि और पर्याप्त नहरी पानी नहीं मिलने से नोहर क्षेत्र के किसान पहले ही सिंचाई संकट और फसल नुकसान झेल चुके हैं। अब रबी सीजन की शुरुआत में सिद्धमुख फीडर टूटने से किसानों की परेशानी और बढ़ने की आशंका है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि नहरों में पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालने वाला विभाग किसानों को समय पर सिंचाई पानी उपलब्ध करवाने के लिए कितनी तत्परता दिखाता है। किसानों को कागजी रेगुलेशन नहीं, खेतों तक पानी चाहिए। अब विभाग के सामने दोहरी चुनौती है—सिद्धमुख फीडर को तत्काल दुरुस्त करना और नोहर-सिद्धमुख सिंचाई परियोजना क्षेत्र के किसानों के लिए निर्धारित पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना।
Nohar, Hanumangarh | Oct 30, 2026