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#दलमोटा वामन गांव पहुंचीं कांग्रेस नेत्री अरुणा कुमार, ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं #कांग्रेस नेत्री एवं मुख्यमंत्री की पूर्व ओएसडी अरुणा कुमार ने 37 विधानसभा क्षेत्र पौड़ी के दलमोटा वामन गांव का भ्रमण कर क्षेत्र के बीएलए श्री चंदन सिंह जी से मुलाकात की। इस दौरान ग्रामीणों ने गांव की बदहाल सड़क की समस्या उठाते हुए शीघ्र निर्माण की मांग की। अरुणा कुमार ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराते हुए सड़क निर्माण एवं समस्या के त्वरित समाधान की अपील की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास और जनसुविधाओं के लिए कांग्रेस निरंतर संघर्ष करती रहेगी। इस अवसर पर ग्रामीणों से संवाद करते हुए उन्होंने कांग्रेस पार्टी को समर्थन देने की अपील की और क्षेत्र के विकास के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। #ArunaKumar #Pauri #Congress #DalmotaVaman #RoadIssue #PauriVidhansabha #UttarakhandCongress #JanSampark #VillageVisit #PauriGarhwal

Pauri, Garhwal | Jul 15, 2026

MORE NEWS

📍 कपोलस्यूपट्टी के सिलेथ गांव पहुंचीं कांग्रेस नेत्री अरुणा कुमार, ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं
कांग्रेस नेत्री अरुणा कुमार ने कपोलस्यूपट्टी के सिलेथ गांव का भ्रमण कर ग्रामीणों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। इस दौरान ग्राम प्रधान प्रमोद कुमार, सरपंच रूपेंद्र सिंह सहित मुन्नी देवी, पम्मी देवी, शांति देवी, लक्ष्मी देवी, लीला देवी, रजनी देवी, बीना देवी और प्रदीप कुमार ने गांव की विभिन्न समस्याओं से अवगत कराया।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के संपर्क मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं, जिससे आवागमन में भारी परेशानी हो रही है। साथ ही क्षेत्र में जंगली जानवरों का आतंक बढ़ने से लोगों की फसलें और पशुधन खतरे में हैं। ग्रामीणों ने सुरक्षा के लिए तारबाड़ (फेंसिंग) की मांग उठाई।
अरुणा कुमार ने मौके पर ही दूरभाष के माध्यम से संबंधित अधिकारियों से वार्ता कर समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान होना आवश्यक है।
इस अवसर पर उन्होंने ग्रामीणों से कांग्रेस पार्टी को समर्थन देने की अपील करते हुए कहा कि जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने के लिए कांग्रेस निरंतर जनता के साथ खड़ी है।
#ArunaKumar #Congress #SilathVillage #KapolsyuPatti #PauriGarhwal #Uttarakhand #जनसमस्या #ग्रामीणविकास #CongressForPeople #SocialMediaPost

📍 कपोलस्यूपट्टी के सिलेथ गांव पहुंचीं कांग्रेस नेत्री अरुणा कुमार, ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं कांग्रेस नेत्री अरुणा कुमार ने कपोलस्यूपट्टी के सिलेथ गांव का भ्रमण कर ग्रामीणों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। इस दौरान ग्राम प्रधान प्रमोद कुमार, सरपंच रूपेंद्र सिंह सहित मुन्नी देवी, पम्मी देवी, शांति देवी, लक्ष्मी देवी, लीला देवी, रजनी देवी, बीना देवी और प्रदीप कुमार ने गांव की विभिन्न समस्याओं से अवगत कराया। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के संपर्क मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं, जिससे आवागमन में भारी परेशानी हो रही है। साथ ही क्षेत्र में जंगली जानवरों का आतंक बढ़ने से लोगों की फसलें और पशुधन खतरे में हैं। ग्रामीणों ने सुरक्षा के लिए तारबाड़ (फेंसिंग) की मांग उठाई। अरुणा कुमार ने मौके पर ही दूरभाष के माध्यम से संबंधित अधिकारियों से वार्ता कर समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान होना आवश्यक है। इस अवसर पर उन्होंने ग्रामीणों से कांग्रेस पार्टी को समर्थन देने की अपील करते हुए कहा कि जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने के लिए कांग्रेस निरंतर जनता के साथ खड़ी है। #ArunaKumar #Congress #SilathVillage #KapolsyuPatti #PauriGarhwal #Uttarakhand #जनसमस्या #ग्रामीणविकास #CongressForPeople #SocialMediaPost

Pauri, Garhwal | Jul 15, 2026

BKTC अध्यक्ष का आया बयान, खुद सुने ये क्या बोल गये द्विवेदी 
बद्रीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि प्रमोद नौटियाल उनके निजी सचिव नहीं, बल्कि अध्यक्ष कार्यालय के सचिव हैं।
वहीं, राम मंदिर को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, "यह राम मंदिर की फ्रेंचाइज़ी नहीं, बल्कि बद्रीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति है।"

BKTC अध्यक्ष का आया बयान, खुद सुने ये क्या बोल गये द्विवेदी बद्रीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि प्रमोद नौटियाल उनके निजी सचिव नहीं, बल्कि अध्यक्ष कार्यालय के सचिव हैं। वहीं, राम मंदिर को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, "यह राम मंदिर की फ्रेंचाइज़ी नहीं, बल्कि बद्रीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति है।"

Pauri, Garhwal | Jul 15, 2026

सीज अस्पताल में चोरी, शिकायत पर भी खामोश प्रशासन! आखिर किसे बचाया जा रहा है?
देहरादून: जिला प्रशासन के आदेश पर 22 मई 2026 से सीज पड़े पेनेसिया अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा 23 जून 2026 को जिलाधिकारी को लिखित शिकायत देकर साफ तौर पर आशंका जताई गई थी कि अस्पताल परिसर में अनधिकृत प्रवेश हो रहा है, चोरी की संभावना है और रात में तोड़फोड़ जैसी गतिविधियां देखी-सुनी गई हैं।
शिकायत में बताया गया था कि अस्पताल के गद्दे बाहर खाली प्लॉट में फेंके मिले, जिससे यह आशंका जताई गई कि कुछ लोग पीछे की ओर से दीवार फांदकर परिसर में घुस रहे हैं। स्थानीय लोगों ने भी रात करीब 2:30 बजे अस्पताल परिसर की ओर से संदिग्ध आवाजें और तोड़फोड़ की जानकारी दी थी। इसके बावजूद यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाती और कार्रवाई होती, तो क्या यह घटना रोकी नहीं जा सकती थी?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दी जा चुकी थी, तब आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यदि शिकायत पर गंभीरता दिखाई जाती, जांच होती और सुरक्षा बढ़ाई जाती, तो क्या सरकारी कब्जे में मौजूद अस्पताल में चोरी की घटना होती?
अब शासन और प्रशासन से जनता पूछ रही है—
लिखित शिकायत मिलने के बाद क्या कार्रवाई की गई?
क्या शिकायत सिर्फ फाइलों में दबाकर छोड़ दी गई?
सीज परिसर की सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी?
चोरी की जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
यह मामला केवल चोरी का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी है। जिस संपत्ति की सुरक्षा का दावा प्रशासन कर रहा था, उसी परिसर में चोरी होना व्यवस्था की गंभीर विफलता की ओर इशारा करता है। अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन जवाब देता है या फिर सवालों से बचने की कोशिश करता है।

सीज अस्पताल में चोरी, शिकायत पर भी खामोश प्रशासन! आखिर किसे बचाया जा रहा है? देहरादून: जिला प्रशासन के आदेश पर 22 मई 2026 से सीज पड़े पेनेसिया अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा 23 जून 2026 को जिलाधिकारी को लिखित शिकायत देकर साफ तौर पर आशंका जताई गई थी कि अस्पताल परिसर में अनधिकृत प्रवेश हो रहा है, चोरी की संभावना है और रात में तोड़फोड़ जैसी गतिविधियां देखी-सुनी गई हैं। शिकायत में बताया गया था कि अस्पताल के गद्दे बाहर खाली प्लॉट में फेंके मिले, जिससे यह आशंका जताई गई कि कुछ लोग पीछे की ओर से दीवार फांदकर परिसर में घुस रहे हैं। स्थानीय लोगों ने भी रात करीब 2:30 बजे अस्पताल परिसर की ओर से संदिग्ध आवाजें और तोड़फोड़ की जानकारी दी थी। इसके बावजूद यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाती और कार्रवाई होती, तो क्या यह घटना रोकी नहीं जा सकती थी? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दी जा चुकी थी, तब आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यदि शिकायत पर गंभीरता दिखाई जाती, जांच होती और सुरक्षा बढ़ाई जाती, तो क्या सरकारी कब्जे में मौजूद अस्पताल में चोरी की घटना होती? अब शासन और प्रशासन से जनता पूछ रही है— लिखित शिकायत मिलने के बाद क्या कार्रवाई की गई? क्या शिकायत सिर्फ फाइलों में दबाकर छोड़ दी गई? सीज परिसर की सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी? चोरी की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा? यह मामला केवल चोरी का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी है। जिस संपत्ति की सुरक्षा का दावा प्रशासन कर रहा था, उसी परिसर में चोरी होना व्यवस्था की गंभीर विफलता की ओर इशारा करता है। अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन जवाब देता है या फिर सवालों से बचने की कोशिश करता है।

Pauri, Garhwal | Jul 15, 2026