'पार्टी हित' के नाम पर टिकट कटने से छलका रमन बाघला का दर्द, सोशल मीडिया पर बयां की पीढ़ियों की निष्ठा और उपेक्षा की दास्तान
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पीलीबंगा/हनुमानगढ़:- पीलीबंगा स्थानीय निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी द्वारा वार्ड नंबर 11 से पार्षद पद का टिकट काटे जाने के बाद दावेदार रमन बाघला का दर्द और आक्रोश खुलकर सामने आया है। दशकों से संगठन से जुड़े परिवार की उपेक्षा से आहत बाघला ने एक भावुक पत्र/पोस्टर जारी किया है, जो राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
रमन बाघला ने अपने पारिवारिक राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए लिखा कि वर्ष 1980 में जनसंघ के दौर में पार्टी ने उनके पिता स्वर्गीय कश्मीरी लाल बाघला पर भरोसा जताते हुए उन्हें 'पार्टी हित' में चुनाव लड़ने का निर्देश दिया था। उनके पिता ने पूरी निष्ठा से संगठन की नींव को मजबूत किया।
46 साल बाद जब उनके बेटे रमन बाघला ने वार्ड नंबर 11 से पार्षद पद के लिए दावेदारी पेश की, तो उन्हें जातीय समीकरणों का हवाला देकर दरकिनार कर दिया गया। उनसे कहा गया कि यदि उन्हें टिकट दिया गया तो अन्य वार्डों में पार्टी को नुकसान हो सकता है। इस पर तंज कसते हुए बाघला ने लिखा, "वर्षों पहले पार्टी ने पिता से कहा था—'पार्टी हित में चुनाव लड़ो', और आज मुझसे कहा गया—'पार्टी हित में चुनाव मत लड़ो'।"
टिकट कटने के बाद चुनाव मैदान से हटने का फैसला लेते हुए बाघला ने अपनी गहरी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि निष्ठावान कार्यकर्ताओं की स्थिति उस ईंट की तरह हो गई है जो सिर्फ इमारत की नींव में दबने के काम आती है, शिखर पर नहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वक्त के साथ रिश्ते और राजनीतिक निष्ठा के मायने बदल जाते हैं?
बाघला ने स्पष्ट किया कि यह उनका कोई विद्रोह या शिकायत नहीं, बल्कि एक पुराने पारिवारिक रिश्ते के टूटने की टीस है। उन्होंने लिखा कि टिकट मिलने की खुशी कुछ दिन रहती, लेकिन दशकों के समर्पण के बाद उपेक्षा की यह पीड़ा जीवन भर सालती रहेगी।
दर्द और नाराजगी जाहिर करने के बावजूद, रमन बाघला ने अपने पत्र के अंत में पार्टी के प्रति निष्ठा दोहराते हुए 'भारतीय जनता पार्टी जिंदाबाद थी, जिंदाबाद रहेगी' लिखकर अपने रुख को गरिमामय बनाए रखा। टिकट वितरण के बाद उपजे इस असंतोष ने स्थानीय संगठन की कार्यशैली और पुराने निष्ठावान परिवारों की अनदेखी पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।