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पूर्व मंत्री ललिता यादव से नहीं मिले 90 आक्सीजन कंसंट्रेटेर, जिला अस्पताल की स्थिति खराब : सिविल सर्जन

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छतरपुर जिला अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि सोनी की बड़ी कामयाबी, लगभग 500 बच्चों के पैरों का सफल ऑपरेशन कर चुके 

छतरपुर। जिला अस्पताल में पदस्थ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि सोनी ने पांच बच्चों के सफल ऑपरेशन कर चिकित्सा क्षेत्र में सराहनीय कार्य किया है। समय पर उपचार और चिकित्सकीय कुशलता के चलते बच्चों के पैरों का सफल ऑपरेशन किया गया।

डॉ. सोनी की कुशलता और समय पर लिए गए चिकित्सकीय निर्णय की परिजनों ने सराहना की। जिला अस्पताल में बेहतर उपचार मिलने से बच्चों के परिवारों ने राहत की सांस ली।

लगातार मरीजों की सेवा और कठिन मामलों में उपचार के प्रयासों को लेकर डॉ. रवि सोनी की कार्यशैली की सराहना की जा रही है। पांच बच्चों के सफल ऑपरेशन को जिला अस्पताल की एक महत्वपूर्ण चिकित्सकीय उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

छतरपुर जिला अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि सोनी की बड़ी कामयाबी, लगभग 500 बच्चों के पैरों का सफल ऑपरेशन कर चुके छतरपुर। जिला अस्पताल में पदस्थ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि सोनी ने पांच बच्चों के सफल ऑपरेशन कर चिकित्सा क्षेत्र में सराहनीय कार्य किया है। समय पर उपचार और चिकित्सकीय कुशलता के चलते बच्चों के पैरों का सफल ऑपरेशन किया गया। डॉ. सोनी की कुशलता और समय पर लिए गए चिकित्सकीय निर्णय की परिजनों ने सराहना की। जिला अस्पताल में बेहतर उपचार मिलने से बच्चों के परिवारों ने राहत की सांस ली। लगातार मरीजों की सेवा और कठिन मामलों में उपचार के प्रयासों को लेकर डॉ. रवि सोनी की कार्यशैली की सराहना की जा रही है। पांच बच्चों के सफल ऑपरेशन को जिला अस्पताल की एक महत्वपूर्ण चिकित्सकीय उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

Chhatarpur Nagar, Chhatarpur | Aug 8, 2026

टॉक शो with राजेंद्र में देखें, राष्ट्रीय कीर्तनकार दूरदर्शन -आकाशवाणी कलाकार मातादीन विश्वकर्मा (दादा)  का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

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Chhatarpur Nagar, Chhatarpur | Aug 8, 2026

कागज पूरे, फिर भी ‘टोल’ जरूरी! MP से गुजरना है तो 112, वन विभाग बैरियर, ट्रैफिक पुलिस और रास्ते के ‘रखवालों’ का हिसाब भी रखिए

छतरपुर/महोबा।
उत्तर प्रदेश के महोबा से बकरी और भैंसों का व्यापार करने वाले व्यापारी इन दिनों एक अजीब गणित से परेशान हैं। उनका दावा है कि पशुओं को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाने के लिए उनके पास सभी वैध दस्तावेज, परमिट और आवश्यक कागजात होते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश की सीमा में प्रवेश करते ही उनका सामना ऐसे "अनौपचारिक खर्चों" से होने लगता है, जिनका कहीं कोई सरकारी रसीद रिकॉर्ड नहीं मिलता।

व्यापारियों के अनुसार महोबा से महाराष्ट्र और हैदराबाद तक जाने वाले उनके ट्रकों को मध्य प्रदेश में कई स्थानों पर रोका जाता है। कहीं 200 रुपये, कहीं 500 रुपये तो कहीं 1000 रुपये तक की मांग की जाती है। उनका आरोप है कि एक चक्कर में केवल इस तरह की वसूली पर 8 से 10 हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं।

व्यापारियों का कहना है कि छतरपुर जिले में महोबा ब्रिज, ट्रैफिक पुलिस थाना के सामने ,सागर रोड स्थित खेल ग्राम क्षेत्र, मातंगुवा और वन मंडल बैरियर के आसपास ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर पैसे लेते हुए लोग दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

कागज पूरे हैं तो फिर रकम किस बात की?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पशु परिवहन के सभी दस्तावेज वैध हैं, तो फिर हर कुछ किलोमीटर पर जेब हल्की क्यों कराई जा रही है? क्या नियमों की जांच के नाम पर यह नया "चलन" बन गया है, या फिर व्यवस्था के भीतर कोई ऐसी समानांतर व्यवस्था चल रही है जिसका हिसाब सरकारी फाइलों में नहीं मिलता?

मध्य प्रदेश में ही क्यों?

व्यापारियों का दावा है कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में उन्हें इस प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। उनका आरोप है कि केवल मध्य प्रदेश में ही बार-बार रोककर रकम मांगी जाती है। यदि यह दावा सही है तो सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?

वीडियो सामने आए, कार्रवाई अब भी गायब

व्यापारियों के अनुसार कथित वसूली के कई वीडियो भी मौजूद हैं। इसके बावजूद यदि जांच और कार्रवाई नहीं होती तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। आखिर शिकायतों और वीडियो के बावजूद जिम्मेदार लोगों तक कार्रवाई क्यों नहीं पहुंच रही?

सवाल जो जवाब मांगते हैं

यदि दस्तावेज पूरे हैं तो वसूली किस आधार पर हो रही है?

कथित वसूली के वीडियो सामने आने के बाद जांच क्यों नहीं हुई?

क्या कुछ कर्मचारी नियमों की आड़ में अवैध वसूली कर रहे हैं?

यदि आरोप गलत हैं तो प्रशासन खुलकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता?

और यदि आरोप सही हैं तो फिर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी?

(नोट: यह खबर व्यापारियों द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके बयानों पर आधारित है। संबंधित विभागों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

कागज पूरे, फिर भी ‘टोल’ जरूरी! MP से गुजरना है तो 112, वन विभाग बैरियर, ट्रैफिक पुलिस और रास्ते के ‘रखवालों’ का हिसाब भी रखिए छतरपुर/महोबा। उत्तर प्रदेश के महोबा से बकरी और भैंसों का व्यापार करने वाले व्यापारी इन दिनों एक अजीब गणित से परेशान हैं। उनका दावा है कि पशुओं को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाने के लिए उनके पास सभी वैध दस्तावेज, परमिट और आवश्यक कागजात होते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश की सीमा में प्रवेश करते ही उनका सामना ऐसे "अनौपचारिक खर्चों" से होने लगता है, जिनका कहीं कोई सरकारी रसीद रिकॉर्ड नहीं मिलता। व्यापारियों के अनुसार महोबा से महाराष्ट्र और हैदराबाद तक जाने वाले उनके ट्रकों को मध्य प्रदेश में कई स्थानों पर रोका जाता है। कहीं 200 रुपये, कहीं 500 रुपये तो कहीं 1000 रुपये तक की मांग की जाती है। उनका आरोप है कि एक चक्कर में केवल इस तरह की वसूली पर 8 से 10 हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं। व्यापारियों का कहना है कि छतरपुर जिले में महोबा ब्रिज, ट्रैफिक पुलिस थाना के सामने ,सागर रोड स्थित खेल ग्राम क्षेत्र, मातंगुवा और वन मंडल बैरियर के आसपास ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर पैसे लेते हुए लोग दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। कागज पूरे हैं तो फिर रकम किस बात की? सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पशु परिवहन के सभी दस्तावेज वैध हैं, तो फिर हर कुछ किलोमीटर पर जेब हल्की क्यों कराई जा रही है? क्या नियमों की जांच के नाम पर यह नया "चलन" बन गया है, या फिर व्यवस्था के भीतर कोई ऐसी समानांतर व्यवस्था चल रही है जिसका हिसाब सरकारी फाइलों में नहीं मिलता? मध्य प्रदेश में ही क्यों? व्यापारियों का दावा है कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में उन्हें इस प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। उनका आरोप है कि केवल मध्य प्रदेश में ही बार-बार रोककर रकम मांगी जाती है। यदि यह दावा सही है तो सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? वीडियो सामने आए, कार्रवाई अब भी गायब व्यापारियों के अनुसार कथित वसूली के कई वीडियो भी मौजूद हैं। इसके बावजूद यदि जांच और कार्रवाई नहीं होती तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। आखिर शिकायतों और वीडियो के बावजूद जिम्मेदार लोगों तक कार्रवाई क्यों नहीं पहुंच रही? सवाल जो जवाब मांगते हैं यदि दस्तावेज पूरे हैं तो वसूली किस आधार पर हो रही है? कथित वसूली के वीडियो सामने आने के बाद जांच क्यों नहीं हुई? क्या कुछ कर्मचारी नियमों की आड़ में अवैध वसूली कर रहे हैं? यदि आरोप गलत हैं तो प्रशासन खुलकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता? और यदि आरोप सही हैं तो फिर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी? (नोट: यह खबर व्यापारियों द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके बयानों पर आधारित है। संबंधित विभागों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

Chhatarpur Nagar, Chhatarpur | Aug 8, 2026

पूर्व मंत्री ललिता यादव से नहीं मिले 90 आक्सीजन कंसंट्रेटेर, जिला अस्पताल की स्थिति खराब : सिविल सर्जन - Chhatarpur Nagar News