कैमरे की आँख और वो खामोशी...
जब धुआँ छँटा, तो पीछे सिर्फ खामोशी और बेबसी रह गई। सोमवार का वह दिन जब 15 हँसते-खेलते घर अंधेरे में डूब गए। तस्वीरों में जो आप देख रहे हैं, वह सिर्फ एक इमारत की आग नहीं, बल्कि उन परिवारों के सपनों का राख होना है जिन्होंने अपनों को खो दिया। एक फोटो जर्नलिस्ट के नाते, कैमरे के लेंस से उस दर्द को देखना सबसे मुश्किल होता है जिसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन है।
Post Credit - Sumit Kumar
#photojournalism #documentaryphotography #onthefield #journalistlife #visualstorytelling
Agra, Agra | Jun 24, 2026