लीजिए, वही सवाल अब सामने आने लगे हैं जिनकी चर्चा शुरू से हो रही थी।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राम मंदिर दान राशि से जुड़े कथित गड़बड़ी मामले में ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच के दायरे में होने की बात कही जा रही है।
लेकिन सवाल यह है कि यदि जांच में किसी की संलिप्तता सामने आती है, तो केवल अधिकार कम करने की बात क्यों?
कानून का सिद्धांत तो यह कहता है कि आरोप चाहे किसी सामान्य व्यक्ति पर हों या किसी बड़े पद पर बैठे व्यक्ति पर, जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और दोष सिद्ध होने पर कानूनी कार्रवाई भी समान रूप से होनी चाहिए।
क्या जवाबदेही केवल छोटे लोगों के लिए है?
क्या धार्मिक, सामाजिक या प्रशासनिक संस्थाओं से जुड़े पदाधिकारी कानून से ऊपर हैं?
जनता का धन, जनता का विश्वास और आस्था—तीनों की रक्षा के लिए जरूरी है कि जांच पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता से हो तथा जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो।
सवाल व्यक्ति का नहीं, जवाबदेही और न्याय के सिद्धांत का है।
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