रेशम की डोर से रिश्तो की डोर जोड़ने के लिए मनोरोगी बना रहे हैं राखी
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राखी निर्माण के कार्य में जुटे आशा आश्रय गृह में उपचारित मनोरोगी
बड़वानी 08 अगस्त 2026/ भारतीय संस्कृति के प्रमुख त्योहारों में से एक रक्षाबंधन जिसकी डोर रेशम के महीन धागों से बूनी होती है। कहने को यह एक राखी है लेकिन यह बहन का भाई के प्रति विश्वास के साथ बांधा गया रक्षा सूत्र है जो भाई की सुरक्षा के साथ-साथ भाई के द्वारा बहन को सुरक्षा का वचन देता है। ऐसे रिश्तों को सामाजिक ताने-बाने में संजोने का कार्य आशाग्राम ट्रस्ट विगत चार दशकों से भी अधिक समय से कर रहा है। त्योहारों का महत्व भूलकर अपने घर से दूर विक्षिप्तता की स्थिति में जब मनोरोगी परिवार से बिछड़ता है तो यह उस परिवार के लिए तो वेदना का विषय होता ही है किंतु परिवार से दूर एकल जीवन बिता रहे तथा दर-दर भटक रहे उस मनोरोगी के लिए संवेदना शून्य की तरह होता है। संवेदनाओं की इस शून्यता को दूर करने के लिए संस्था निरंतर प्रयास करते हुए एक और मनोरोगियों को स्वावलंबन के साथ उपचार प्रदान कर बिछड़े परिवारों से मिला रही है वही आश्रम में उपचाररत मनोरोगियों में सनातनी संस्कृति के त्योहारों के प्रति पुनः संवेदना भी जगा रही है। उक्त बातें आशाग्राम ट्रस्ट के सचिव डॉ.चक्रेश पहाड़िया ने मनोरोगियों को राखी बनाने के कार्य में प्रोत्साहित करते हुए साझा की।आशा आश्रय गृह की मैनेजर श्रीमती साधना भावसार के संयोजन में राखी निर्माण के कार्य में लगे मनोरोगी सुंदर राखियों का निर्माण कर रहे हैं। ट्रस्ट सचिव डॉ.पहाड़िया के अनुसार आश्रय गृह वासियों के द्वारा निर्मित राखियां आमजन के खरीदने हेतु आशा आश्रय गृह के साथ-साथ शहर के किसी नियत स्थान पर स्टाल लगाकर उपलब्ध कराई जाएगी।
28 views | Barwani, Madhya Pradesh | Aug 8, 2026