24 घंटे से ज्यादा समय बीता, छात्राओं को पीटने वालों पर चौक कोतवाली पुलिस नही दर्ज कर पाई एफआईआर, तोड़फोड़ की तस्वीरें भी जिम्मेदारों को नहीं दिख रही, तोड़फोड़ करने का अधिकार किसने दिया, इस नुकसान का हर्जाना किससे वसूला जाना चाहिए
केबिन के शीशे तोड़कर छात्रा को पीटते हुए बाहर लाया गया, फिर बाल पकड़कर खींचा गया, पूरे घटनाक्रम के सीसीटीवी फुटेज पुलिस के पास मौजूद, फिर भी जांच के नाम पर हीलाहवाली और दोनो पक्षों की तहरीर पर जांच करने की कर रही बात। जबकि पहले तहरीर मेडिकल कालेज प्रशासन की तरफ से दी गयी उसके बाद दूसरे पक्ष ने दी।
तीन तीन माननीयों के जिले में महिला सशक्तिकरण की क्या यही असलियत है, इसी मेडिकल कालेज में मिशन शक्ति का भी पाठ पढ़ाया जाता था। स्कूलो में भी शिक्षा की दी जाती है, क्या नारी का यही सम्मान रहे गया?
कभी अन्य घटनाओं में भी इतनी ही गहनता से जांच कर लेते साहब तो इतने सवाल न उठते, अगर मेडिकल कालेज की उन दो छात्राओं ने मरीज से अभद्रता की, मारपीट की या निडिल निकाली तो ये भी जांच का विषय है। साक्ष्य मिले तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन 24 घंटे बीत गए, लाखों लोग मेडिकल कालेज में छात्रा के साथ किये गये तांडव के वीडियो देख चुके हैं, एफआईआर दर्ज करने के लिए इससे ज्यादा और क्या सबूत चाहिए?