Indian Flapshell Turtle Rescue and Release
ग्रामीण क्षेत्रों के तालाबों और जलाशयों में पाए जाने वाले Indian Flapshell Turtle (Lissemys punctata) को अक्सर मछली पकड़ने के दौरान लोग अनजाने में पकड़ लेते हैं। जानकारी के अभाव में कई बार इन कछुओं को नुकसान पहुँचाया जाता है या भोजन के लिए ले जाया जाता है।
ग्रामीण द्वारा पकड़े गए दो Indian Flapshell Turtles को हमारी टीम ने सुरक्षित रूप से रेस्क्यू किया। स्वास्थ्य और स्थिति का निरीक्षण करने के बाद दोनों कछुओं को उनके उपयुक्त प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से release किया गया। वन्यजीव बचाबकर्ता शिवनाथ कुमार और सुनील कुमार द्वारा इसे बराकर गांव राजगीर क्षेत्र में इसका रेस्क्यू किया था। कछुए प्रकृति के स्वास्थ्य के सूचक की तरह कार्य करते हैं। इनका जलीय तंत्रो में होना आवश्यक होता है।
हमारे धर्म ग्रंथों में इसका जिक्र है कि भगवान राम के वनवास के समय जिस केवट ने उनके पांव धोए थे त्रेतायुग में इसी कछुए ने केवट के रूप में जन्म लिया था । यह तालाब, कुँए और झील जैसे जगहों पर आसानी से देखने को मिलते हैं । मछली पकड़ने के क्रम में लोग इसे भी अपना शिकार बना लेते हैं, जो की इस प्रजाति पर बड़ा खतरा है ।
इनका मुख्य आहार सड़े-गले और अवशिष्ट पत्तियाँ कीड़े-मकोड़े और जलीय पौधे हैं । इसके मांस की बहुतायत मांग के चलते यदा कदा ही दिखते हैं । तांत्रिकों द्वारा इसके नख और कवच तंत्र साधना के लिए उपयोग किया जाता है । दीपावली के समय तंत्र साधना के लिए इसकी मांग भी बढ़ जाती है । अंतरास्ट्रीय बाज़ार में भी इसकी बहुत मांग है। जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण, भू-माफियाओ ने लगभग सभी तालाब-तलैया को खत्म होने के कगार पर लाकर छोड़ दिया है । इसे रेड लिस्ट (LC) और वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की अनुसूची 1 में शामिल किया गया है । हमें इन दुर्लभ होते जीवों के मांस का सेवन करने से बचना चाहिए और इनके संरक्षण हेतु प्रयास करना चाहिए ।
Rajgir, Nalanda | Sep 12, 2026