फतेहपुर में दहेज हत्या के मामले में बड़ा फैसला, पति समेत तीन दोषियों को आजीवन कारावास
शादी के 11 महीने बाद संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी आराधिका देवी की मौत, विसरा जांच में मिला था जहरीला पदार्थ
अपर सत्र न्यायाधीश FTC-2 की अदालत ने सुनाया फैसला, सास-ससुर को भी मिली उम्रकैद की सजा
फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद में दहेज हत्या के करीब साढ़े चार साल पुराने मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पति, सास और ससुर को दोषी करार दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट-2 की अदालत ने तीनों अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दहेज प्रताड़ना और दहेज निषेध अधिनियम के तहत भी अलग-अलग कारावास एवं आर्थिक दंड लगाया गया है। अदालत के इस फैसले को दहेज जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ महत्वपूर्ण न्यायिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
शादी के बाद अतिरिक्त दहेज की मांग का आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, असोथर थाना क्षेत्र के हर्रनवा निवासी रामसहाय पुत्र कन्धई ने अपनी पुत्री आराधिका देवी की शादी 8 मई 2021 को खागा थाना क्षेत्र के भोगलपुर गांव निवासी निरंजन पाल के साथ की थी। वादी का आरोप था कि शादी में सामर्थ्य के अनुसार सामान और उपहार दिए गए थे, लेकिन शादी के बाद ससुराल पक्ष के लोग अतिरिक्त दहेज के रूप में नकदी और सोने की जंजीर की मांग करने लगे।
आरोप था कि मांग पूरी नहीं होने पर आराधिका को लगातार प्रताड़ित किया जाता था। वह जब भी मायके आती थी तो परिजनों को ससुराल में मारपीट और उत्पीड़न की जानकारी देती थी।
जहर से मौत के मामले में दर्ज हुआ था मुकदमा
अभियोजन कथानक के मुताबिक, 1 अप्रैल 2022 को आराधिका की मौत की सूचना मायके पक्ष को मिली। परिजन जब भोगलपुर स्थित ससुराल पहुंचे तो आराधिका मृत अवस्था में मिली। पिता ने पति निरंजन पाल, ससुर रामप्रताप और सास सुधारानी पर जहर देकर दहेज हत्या करने का आरोप लगाया था।
इस मामले में 2 अप्रैल 2022 को थाना खागा में मुकदमा दर्ज किया गया। विसरा परीक्षण रिपोर्ट में एल्यूमिनियम फास्फाइड नामक जहरीला पदार्थ पाए जाने का उल्लेख भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत अभियोजन विवरण में किया गया।
तीनों अभियुक्तों को अलग-अलग धाराओं में सजा
4 नवंबर 2026 को अपर सत्र न्यायाधीश/FTC-2 फतेहपुर के पीठासीन अधिकारी श्री अजय सिंह प्रथम की अदालत ने अभियुक्त निरंजन पाल, रामप्रताप और सुधारानी को दोषसिद्ध घोषित किया।
अदालत ने तीनों को धारा 304-B IPC के तहत आजीवन कारावास सुनाया। धारा 498-A IPC में दो वर्ष का कारावास और प्रत्येक पर 15 हजार रुपये जुर्माना लगाया। वहीं धारा 4 दहेज निषेध अधिनियम के तहत एक वर्ष का कारावास और एक-एक हजार रुपये अर्थदंड भी निर्धारित किया।
मामले में अभियोजन की ओर से छह गवाहों की गवाही कराई गई थी। सरकारी अधिवक्ता अजय कुमार सिंह और रणधीर सिंह ने अभियोजन पक्ष की पैरवी की।
ND NEWS की अपील: समाज से अपील है कि दहेज को प्रतिष्ठा या परंपरा का विषय न बनाएं। बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों को प्राथमिकता दें। यदि किसी महिला को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा है तो परिवारजन चुप न रहें और पुलिस, महिला हेल्पलाइन 1090 अथवा आपातकालीन सेवा 112 से सहायता लें।
प्रशासन और महिला कल्याण विभाग से भी अपील है कि दहेज उत्पीड़न की शिकायतों पर संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।
अदालत का यह फैसला समाज को संदेश देता है कि दहेज के नाम पर महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों को गंभीरता से लिया जाएगा और दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार कठोर सजा दी जाएगी।
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🟥 ND NEWS | दैनिक निष्पक्ष धारा
मुख्य संपादक/संस्थापक: राजन सिंह हाड़ा
सह-संपादक: शालिनी सिंह भदौरिया
रिपोर्ट: संबंधित जिला ब्यूरो
📅 दिनांक: 04 नवंबर 2026
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