रीवा हॉस्पिटल में खुले आम मची लूट रिपोर्ट दिखाने के लिए 500 तक हो रही वसूली वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
प्रदेश के रीवा जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। एक तरफ जहां सूबे के उपमुख्यमंत्री और रीवा विधायक स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल का यह गृह जिला है, वहीं दूसरी तरफ इसी वीआईपी जिले के एक नामचीन निजी अस्पताल 'रीवा हॉस्पिटल' में मरीजों से खुलेआम लूट मचा रखी है। आलम यह है कि अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के नाम पर मनमाने दाम वसूलना शुरू कर दिया है, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार कर्ज के दलदल में धंसने को मजबूर हैं।
अस्पताल के अंदर चल रही इस अंधेरगर्दी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ डॉक्टर को पुरानी जांच रिपोर्ट दिखाने (फ़ॉलो-अप) के लिए भी मरीजों से ₹500 तक का चार्ज वसूला जा रहा है। हद तो तब हो जाती है जब अस्पताल में भर्ती मरीजों को ग्लूकोज की बोतल चढ़ाने के लिए इस्तेमाल होने वाली एक मामूली नीडल (सुई/कैनुला) लगाने का चार्ज भी ₹500 अलग से बिल में जोड़ दिया जाता है।
बड़ा सवाल यह उठता है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे यह खुली लूट किस गाइडलाइन के तहत की जा रही है? क्या रीवा हॉस्पिटल को किसी विशेष नियम के तहत मरीजों का शोषण करने की छूट मिली हुई है? डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में ही जब स्वास्थ्य माफिया इस कदर बेखौफ हैं, तो प्रदेश के बाकी हिस्सों का क्या हाल होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
जनता पूछ रही है तीखे सवाल:
* **सवाल 1:** क्या स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को रीवा हॉस्पिटल की इस मनमानी की भनक नहीं है, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?
* **सवाल 2:** स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के गृह जिले में ही मरीजों से इस तरह की अवैध वसूली उनके दावों पर सवालिया निशान नहीं खड़ी करती?
* **सवाल 3:** इस अस्पताल के खिलाफ अब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
**प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग:**
रीवा की जनता अब सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक इस लूट तंत्र के खिलाफ आवाज उठा रही है। स्थानीय नागरिकों ने कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से मांग की है कि रीवा हॉस्पिटल के रेट लिस्ट की तत्काल जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई कर अस्पताल का लाइसेंस निरस्त किया जाए।