गढ़वाल विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव: जय हो के अध्यक्ष प्रत्याशी हिमांशु भंडारी ने कराया नामांकन
पहली बार पीएचडी छात्र ने अध्यक्ष पद पर ठोकी ताल, अनुभव और उच्च शिक्षा को बनाया ताकत; जय हो से तीन प्रत्याशी मैदान में
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में जय हो छात्र संगठन की ओर से अध्यक्ष पद के प्रत्याशी हिमांशु भंडारी ने गुरुवार को अपना नामांकन दाखिल किया। इस बार जय हो छात्र संगठन ने अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और छात्रा प्रतिनिधि पद पर अपने तीन प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा है।
अध्यक्ष पद के प्रत्याशी हिमांशु भंडारी पीएचडी के छात्र हैं। गढ़वाल विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव के इतिहास में पहली बार पीएचडी स्तर का कोई छात्र अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ रहा है। संगठन का कहना है कि एक वरिष्ठ और उच्च शिक्षित छात्र के चुनाव मैदान में उतरने से छात्रसंघ को अनुभव और अकादमिक दृष्टिकोण का लाभ मिलेगा। हिमांशु के अनुभव से छात्र-छात्राओं की समस्याओं को विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाने में मजबूती मिलने की उम्मीद है।
जय हो छात्र संगठन की ओर से कोषाध्यक्ष पद पर राम रूप गुजर को प्रत्याशी बनाया गया है, जो बीएससी फॉरेस्ट्री के छात्र हैं। वहीं छात्रा प्रतिनिधि पद पर बीटेक द्वितीय वर्ष की छात्रा सुनिधि सिंह चुनाव मैदान में हैं।
छात्र हितों के मुद्दों को लेकर मुखर रहा है जय हो : जय हो छात्र संगठन ने अपने चुनाव अभियान में छात्र हितों से जुड़े मुद्दों और संगठन के पिछले संघर्षों को प्रमुखता से रखा है। संगठन का कहना है कि छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर उसने लगातार आवाज उठाई है। 5 प्रतिशत कैंपस वेटेज, डिग्री में 'सेंट्रल यूनिवर्सिटी' लिखे जाने की मांग तथा विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा विभिन्न पाठ्यक्रमों में सीटें कम किए जाने के विरोध में संगठन ने आंदोलन किया।
संगठन का दावा है कि सीटें घटाए जाने के मुद्दे पर हुए आंदोलन के दौरान छात्र नेताओं और छात्रों को मुकदमों का सामना भी करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद संगठन छात्र हितों की आवाज उठाता रहा।
जय हो छात्र संगठन का कहना है कि इस बार चुनाव में अनुभव, शिक्षा और छात्र हितों के संघर्ष को केंद्र में रखकर छात्रों के बीच पहुंच बनाई जा रही है। संगठन को उम्मीद है कि छात्र एक ऐसे नेतृत्व को मौका देंगे, जो विश्वविद्यालय की अकादमिक व्यवस्था को समझने के साथ ही छात्रों की समस्याओं को मजबूती से उठा सके।