पहाड़ की पीड़ा को सुरों में ढालने वाले दिगम्बर सिंह बिष्ट को मिला उफतारा सम्मान-2026
उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोक गायक दिगम्बर सिंह बिष्ट ने अपनी गायकी के जरिए पहाड़ की संस्कृति, लोक परंपराओं और आम पहाड़ी जीवन की कहानियों को आवाज दी है। उनकी गायकी में पहाड़ की मिट्टी की खुशबू के साथ-साथ यहां के लोगों का सुख-दुख और संघर्ष भी सुनाई देता है।
चमोली जनपद से जुड़े दिगम्बर सिंह बिष्ट लंबे समय से लोकगीत, जागर और पारंपरिक लोक प्रस्तुतियों के माध्यम से उत्तराखंड की लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। पांडव लीला और पांडव नृत्य जैसे पारंपरिक आयोजनों में भी उनकी लोकगायकी और पनवाणी प्रस्तुतियों का उल्लेख मिलता है।
उनकी आवाज में पहाड़ के गांव, यहां की परंपराएं और बदलते पहाड़ की तस्वीर दिखाई देती है। मौर्याण में बाघ का आतंक जैसे गीतों के जरिए उन्होंने पहाड़ की जमीनी समस्याओं को भी गीतों का हिस्सा बनाया है। वहीं पलायन और खाली होते गांवों का दर्द भी उनकी गायकी में महसूस किया जा सकता है।
उफतारा सम्मान-2026 से सम्मानित
लोक संगीत और उत्तराखंड की संस्कृति के लिए उनके योगदान को देखते हुए दिगम्बर सिंह बिष्ट को उफतारा फिल्म, टेलीविजन एंड रेडियो एसोसिएशन की ओर से उफतारा सम्मान-2026 से सम्मानित किया गया। उनके सम्मान की जानकारी उफतारा से जुड़े सोशल मीडिया पोस्टों में भी सामने आई है।
यह सम्मान सिर्फ दिगम्बर सिंह बिष्ट का सम्मान नहीं, बल्कि उस पहाड़ी लोक संस्कृति का सम्मान है, जिसे कलाकार अपनी आवाज के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं।
आज जब पहाड़ के गांव पलायन की मार झेल रहे हैं और लोक परंपराएं धीरे-धीरे बदल रही हैं, ऐसे समय में दिगम्बर सिंह बिष्ट जैसे कलाकार अपने गीतों के माध्यम से पहाड़ की पहचान और उसकी आवाज को जिंदा रखने का काम कर रहे हैं।
दिगम्बर सिंह बिष्ट की गायकी में पहाड़ बोलता है…
पहाड़ का दर्द सुनाई देता है…
और पहाड़ की संस्कृति की गूंज महसूस होती है।
रैबार पहाड़ का
पहाड़ की आवाज, पहाड़ के साथ
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