ईसरदा बांध परियोजना से पूर्वी राजस्थान के जल परिदृश्य को मिलेगी नई दिशा
सवाई माधोपुर और दौसा जिलों की 35.13 लाख आबादी को पेयजल आपूर्ति होगी
बांध में जल स्तर 262 मीटर तक बढ़ेगा, कुल जल भंडारण क्षमता 305 एमसीएम होगी.....
सवाई माधोपुर और टोंक जिलों की सीमा पर बनास नदी पर ग्राम बनेठा में ईसरदा बांध परियोजना पूर्वी राजस्थान में पेयजल एवं जल प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजना है। इस परियोजना के प्रथम चरण में सवाई माधोपुर जिले के बौंली शहर एवं 177 गांवों तथा दौसा जिले के 5 शहरों एवं 1,079 गांवों की लगभग 35.13 लाख आबादी को पेयजल सुविधा का लाभ मिलेगा। इस बांध का निर्माण तथा इंटेक कम पंप हाउस का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। परियोजना को पिछले वर्ष 25 सितंबर को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राष्ट्र को समर्पित किया था।
प्रथम चरण में 1,038.65 करोड़ रुपये खर्च होंगे:- जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ईसरदा बांध और इससे जुड़ी पेयजल व्यवस्था पर दौसा एवं सवाई माधोपुर के सैकड़ों गांवों और 6 शहरों की आबादी लाभान्वित होगी। परियोजना के प्रथम चरण के लिए 1,038.65 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति जारी की गई, जिसमें से सितम्बर 2026 तक 999.22 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। परियोजना के दूसरे चरण में बांध का जल स्तर 262 मीटर तक बढ़ाया जाएगा तथा कुल भंडारण क्षमता 305 एमसीएम (10.77 टीएमसी) हो जाएगी। इसके लिए गेट की ऊंचाई बढ़ाने का कार्य प्रगति पर है, जो आगामी 30 नवंबर तक पूर्ण हो जाएगा। ईसरदा बांध से आगे जयपुर के रामगढ़ बांध, अलवर के जयसमंद तथा भरतपुर के बंध बरेठा बांध को भी पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
जल उपलब्धता के साथ पर्यटन एवं रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी:-* ईसरदा बांध से आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार तथा पेयजल गुणवत्ता में वृद्धि की संभावना है। बीसलपुर बांध की तर्ज पर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों के विकास, स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित होने तथा मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा मिलने की भी संभावना है।
पुनर्वास एवं भूमि अवाप्ति की प्रक्रिया जारी:-* प्रथम चरण में 12 गांवों की 1,200.46 हेक्टेयर भूमि अवाप्त की गई है। इसमें 472.07 हेक्टेयर निजी, 728.39 हेक्टेयर राजकीय तथा 117.866 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है। 102.74 करोड़ रुपये के मुआवजे के विरुद्ध 94.89 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है तथा 314 परिवारों को भूखंड आवंटित किए गए हैं। दूसरे चरण में कुल 4,089.355 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होगी। इसमें 1,633.27 हेक्टेयर निजी तथा 2,456.08 हेक्टेयर राजकीय भूमि शामिल है। भूमि अवाप्ति की धारा 4 से 8 तक की कार्रवाई पूर्ण हो चुकी है, जबकि धारा 11-12 की कार्रवाई प्रगति पर है। मुआवजा संबंधी कार्यवाही अप्रैल 2028 तक पूर्ण किए जाने का लक्ष्य है।
*आधुनिक तकनीक से लैस बांध:-* विभागीय अधिकारियों के अनुसार, ईसरदा एक कंपोजिट बांध है, जिसमें मध्य भाग में कंक्रीट स्पिलवे तथा दोनों ओर मिट्टी के बांध हैं। 537.5 मीटर लंबे स्पिलवे पर 28 रेडियल गेट स्थापित किए गए हैं। प्रत्येक गेट का आकार 15.50 मीटर 13 मीटर है और इन्हें हाइड्रोलिक सिलेंडर तकनीक से संचालित किया जाता है। पूरे गेट संचालन एवं सुरक्षा तंत्र को स्काडा कंप्यूटर प्रणाली से नियंत्रित किया गया है। आपातकालीन सुरक्षा के लिए 4 स्टॉप-लॉग गेट तथा बांध की आंतरिक संरचनाओं के निरीक्षण के लिए गैलरी में आधुनिक लिफ्ट की व्यवस्था भी की गई है। बांध के बाएं मिट्टी बांध की लंबाई 3,374.50 मीटर तथा दाएं हिस्से की लंबाई 2,358.50 मीटर है।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ईसरदा बांध परियोजना पेयजल सुरक्षा, जल संरक्षण, पर्यटन विकास और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को गति देने की दिशा में पूर्वी राजस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण आधारभूत परियोजना के रूप में विकसित हो रही है।