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MP सरकारी कर्मचारियों का प्रमोशन फिर अटका, नई भर्तियों पर भी पड़ेगा बड़ा असर!

Balaghat, Balaghat | Jun 15, 2026

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#बालाघाट
लालबर्रा के नेवरगांव में 12 एकड़ में डीएसआर पद्धति से धान की बुवाई, किसानों को वितरित किए गए उन्नत बीज

कृषि विभाग ने किया योजनाओं का पंजीयन, आधुनिक खेती अपनाने के लिए किसानों को किया प्रेरित

खरीफ सीजन में आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा जिले में लगातार जागरूकता एवं प्रोत्साहन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में 15 जून को लालबर्रा विकासखंड के ग्राम नेवरगांव (वा) में किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों से अवगत कराते हुए डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) पद्धति से धान की बुवाई का प्रदर्शन किया गया।

ग्राम नेवरगांव में कृषक श्री अरुण रहांगडाले एवं श्री राजेश रहांगडाले के खेत में सुपर सीडर मशीन के माध्यम से 12 एकड़ क्षेत्र में डीएसआर पद्धति से धान की बोनी की गई। कृषि विभाग के अधिकारियों ने मौके पर उपस्थित किसानों को डीएसआर तकनीक के लाभों की जानकारी देते हुए बताया कि यह पद्धति पारंपरिक रोपा विधि की अपेक्षा कम लागत, कम श्रम और कम पानी में बेहतर उत्पादन देने में सहायक है।

अधिकारियों ने बताया कि डीएसआर तकनीक अपनाने से नर्सरी तैयार करने, पौध उखाड़ने तथा रोपाई की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, जिससे किसानों का समय और खर्च दोनों बचते हैं। साथ ही खेत की तैयारी से लेकर फसल प्रबंधन तक की प्रक्रिया अधिक वैज्ञानिक एवं सुविधाजनक बनती है।

कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग द्वारा किसानों को उन्नत फसलों के बीज भी वितरित किए गए। कृषक श्री हेमराज पारधी को मक्का एवं अरहर का बीज तथा डॉ. रुपेंद्र रहांगडाले को अरहर का बीज प्रदान किया गया। विभागीय अधिकारियों ने किसानों को खरीफ मौसम में फसल विविधीकरण अपनाने और दलहनी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने की सलाह दी। इस अवसर पर किसानों का विभिन्न शासकीय योजनाओं के अंतर्गत योजनावार पंजीयन भी किया गया, ताकि उन्हें कृषि विभाग द्वारा संचालित अनुदान, बीज वितरण, कृषि यंत्रीकरण, प्राकृतिक खेती एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।

उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय ने बताया कि जिले में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, उत्पादन लागत कम करने तथा आय बढ़ाने के उद्देश्य से डीएसआर पद्धति, कृषि यंत्रीकरण और उन्नत बीजों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने किसानों से विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ लेने तथा वैज्ञानिक खेती अपनाने की अपील की।

कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने डीएसआर पद्धति और उन्नत बीजों के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा आधुनिक तकनीकों को अपनाने में रुचि दिखाई। कृषि विभाग का मानना है कि इस प्रकार के प्रदर्शन एवं जागरूकता कार्यक्रम किसानों को नई तकनीकों के प्रति प्रेरित करने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

#CMMadhyaPradesh  #JansamparkMP  #minmpkrishi

#बालाघाट लालबर्रा के नेवरगांव में 12 एकड़ में डीएसआर पद्धति से धान की बुवाई, किसानों को वितरित किए गए उन्नत बीज कृषि विभाग ने किया योजनाओं का पंजीयन, आधुनिक खेती अपनाने के लिए किसानों को किया प्रेरित खरीफ सीजन में आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा जिले में लगातार जागरूकता एवं प्रोत्साहन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में 15 जून को लालबर्रा विकासखंड के ग्राम नेवरगांव (वा) में किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों से अवगत कराते हुए डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) पद्धति से धान की बुवाई का प्रदर्शन किया गया। ग्राम नेवरगांव में कृषक श्री अरुण रहांगडाले एवं श्री राजेश रहांगडाले के खेत में सुपर सीडर मशीन के माध्यम से 12 एकड़ क्षेत्र में डीएसआर पद्धति से धान की बोनी की गई। कृषि विभाग के अधिकारियों ने मौके पर उपस्थित किसानों को डीएसआर तकनीक के लाभों की जानकारी देते हुए बताया कि यह पद्धति पारंपरिक रोपा विधि की अपेक्षा कम लागत, कम श्रम और कम पानी में बेहतर उत्पादन देने में सहायक है। अधिकारियों ने बताया कि डीएसआर तकनीक अपनाने से नर्सरी तैयार करने, पौध उखाड़ने तथा रोपाई की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, जिससे किसानों का समय और खर्च दोनों बचते हैं। साथ ही खेत की तैयारी से लेकर फसल प्रबंधन तक की प्रक्रिया अधिक वैज्ञानिक एवं सुविधाजनक बनती है। कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग द्वारा किसानों को उन्नत फसलों के बीज भी वितरित किए गए। कृषक श्री हेमराज पारधी को मक्का एवं अरहर का बीज तथा डॉ. रुपेंद्र रहांगडाले को अरहर का बीज प्रदान किया गया। विभागीय अधिकारियों ने किसानों को खरीफ मौसम में फसल विविधीकरण अपनाने और दलहनी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने की सलाह दी। इस अवसर पर किसानों का विभिन्न शासकीय योजनाओं के अंतर्गत योजनावार पंजीयन भी किया गया, ताकि उन्हें कृषि विभाग द्वारा संचालित अनुदान, बीज वितरण, कृषि यंत्रीकरण, प्राकृतिक खेती एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके। उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय ने बताया कि जिले में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, उत्पादन लागत कम करने तथा आय बढ़ाने के उद्देश्य से डीएसआर पद्धति, कृषि यंत्रीकरण और उन्नत बीजों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने किसानों से विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ लेने तथा वैज्ञानिक खेती अपनाने की अपील की। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने डीएसआर पद्धति और उन्नत बीजों के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा आधुनिक तकनीकों को अपनाने में रुचि दिखाई। कृषि विभाग का मानना है कि इस प्रकार के प्रदर्शन एवं जागरूकता कार्यक्रम किसानों को नई तकनीकों के प्रति प्रेरित करने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। #CMMadhyaPradesh #JansamparkMP #minmpkrishi

Balaghat, Madhya Pradesh | Jun 15, 2026

#बालाघाट
दीदियों को मिली जीने की नई राह: नेवरवाही में दाल प्रसंस्करण केंद्र का शुभारंभ
ग्राम पंचायत नेवरवाही में आजीविका सेवा केंद्र के अंतर्गत दाल प्रसंस्करण केंद्र का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक ग्राम संगठनों के पदाधिकारी, स्व-सहायता समूह की महिलाएं एवं ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बालाघाट अभिषेक सराफ के निर्देशन एवं जिला परियोजना प्रबंधक श्वेता मेहतो के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।          

आजीविका मिशन जनपद पंचायत लांजी से राजाराम परते ने बताया कि एकीकृत कृषि क्लस्टर के अंतर्गत आजीविका स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने जैविक कीटनाशकों का निर्माण एवं विक्रय, धान बीज बिक्री, वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन तथा गुड़ खरीदी-बिक्री जैसी गतिविधियों के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। अब दाल प्रसंस्करण केंद्र के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार और आय वृद्धि का नया अवसर प्राप्त होगा।

कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक राजकुमार कराहे ने मिनी दाल मिल, मसाला चक्की एवं आटा चक्की का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की मंशा के अनुरूप स्व-सहायता समूहों की महिलाएं न केवल ‘लखपति दीदी’ बन रही हैं, बल्कि उनकी प्रगति और आत्मविश्वास को देखकर लगता है कि वे भविष्य में और भी बड़ी आर्थिक उपलब्धियां हासिल करेंगी। उन्होंने महिलाओं से प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को नियमित रूप से सुनने और देखने की अपील भी की।

ग्राम पंचायत नेवरवाही के सरपंच झामेद्र टिकेश्वर ने कहा कि आजीविका मिशन ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। पहले महिलाएं केवल घर और खेत तक सीमित थीं, लेकिन अब वे स्वयं बैंकिंग कार्यों से लेकर व्यवसायिक गतिविधियों तक में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। उन्होंने बताया कि नई इकाई के माध्यम से समूह द्वारा कृषि उपज की खरीदी कर उसका प्रसंस्करण कर बाजार में बिक्री की जाएगी। समूह सदस्य हसीना वाहने ने बताया कि वे दाल, चना और गुड़ की खरीदी-बिक्री के साथ-साथ जैविक दवाइयों, केंचुआ खाद एवं एजोला का उत्पादन भी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि इस नई गतिविधि से लगभग 12 महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है।

कार्यक्रम में आलोक चौरसिया, देवेश एडे, संदीप अग्रवाल, गौरव बैस, सूरज गुप्ता, ग्राम पंचायत सचिव ऋषि मस्करे, ग्राम नोडल सुनीता चन्ने, विषय नोडल अतीत फूलमारी, सीएलएफ की पूर्व अध्यक्ष ममता दांदरे, वर्तमान अध्यक्ष कविता कोसरे, सचिव अख्तरी शेख, मैनेजर रविता साबले, लेखापाल कविता कचलाहे, कंप्यूटर ऑपरेटर निशा उइके, सहयोगी मनीषा बागड़े, बैंक सखी रूपलता कचलाहे, मीना चचाने, राजवंती देवाहे सहित विभिन्न ग्राम संगठनों के पदाधिकारी, समूह सदस्य एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे। इस अवसर पर महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, स्वरोजगार संवर्धन तथा ग्रामीण आजीविका को नई दिशा देने के संकल्प के साथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

#CMMadhyaPradesh #JansamparkMP #mp_wcdmp

#बालाघाट दीदियों को मिली जीने की नई राह: नेवरवाही में दाल प्रसंस्करण केंद्र का शुभारंभ ग्राम पंचायत नेवरवाही में आजीविका सेवा केंद्र के अंतर्गत दाल प्रसंस्करण केंद्र का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक ग्राम संगठनों के पदाधिकारी, स्व-सहायता समूह की महिलाएं एवं ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बालाघाट अभिषेक सराफ के निर्देशन एवं जिला परियोजना प्रबंधक श्वेता मेहतो के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। आजीविका मिशन जनपद पंचायत लांजी से राजाराम परते ने बताया कि एकीकृत कृषि क्लस्टर के अंतर्गत आजीविका स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने जैविक कीटनाशकों का निर्माण एवं विक्रय, धान बीज बिक्री, वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन तथा गुड़ खरीदी-बिक्री जैसी गतिविधियों के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। अब दाल प्रसंस्करण केंद्र के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार और आय वृद्धि का नया अवसर प्राप्त होगा। कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक राजकुमार कराहे ने मिनी दाल मिल, मसाला चक्की एवं आटा चक्की का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की मंशा के अनुरूप स्व-सहायता समूहों की महिलाएं न केवल ‘लखपति दीदी’ बन रही हैं, बल्कि उनकी प्रगति और आत्मविश्वास को देखकर लगता है कि वे भविष्य में और भी बड़ी आर्थिक उपलब्धियां हासिल करेंगी। उन्होंने महिलाओं से प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को नियमित रूप से सुनने और देखने की अपील भी की। ग्राम पंचायत नेवरवाही के सरपंच झामेद्र टिकेश्वर ने कहा कि आजीविका मिशन ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। पहले महिलाएं केवल घर और खेत तक सीमित थीं, लेकिन अब वे स्वयं बैंकिंग कार्यों से लेकर व्यवसायिक गतिविधियों तक में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। उन्होंने बताया कि नई इकाई के माध्यम से समूह द्वारा कृषि उपज की खरीदी कर उसका प्रसंस्करण कर बाजार में बिक्री की जाएगी। समूह सदस्य हसीना वाहने ने बताया कि वे दाल, चना और गुड़ की खरीदी-बिक्री के साथ-साथ जैविक दवाइयों, केंचुआ खाद एवं एजोला का उत्पादन भी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि इस नई गतिविधि से लगभग 12 महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है। कार्यक्रम में आलोक चौरसिया, देवेश एडे, संदीप अग्रवाल, गौरव बैस, सूरज गुप्ता, ग्राम पंचायत सचिव ऋषि मस्करे, ग्राम नोडल सुनीता चन्ने, विषय नोडल अतीत फूलमारी, सीएलएफ की पूर्व अध्यक्ष ममता दांदरे, वर्तमान अध्यक्ष कविता कोसरे, सचिव अख्तरी शेख, मैनेजर रविता साबले, लेखापाल कविता कचलाहे, कंप्यूटर ऑपरेटर निशा उइके, सहयोगी मनीषा बागड़े, बैंक सखी रूपलता कचलाहे, मीना चचाने, राजवंती देवाहे सहित विभिन्न ग्राम संगठनों के पदाधिकारी, समूह सदस्य एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे। इस अवसर पर महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, स्वरोजगार संवर्धन तथा ग्रामीण आजीविका को नई दिशा देने के संकल्प के साथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। #CMMadhyaPradesh #JansamparkMP #mp_wcdmp

Balaghat, Madhya Pradesh | Jun 15, 2026

#बालाघाट जिले में डीएसआर पद्धति को मिल रहा बढ़ावा, किसानों ने सुपर सीडर से की धान की सीधी बुवाई

लालबर्रा और खैरलांजी विकासखंड के किसानों ने अपनाई आधुनिक तकनीक, कम लागत और अधिक उत्पादन की उम्मीद

बालाघाट जिले में कृषि विभाग द्वारा धान उत्पादन में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के प्रयास लगातार रंग ला रहे हैं। किसानों के बीच डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) पद्धति तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसी क्रम में मंगलवार को लालबर्रा एवं खैरलांजी विकासखंड के विभिन्न गांवों में किसानों ने सुपर सीडर मशीन की सहायता से धान की सीधी बुवाई कर आधुनिक खेती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया।

उपसंचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय ने बताया कि लालबर्रा विकासखंड के ग्राम नेवरगांव (व) में कृषक श्री अरुण रहांगडाले एवं श्री राजेश रहांगडाले के खेतों में सुपर सीडर मशीन के माध्यम से लगभग 12 एकड़ क्षेत्र में डीएसआर पद्धति से धान की बुवाई की गई। कृषि विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया तथा डीएसआर पद्धति के लाभों की जानकारी दी। इसी प्रकार खैरलांजी विकासखंड के ग्राम कुम्हली में कृषक श्री निकेश पांडे के खेत में डीएसआर तकनीक से धान की सीधी बोनी की गई। वहीं ग्राम सावरगांव में कृषक श्री पदमलाल लिल्हारे एवं श्री वीरू भंडारकर के लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में सुपर सीडर मशीन से धान की बुवाई कराई गई।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार डीएसआर पद्धति पारंपरिक रोपा विधि की तुलना में अधिक किफायती एवं श्रम बचाने वाली तकनीक है। इस पद्धति में खेत में सीधे बीज की बुवाई की जाती है, जिससे नर्सरी तैयार करने, पौध उखाड़ने और रोपाई करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे मजदूरी लागत में कमी आती है तथा समय और पानी दोनों की बचत होती है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को सुपर सीडर जैसी आधुनिक मशीनों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभाग का मानना है कि डीएसआर तकनीक के व्यापक उपयोग से जिले में धान उत्पादन की लागत कम होगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। साथ ही जल संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि को भी बढ़ावा मिलेगा।

कृषि अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाएं तथा विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और यंत्रीकरण कार्यक्रमों का लाभ उठाएं। जिले में बढ़ते डीएसआर रकबे को देखते हुए यह माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में यह तकनीक धान उत्पादक किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प के रूप में स्थापित होगी।

 #CMMadhyaPradesh #JansamparkMP #minmpkrishi

#बालाघाट जिले में डीएसआर पद्धति को मिल रहा बढ़ावा, किसानों ने सुपर सीडर से की धान की सीधी बुवाई लालबर्रा और खैरलांजी विकासखंड के किसानों ने अपनाई आधुनिक तकनीक, कम लागत और अधिक उत्पादन की उम्मीद बालाघाट जिले में कृषि विभाग द्वारा धान उत्पादन में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के प्रयास लगातार रंग ला रहे हैं। किसानों के बीच डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) पद्धति तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसी क्रम में मंगलवार को लालबर्रा एवं खैरलांजी विकासखंड के विभिन्न गांवों में किसानों ने सुपर सीडर मशीन की सहायता से धान की सीधी बुवाई कर आधुनिक खेती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया। उपसंचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय ने बताया कि लालबर्रा विकासखंड के ग्राम नेवरगांव (व) में कृषक श्री अरुण रहांगडाले एवं श्री राजेश रहांगडाले के खेतों में सुपर सीडर मशीन के माध्यम से लगभग 12 एकड़ क्षेत्र में डीएसआर पद्धति से धान की बुवाई की गई। कृषि विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया तथा डीएसआर पद्धति के लाभों की जानकारी दी। इसी प्रकार खैरलांजी विकासखंड के ग्राम कुम्हली में कृषक श्री निकेश पांडे के खेत में डीएसआर तकनीक से धान की सीधी बोनी की गई। वहीं ग्राम सावरगांव में कृषक श्री पदमलाल लिल्हारे एवं श्री वीरू भंडारकर के लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में सुपर सीडर मशीन से धान की बुवाई कराई गई। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार डीएसआर पद्धति पारंपरिक रोपा विधि की तुलना में अधिक किफायती एवं श्रम बचाने वाली तकनीक है। इस पद्धति में खेत में सीधे बीज की बुवाई की जाती है, जिससे नर्सरी तैयार करने, पौध उखाड़ने और रोपाई करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे मजदूरी लागत में कमी आती है तथा समय और पानी दोनों की बचत होती है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को सुपर सीडर जैसी आधुनिक मशीनों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभाग का मानना है कि डीएसआर तकनीक के व्यापक उपयोग से जिले में धान उत्पादन की लागत कम होगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। साथ ही जल संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि को भी बढ़ावा मिलेगा। कृषि अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाएं तथा विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और यंत्रीकरण कार्यक्रमों का लाभ उठाएं। जिले में बढ़ते डीएसआर रकबे को देखते हुए यह माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में यह तकनीक धान उत्पादक किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प के रूप में स्थापित होगी। #CMMadhyaPradesh #JansamparkMP #minmpkrishi

Balaghat, Madhya Pradesh | Jun 15, 2026

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