हरदी कला के डीह पुरवा में सातवीं पीढ़ी भी रास्ते की आस में, बीमार को चारपाई पर ले जाने को मजबूर ग्रामीण
चित्रकूट। मऊ तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत हरदी कला के डीह पुरवा में ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुरवा में आवागमन के लिए आज तक पक्का रास्ता नहीं बन पाया है। सातवीं पीढ़ी गुजर रही है, लेकिन रास्ते की समस्या जस की तस बनी हुई है।
डीह पुरवा में आदिवासी समाज के लोग निवास करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में रास्ते की स्थिति और भी खराब हो जाती है। कीचड़ और खराब मार्ग के कारण लोगों का पैदल निकलना तक मुश्किल हो जाता है।
बीमार पड़ने पर बढ़ जाती है परेशानी
ग्रामीणों के मुताबिक, सबसे गंभीर समस्या उस समय सामने आती है जब गांव में कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाता है। खराब रास्ते के कारण एंबुलेंस या अन्य वाहन गांव तक पहुंचना मुश्किल होता है। ऐसे में परिजन मरीज को चारपाई पर लिटाकर या पीठ पर लादकर मुख्य मार्ग तक ले जाने को मजबूर होते हैं, इसके बाद ही इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया जा पाता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि रास्ते की समस्या को लेकर ग्राम प्रधान, विधायक, लेखपाल समेत संबंधित अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि डीह पुरवा तक आवागमन योग्य सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि बीमारी और आपात स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके और बच्चों, बुजुर्गों व ग्रामीणों को रोजाना होने वाली परेशानी से राहत मिल सके।निवासी सुरेश कोल, बद्री कोल, रामकुमार, कोल रामबाबू, कोल योगेंद्र कुमार, कोल कैलाश कुमार, कोल जितेंद्र कुमार, मनोज कुमार, रामभवन कोल, रमेश, प्रदीप कोल कुमार धर्मेंद्र कोल यदि कोल आदिवासी समाज के लोगों ने
ग्रामीणों का सवाल है—आखिर सात पीढ़ियां गुजरने के बाद भी डीह पुरवा तक रास्ता कब पहुंचेगा?