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बंडा: उल्दन बांध परियोजना: डूब क्षेत्र खाली करने और पुनर्वास कॉलोनी में विस्थापित होने की प्रशासन की अपील

Banda, Sagar | May 27, 2026
बण्डा वृहद सिंचाई परियोजना प्रबंधक अनिरूद्ध आनंद ने बुधवार शाम करीब 4 बजे बताया कि संबंधित एवं ग्रामवासी ग्राम सलैयाखुर्द, पुरा बिनैका, बमूरा बिनेका, मुडिया गुसाई एवं आंशिक प्रभावित ग्राम उल्दन, किरौला, कुल्ल, बहरोल, पिपरिया इल्लाई, हनौता उवारी, सेमरा अहीर, कोटिया, पिथौली, पहरगुवां तहसील, बण्डा को सूचित किया जाता है कि बण्डा वृहद सिंचाई परियोजना के तहत "नाल

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केन नदी पुल पर सुरक्षा जाली लगाने की मांग को मिला समर्थन
जनपद बाँदा में आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दा सामने आया है। इस विषय को प्रमुखता से उठाने के लिए हिंदुस्तान अखबार की पहल सराहनीय है।
अक्सर देखा जाता है कि घरेलू छोटी-छोटी परेशानियों, मानसिक तनाव, आर्थिक कठिनाइयों, पारिवारिक विवादों या परीक्षा में असफलता जैसी परिस्थितियों से निराश होकर कुछ लोग, विशेषकर युवा और विद्यार्थी, केन नदी पुल से कूदकर अपनी जीवन यात्रा समाप्त करने का प्रयास करते हैं। ऐसी घटनाओं में किसी परिवार का इकलौता बेटा, किसी घर का कमाने वाला सदस्य या किसी माता-पिता की उम्मीद हमेशा के लिए उनसे दूर हो जाती है। इसके बाद परिवारों को आजीवन दुःख, आर्थिक संकट और मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है।
इसी गंभीर विषय पर बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी, प्रमोद आज़ाद, प्रद्युम्न दुबे (पूर्व जिला अध्यक्ष, कांग्रेस, बाँदा) तथा समाजसेवी शाहान अली ने संयुक्त रूप से प्रशासन से मांग की है कि केन नदी के दोनों पुलों पर मजबूत लोहे की सुरक्षा जाली लगाई जाए, जिससे कोई व्यक्ति आसानी से पुल से कूदकर आत्महत्या न कर सके।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि इस पहल से कुछ लोगों की भी जान बचाई जा सके और परिवारों को असमय बिछड़ने की पीड़ा से बचाया जा सके, तो यह समाज और प्रशासन दोनों के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।
उन्होंने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों से इस दिशा में शीघ्र प्रभावी कदम उठाने की अपील की है। साथ ही हिंदुस्तान अखबार द्वारा इस जनहित के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने के लिए आभार व्यक्त करते हुए इसकी सराहना की है।
"एक सुरक्षा जाली कई अनमोल ज़िंदगियाँ बचा सकती है।"
समाज और प्रशासन के संयुक्त प्रयास से ही ऐसी दुखद घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
UP 90 Creator 
#KenRiverBridgeSafety
#BandaCares
#बुंदेलखंड_इंसाफ_सेना
#केन_नदी_बचाओ_जीवन_बचाओ
#SafetyFirstBanda

केन नदी पुल पर सुरक्षा जाली लगाने की मांग को मिला समर्थन जनपद बाँदा में आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दा सामने आया है। इस विषय को प्रमुखता से उठाने के लिए हिंदुस्तान अखबार की पहल सराहनीय है। अक्सर देखा जाता है कि घरेलू छोटी-छोटी परेशानियों, मानसिक तनाव, आर्थिक कठिनाइयों, पारिवारिक विवादों या परीक्षा में असफलता जैसी परिस्थितियों से निराश होकर कुछ लोग, विशेषकर युवा और विद्यार्थी, केन नदी पुल से कूदकर अपनी जीवन यात्रा समाप्त करने का प्रयास करते हैं। ऐसी घटनाओं में किसी परिवार का इकलौता बेटा, किसी घर का कमाने वाला सदस्य या किसी माता-पिता की उम्मीद हमेशा के लिए उनसे दूर हो जाती है। इसके बाद परिवारों को आजीवन दुःख, आर्थिक संकट और मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है। इसी गंभीर विषय पर बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी, प्रमोद आज़ाद, प्रद्युम्न दुबे (पूर्व जिला अध्यक्ष, कांग्रेस, बाँदा) तथा समाजसेवी शाहान अली ने संयुक्त रूप से प्रशासन से मांग की है कि केन नदी के दोनों पुलों पर मजबूत लोहे की सुरक्षा जाली लगाई जाए, जिससे कोई व्यक्ति आसानी से पुल से कूदकर आत्महत्या न कर सके। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि इस पहल से कुछ लोगों की भी जान बचाई जा सके और परिवारों को असमय बिछड़ने की पीड़ा से बचाया जा सके, तो यह समाज और प्रशासन दोनों के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों से इस दिशा में शीघ्र प्रभावी कदम उठाने की अपील की है। साथ ही हिंदुस्तान अखबार द्वारा इस जनहित के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने के लिए आभार व्यक्त करते हुए इसकी सराहना की है। "एक सुरक्षा जाली कई अनमोल ज़िंदगियाँ बचा सकती है।" समाज और प्रशासन के संयुक्त प्रयास से ही ऐसी दुखद घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है। UP 90 Creator #KenRiverBridgeSafety #BandaCares #बुंदेलखंड_इंसाफ_सेना #केन_नदी_बचाओ_जीवन_बचाओ #SafetyFirstBanda

Banda, Banda | Jun 3, 2026

केन नदी पुल पर सुरक्षा जाली लगाने की मांग को मिला समर्थन
जनपद बाँदा में आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दा सामने आया है। इस विषय को प्रमुखता से उठाने के लिए हिंदुस्तान अखबार की पहल सराहनीय है।
अक्सर देखा जाता है कि घरेलू छोटी-छोटी परेशानियों, मानसिक तनाव, आर्थिक कठिनाइयों, पारिवारिक विवादों या परीक्षा में असफलता जैसी परिस्थितियों से निराश होकर कुछ लोग, विशेषकर युवा और विद्यार्थी, केन नदी पुल से कूदकर अपनी जीवन यात्रा समाप्त करने का प्रयास करते हैं। ऐसी घटनाओं में किसी परिवार का इकलौता बेटा, किसी घर का कमाने वाला सदस्य या किसी माता-पिता की उम्मीद हमेशा के लिए उनसे दूर हो जाती है। इसके बाद परिवारों को आजीवन दुःख, आर्थिक संकट और मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है।
इसी गंभीर विषय पर बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी, प्रमोद आज़ाद, प्रद्युम्न दुबे (पूर्व जिला अध्यक्ष, कांग्रेस, बाँदा) तथा समाजसेवी शाहान अली ने संयुक्त रूप से प्रशासन से मांग की है कि केन नदी के दोनों पुलों पर मजबूत लोहे की सुरक्षा जाली लगाई जाए, जिससे कोई व्यक्ति आसानी से पुल से कूदकर आत्महत्या न कर सके।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि इस पहल से कुछ लोगों की भी जान बचाई जा सके और परिवारों को असमय बिछड़ने की पीड़ा से बचाया जा सके, तो यह समाज और प्रशासन दोनों के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।
उन्होंने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों से इस दिशा में शीघ्र प्रभावी कदम उठाने की अपील की है। साथ ही हिंदुस्तान अखबार द्वारा इस जनहित के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने के लिए आभार व्यक्त करते हुए इसकी सराहना की है।
"एक सुरक्षा जाली कई अनमोल ज़िंदगियाँ बचा सकती है।"
समाज और प्रशासन के संयुक्त प्रयास से ही ऐसी दुखद घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
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#KenRiverBridgeSafety
#BandaCares
#बुंदेलखंड_इंसाफ_सेना
#केन_नदी_बचाओ_जीवन_बचाओ
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केन नदी पुल पर सुरक्षा जाली लगाने की मांग को मिला समर्थन जनपद बाँदा में आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दा सामने आया है। इस विषय को प्रमुखता से उठाने के लिए हिंदुस्तान अखबार की पहल सराहनीय है। अक्सर देखा जाता है कि घरेलू छोटी-छोटी परेशानियों, मानसिक तनाव, आर्थिक कठिनाइयों, पारिवारिक विवादों या परीक्षा में असफलता जैसी परिस्थितियों से निराश होकर कुछ लोग, विशेषकर युवा और विद्यार्थी, केन नदी पुल से कूदकर अपनी जीवन यात्रा समाप्त करने का प्रयास करते हैं। ऐसी घटनाओं में किसी परिवार का इकलौता बेटा, किसी घर का कमाने वाला सदस्य या किसी माता-पिता की उम्मीद हमेशा के लिए उनसे दूर हो जाती है। इसके बाद परिवारों को आजीवन दुःख, आर्थिक संकट और मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है। इसी गंभीर विषय पर बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी, प्रमोद आज़ाद, प्रद्युम्न दुबे (पूर्व जिला अध्यक्ष, कांग्रेस, बाँदा) तथा समाजसेवी शाहान अली ने संयुक्त रूप से प्रशासन से मांग की है कि केन नदी के दोनों पुलों पर मजबूत लोहे की सुरक्षा जाली लगाई जाए, जिससे कोई व्यक्ति आसानी से पुल से कूदकर आत्महत्या न कर सके। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि इस पहल से कुछ लोगों की भी जान बचाई जा सके और परिवारों को असमय बिछड़ने की पीड़ा से बचाया जा सके, तो यह समाज और प्रशासन दोनों के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों से इस दिशा में शीघ्र प्रभावी कदम उठाने की अपील की है। साथ ही हिंदुस्तान अखबार द्वारा इस जनहित के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने के लिए आभार व्यक्त करते हुए इसकी सराहना की है। "एक सुरक्षा जाली कई अनमोल ज़िंदगियाँ बचा सकती है।" समाज और प्रशासन के संयुक्त प्रयास से ही ऐसी दुखद घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है। UP 90 Creator #KenRiverBridgeSafety #BandaCares #बुंदेलखंड_इंसाफ_सेना #केन_नदी_बचाओ_जीवन_बचाओ #SafetyFirstBanda

Banda, Banda | Jun 3, 2026

🔥 बांदा में जल, जंगल, पहाड़ और केन नदी बचाने को बुंदेलखंड इंसाफ सेना की तीन दिवसीय भूख हड़ताल समाप्त, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन 🔥
बांदा जनपद में बढ़ते अवैध खनन, बेकाबू वायु प्रदूषण, भीषण गर्मी, लगातार हो रही वनों की कटाई तथा जल स्रोतों पर बढ़ते संकट के विरोध में बुंदेलखंड इंसाफ सेना द्वारा चलाया गया तीन दिवसीय जनआंदोलन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी के नेतृत्व में आयोजित भूख हड़ताल तीसरे दिन ज्ञापन सौंपने के बाद समाप्त हुई।
आंदोलन के दौरान समाजसेवी जयराम सिंह ने कहा कि खनन कार्यों में नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। निर्धारित मानकों से अधिक खनन के कारण पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे कृषि, जल स्रोतों, वन्य जीवन और आम जनजीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बुंदेलखंड की प्राकृतिक धरोहर को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।
समाजसेवी शाहान अली ने आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए कहा कि जल, जंगल, पहाड़, तालाब और नदियों की रक्षा केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि मानव अस्तित्व का प्रश्न है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर जागरूक रहने और जनहित के मुद्दों पर एकजुट होने की अपील की।
आंदोलन को समाजसेवी प्रमोद आज़ाद तथा पूर्व जिला अध्यक्ष कांग्रेस प्रद्युम्न दुबे का भी समर्थन प्राप्त हुआ। सभी ने पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
भूख हड़ताल का नेतृत्व कर रहे ए. एस. नोमानी ने मांग की कि बांदा जनपद में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए आगामी 10 वर्षों तक खनन गतिविधियों पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे खनन, जंगलों की कटाई और जल स्रोतों के दोहन से क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन गंभीर संकट में है। यदि अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को जल संकट, प्रदूषण और प्राकृतिक विनाश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
आंदोलनकारियों ने कहा कि यह संघर्ष केवल वर्तमान समस्याओं के समाधान के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य, स्वच्छ पर्यावरण, हरियाली, जल संरक्षण और केन नदी के अस्तित्व की रक्षा के लिए भी है। साथ ही बुंदेलखंड क्षेत्र के तालाबों को संरक्षित करने, उन पर हो रहे अवैध कब्जों को हटाने तथा उनके पुनर्जीवन की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
दिनांक 03 जून 2026 को आंदोलन के तीसरे दिन बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नगर मजिस्ट्रेट बांदा श्री संदीप केला को मांगपत्र/ज्ञापन सौंपा। नगर मजिस्ट्रेट ने आंदोलनकारियों की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
इसके उपरांत नगर मजिस्ट्रेट श्री संदीप केला ने लगातार तीन दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे ए. एस. नोमानी को जूस पिलाकर भूख हड़ताल समाप्त कराई। इस अवसर पर उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों ने पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा, अवैध खनन पर रोक तथा जल, जंगल, पहाड़, तालाब और केन नदी के संरक्षण के संकल्प को दोहराया।
बुंदेलखंड इंसाफ सेना ने स्पष्ट किया कि भूख हड़ताल का चरण समाप्त हुआ है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए जनजागरण एवं लोकतांत्रिक संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
✨ "जब प्रकृति बचेगी, तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा।" ✨
#जल_जंगल_पहाड़_बचाओ #केन_नदी_बचाओ #बुंदेलखंड_बचाओ #अवैध_खनन_बंद_करो #तालाब_बचाओ #पर्यावरण_संरक्षण

🔥 बांदा में जल, जंगल, पहाड़ और केन नदी बचाने को बुंदेलखंड इंसाफ सेना की तीन दिवसीय भूख हड़ताल समाप्त, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन 🔥 बांदा जनपद में बढ़ते अवैध खनन, बेकाबू वायु प्रदूषण, भीषण गर्मी, लगातार हो रही वनों की कटाई तथा जल स्रोतों पर बढ़ते संकट के विरोध में बुंदेलखंड इंसाफ सेना द्वारा चलाया गया तीन दिवसीय जनआंदोलन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी के नेतृत्व में आयोजित भूख हड़ताल तीसरे दिन ज्ञापन सौंपने के बाद समाप्त हुई। आंदोलन के दौरान समाजसेवी जयराम सिंह ने कहा कि खनन कार्यों में नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। निर्धारित मानकों से अधिक खनन के कारण पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे कृषि, जल स्रोतों, वन्य जीवन और आम जनजीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बुंदेलखंड की प्राकृतिक धरोहर को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है। समाजसेवी शाहान अली ने आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए कहा कि जल, जंगल, पहाड़, तालाब और नदियों की रक्षा केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि मानव अस्तित्व का प्रश्न है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर जागरूक रहने और जनहित के मुद्दों पर एकजुट होने की अपील की। आंदोलन को समाजसेवी प्रमोद आज़ाद तथा पूर्व जिला अध्यक्ष कांग्रेस प्रद्युम्न दुबे का भी समर्थन प्राप्त हुआ। सभी ने पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। भूख हड़ताल का नेतृत्व कर रहे ए. एस. नोमानी ने मांग की कि बांदा जनपद में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए आगामी 10 वर्षों तक खनन गतिविधियों पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे खनन, जंगलों की कटाई और जल स्रोतों के दोहन से क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन गंभीर संकट में है। यदि अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को जल संकट, प्रदूषण और प्राकृतिक विनाश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। आंदोलनकारियों ने कहा कि यह संघर्ष केवल वर्तमान समस्याओं के समाधान के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य, स्वच्छ पर्यावरण, हरियाली, जल संरक्षण और केन नदी के अस्तित्व की रक्षा के लिए भी है। साथ ही बुंदेलखंड क्षेत्र के तालाबों को संरक्षित करने, उन पर हो रहे अवैध कब्जों को हटाने तथा उनके पुनर्जीवन की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। दिनांक 03 जून 2026 को आंदोलन के तीसरे दिन बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नगर मजिस्ट्रेट बांदा श्री संदीप केला को मांगपत्र/ज्ञापन सौंपा। नगर मजिस्ट्रेट ने आंदोलनकारियों की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी कर उचित कार्रवाई की जाएगी। इसके उपरांत नगर मजिस्ट्रेट श्री संदीप केला ने लगातार तीन दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे ए. एस. नोमानी को जूस पिलाकर भूख हड़ताल समाप्त कराई। इस अवसर पर उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों ने पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा, अवैध खनन पर रोक तथा जल, जंगल, पहाड़, तालाब और केन नदी के संरक्षण के संकल्प को दोहराया। बुंदेलखंड इंसाफ सेना ने स्पष्ट किया कि भूख हड़ताल का चरण समाप्त हुआ है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए जनजागरण एवं लोकतांत्रिक संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। ✨ "जब प्रकृति बचेगी, तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा।" ✨ #जल_जंगल_पहाड़_बचाओ #केन_नदी_बचाओ #बुंदेलखंड_बचाओ #अवैध_खनन_बंद_करो #तालाब_बचाओ #पर्यावरण_संरक्षण

Banda, Banda | Jun 3, 2026

🔥 बांदा में जल, जंगल, पहाड़ और केन नदी बचाने को बुंदेलखंड इंसाफ सेना की तीन दिवसीय भूख हड़ताल समाप्त, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन 🔥
बांदा जनपद में बढ़ते अवैध खनन, बेकाबू वायु प्रदूषण, भीषण गर्मी, लगातार हो रही वनों की कटाई तथा जल स्रोतों पर बढ़ते संकट के विरोध में बुंदेलखंड इंसाफ सेना द्वारा चलाया गया तीन दिवसीय जनआंदोलन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी के नेतृत्व में आयोजित भूख हड़ताल तीसरे दिन ज्ञापन सौंपने के बाद समाप्त हुई।
आंदोलन के दौरान समाजसेवी जयराम सिंह ने कहा कि खनन कार्यों में नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। निर्धारित मानकों से अधिक खनन के कारण पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे कृषि, जल स्रोतों, वन्य जीवन और आम जनजीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बुंदेलखंड की प्राकृतिक धरोहर को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।
समाजसेवी शाहान अली ने आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए कहा कि जल, जंगल, पहाड़, तालाब और नदियों की रक्षा केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि मानव अस्तित्व का प्रश्न है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर जागरूक रहने और जनहित के मुद्दों पर एकजुट होने की अपील की।
आंदोलन को समाजसेवी प्रमोद आज़ाद तथा पूर्व जिला अध्यक्ष कांग्रेस प्रद्युम्न दुबे का भी समर्थन प्राप्त हुआ। सभी ने पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
भूख हड़ताल का नेतृत्व कर रहे ए. एस. नोमानी ने मांग की कि बांदा जनपद में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए आगामी 10 वर्षों तक खनन गतिविधियों पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे खनन, जंगलों की कटाई और जल स्रोतों के दोहन से क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन गंभीर संकट में है। यदि अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को जल संकट, प्रदूषण और प्राकृतिक विनाश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
आंदोलनकारियों ने कहा कि यह संघर्ष केवल वर्तमान समस्याओं के समाधान के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य, स्वच्छ पर्यावरण, हरियाली, जल संरक्षण और केन नदी के अस्तित्व की रक्षा के लिए भी है। साथ ही बुंदेलखंड क्षेत्र के तालाबों को संरक्षित करने, उन पर हो रहे अवैध कब्जों को हटाने तथा उनके पुनर्जीवन की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
दिनांक 03 जून 2026 को आंदोलन के तीसरे दिन बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नगर मजिस्ट्रेट बांदा श्री संदीप केला को मांगपत्र/ज्ञापन सौंपा। नगर मजिस्ट्रेट ने आंदोलनकारियों की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
इसके उपरांत नगर मजिस्ट्रेट श्री संदीप केला ने लगातार तीन दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे ए. एस. नोमानी को जूस पिलाकर भूख हड़ताल समाप्त कराई। इस अवसर पर उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों ने पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा, अवैध खनन पर रोक तथा जल, जंगल, पहाड़, तालाब और केन नदी के संरक्षण के संकल्प को दोहराया।
बुंदेलखंड इंसाफ सेना ने स्पष्ट किया कि भूख हड़ताल का चरण समाप्त हुआ है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए जनजागरण एवं लोकतांत्रिक संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
✨ "जब प्रकृति बचेगी, तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा।" ✨
#जल_जंगल_पहाड़_बचाओ #केन_नदी_बचाओ #बुंदेलखंड_बचाओ #अवैध_खनन_बंद_करो #तालाब_बचाओ #पर्यावरण_संरक्षण

🔥 बांदा में जल, जंगल, पहाड़ और केन नदी बचाने को बुंदेलखंड इंसाफ सेना की तीन दिवसीय भूख हड़ताल समाप्त, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन 🔥 बांदा जनपद में बढ़ते अवैध खनन, बेकाबू वायु प्रदूषण, भीषण गर्मी, लगातार हो रही वनों की कटाई तथा जल स्रोतों पर बढ़ते संकट के विरोध में बुंदेलखंड इंसाफ सेना द्वारा चलाया गया तीन दिवसीय जनआंदोलन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी के नेतृत्व में आयोजित भूख हड़ताल तीसरे दिन ज्ञापन सौंपने के बाद समाप्त हुई। आंदोलन के दौरान समाजसेवी जयराम सिंह ने कहा कि खनन कार्यों में नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। निर्धारित मानकों से अधिक खनन के कारण पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे कृषि, जल स्रोतों, वन्य जीवन और आम जनजीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बुंदेलखंड की प्राकृतिक धरोहर को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है। समाजसेवी शाहान अली ने आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए कहा कि जल, जंगल, पहाड़, तालाब और नदियों की रक्षा केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि मानव अस्तित्व का प्रश्न है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर जागरूक रहने और जनहित के मुद्दों पर एकजुट होने की अपील की। आंदोलन को समाजसेवी प्रमोद आज़ाद तथा पूर्व जिला अध्यक्ष कांग्रेस प्रद्युम्न दुबे का भी समर्थन प्राप्त हुआ। सभी ने पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। भूख हड़ताल का नेतृत्व कर रहे ए. एस. नोमानी ने मांग की कि बांदा जनपद में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए आगामी 10 वर्षों तक खनन गतिविधियों पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे खनन, जंगलों की कटाई और जल स्रोतों के दोहन से क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन गंभीर संकट में है। यदि अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को जल संकट, प्रदूषण और प्राकृतिक विनाश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। आंदोलनकारियों ने कहा कि यह संघर्ष केवल वर्तमान समस्याओं के समाधान के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य, स्वच्छ पर्यावरण, हरियाली, जल संरक्षण और केन नदी के अस्तित्व की रक्षा के लिए भी है। साथ ही बुंदेलखंड क्षेत्र के तालाबों को संरक्षित करने, उन पर हो रहे अवैध कब्जों को हटाने तथा उनके पुनर्जीवन की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। दिनांक 03 जून 2026 को आंदोलन के तीसरे दिन बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नगर मजिस्ट्रेट बांदा श्री संदीप केला को मांगपत्र/ज्ञापन सौंपा। नगर मजिस्ट्रेट ने आंदोलनकारियों की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी कर उचित कार्रवाई की जाएगी। इसके उपरांत नगर मजिस्ट्रेट श्री संदीप केला ने लगातार तीन दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे ए. एस. नोमानी को जूस पिलाकर भूख हड़ताल समाप्त कराई। इस अवसर पर उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों ने पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा, अवैध खनन पर रोक तथा जल, जंगल, पहाड़, तालाब और केन नदी के संरक्षण के संकल्प को दोहराया। बुंदेलखंड इंसाफ सेना ने स्पष्ट किया कि भूख हड़ताल का चरण समाप्त हुआ है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए जनजागरण एवं लोकतांत्रिक संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। ✨ "जब प्रकृति बचेगी, तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा।" ✨ #जल_जंगल_पहाड़_बचाओ #केन_नदी_बचाओ #बुंदेलखंड_बचाओ #अवैध_खनन_बंद_करो #तालाब_बचाओ #पर्यावरण_संरक्षण

Banda, Banda | Jun 3, 2026

बांदा में जल, जंगल, पहाड़ और केन नदी बचाने को बुंदेलखंड इंसाफ सेना की भूख हड़ताल तीसरे दिन समाप्त, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन 🔥
🌿 जन-जन से अपील — जल, जंगल, पहाड़, तालाब और केन नदी बचाने की इस मुहिम में सहभागी बनें। 🌿
बांदा जनपद में बढ़ते अवैध खनन, बेकाबू वायु प्रदूषण, भीषण गर्मी, लगातार हो रही वनों की कटाई तथा जल स्रोतों पर बढ़ते संकट के खिलाफ बुंदेलखंड इंसाफ सेना द्वारा चलाया जा रहा जनआंदोलन लगातार मजबूत होता गया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी के नेतृत्व में शुरू हुई भूख हड़ताल तीसरे दिन तक जारी रही।
आंदोलन के दौरान समाजसेवी जयराम सिंह ने कहा कि खनन कार्यों में नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। निर्धारित मानकों से अधिक खनन के कारण पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे कृषि, जल स्रोतों, वन्य जीवन और आम जनजीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बुंदेलखंड की प्राकृतिक धरोहर को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।
इस दौरान समाजसेवी शाहान अली ने भी आंदोलन स्थल पर पहुंचकर अपना समर्थन व्यक्त किया और कहा कि जल, जंगल, पहाड़, तालाब और नदियों की रक्षा केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि मानव अस्तित्व का प्रश्न है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से इस जनआंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की।
आंदोलन को समाजसेवी प्रमोद आज़ाद तथा पूर्व जिला अध्यक्ष कांग्रेस प्रद्युम्न दुबे का भी सहयोग और समर्थन प्राप्त हुआ। सभी ने एक स्वर में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
भूख हड़ताल का नेतृत्व कर रहे ए. एस. नोमानी ने मांग की कि बांदा जनपद में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए आगामी 10 वर्षों तक खनन गतिविधियों पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे खनन, जंगलों की कटाई और जल स्रोतों के दोहन से क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन गंभीर संकट में है। यदि अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को जल संकट, प्रदूषण और प्राकृतिक विनाश जैसी भयावह समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष केवल वर्तमान समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य, स्वच्छ पर्यावरण, हरियाली, जल संरक्षण और केन नदी के अस्तित्व की रक्षा के लिए भी है। साथ ही बुंदेलखंड क्षेत्र के तालाबों को संरक्षित करने, उन पर हो रहे अवैध कब्जों को हटाने तथा उनके पुनर्जीवन की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
आज दिनांक 03 जून 2026 को आंदोलन के तीसरे दिन बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी द्वारा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक मांगपत्र/ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट बांदा श्री संदीप केला को सौंपा गया। ज्ञापन प्राप्त करने के उपरांत नगर मजिस्ट्रेट ने आंदोलनकारियों की मांगों को गंभीरता से सुना तथा आश्वासन दिया कि मांगों पर उचित कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। इसके बाद नगर मजिस्ट्रेट श्री संदीप केला ने लगातार तीन दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे ए. एस. नोमानी को जूस पिलाकर भूख हड़ताल समाप्त कराई। इस प्रकार पर्यावरण संरक्षण, अवैध खनन पर रोक, जल स्रोतों एवं प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा की मांग को लेकर चल रहा यह तीन दिवसीय चरण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
🎥 समाजसेवी जयराम सिंह ने जनता से अपील करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण जनआंदोलन की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और वीडियो के माध्यम से इसकी सच्चाई को देखें, समझें तथा पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम का हिस्सा बनें।
🌱 आइए, अपनी धरती को बचाने के लिए आगे आएं।
🌱 जल स्रोतों, जंगलों, पहाड़ों, तालाबों और नदियों की रक्षा के लिए एकजुट हों।
🌱 आपकी सहभागिता ही इस जनआंदोलन की सबसे बड़ी ताकत है।
🌱 जल, जंगल, पहाड़ और नदियाँ केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि हमारे जीवन, संस्कृति और भविष्य का आधार हैं।
✨ "जब प्रकृति बचेगी, तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा।" ✨
#जल_जंगल_पहाड़_बचाओ
#केन_नदी_बचाओ
#बुंदेलखंड_बचाओ
#अवैध_खनन_बंद_करो

बांदा में जल, जंगल, पहाड़ और केन नदी बचाने को बुंदेलखंड इंसाफ सेना की भूख हड़ताल तीसरे दिन समाप्त, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन 🔥 🌿 जन-जन से अपील — जल, जंगल, पहाड़, तालाब और केन नदी बचाने की इस मुहिम में सहभागी बनें। 🌿 बांदा जनपद में बढ़ते अवैध खनन, बेकाबू वायु प्रदूषण, भीषण गर्मी, लगातार हो रही वनों की कटाई तथा जल स्रोतों पर बढ़ते संकट के खिलाफ बुंदेलखंड इंसाफ सेना द्वारा चलाया जा रहा जनआंदोलन लगातार मजबूत होता गया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी के नेतृत्व में शुरू हुई भूख हड़ताल तीसरे दिन तक जारी रही। आंदोलन के दौरान समाजसेवी जयराम सिंह ने कहा कि खनन कार्यों में नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। निर्धारित मानकों से अधिक खनन के कारण पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे कृषि, जल स्रोतों, वन्य जीवन और आम जनजीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बुंदेलखंड की प्राकृतिक धरोहर को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है। इस दौरान समाजसेवी शाहान अली ने भी आंदोलन स्थल पर पहुंचकर अपना समर्थन व्यक्त किया और कहा कि जल, जंगल, पहाड़, तालाब और नदियों की रक्षा केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि मानव अस्तित्व का प्रश्न है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से इस जनआंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की। आंदोलन को समाजसेवी प्रमोद आज़ाद तथा पूर्व जिला अध्यक्ष कांग्रेस प्रद्युम्न दुबे का भी सहयोग और समर्थन प्राप्त हुआ। सभी ने एक स्वर में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। भूख हड़ताल का नेतृत्व कर रहे ए. एस. नोमानी ने मांग की कि बांदा जनपद में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए आगामी 10 वर्षों तक खनन गतिविधियों पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे खनन, जंगलों की कटाई और जल स्रोतों के दोहन से क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन गंभीर संकट में है। यदि अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को जल संकट, प्रदूषण और प्राकृतिक विनाश जैसी भयावह समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष केवल वर्तमान समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य, स्वच्छ पर्यावरण, हरियाली, जल संरक्षण और केन नदी के अस्तित्व की रक्षा के लिए भी है। साथ ही बुंदेलखंड क्षेत्र के तालाबों को संरक्षित करने, उन पर हो रहे अवैध कब्जों को हटाने तथा उनके पुनर्जीवन की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। आज दिनांक 03 जून 2026 को आंदोलन के तीसरे दिन बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी द्वारा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक मांगपत्र/ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट बांदा श्री संदीप केला को सौंपा गया। ज्ञापन प्राप्त करने के उपरांत नगर मजिस्ट्रेट ने आंदोलनकारियों की मांगों को गंभीरता से सुना तथा आश्वासन दिया कि मांगों पर उचित कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। इसके बाद नगर मजिस्ट्रेट श्री संदीप केला ने लगातार तीन दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे ए. एस. नोमानी को जूस पिलाकर भूख हड़ताल समाप्त कराई। इस प्रकार पर्यावरण संरक्षण, अवैध खनन पर रोक, जल स्रोतों एवं प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा की मांग को लेकर चल रहा यह तीन दिवसीय चरण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। 🎥 समाजसेवी जयराम सिंह ने जनता से अपील करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण जनआंदोलन की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और वीडियो के माध्यम से इसकी सच्चाई को देखें, समझें तथा पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम का हिस्सा बनें। 🌱 आइए, अपनी धरती को बचाने के लिए आगे आएं। 🌱 जल स्रोतों, जंगलों, पहाड़ों, तालाबों और नदियों की रक्षा के लिए एकजुट हों। 🌱 आपकी सहभागिता ही इस जनआंदोलन की सबसे बड़ी ताकत है। 🌱 जल, जंगल, पहाड़ और नदियाँ केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि हमारे जीवन, संस्कृति और भविष्य का आधार हैं। ✨ "जब प्रकृति बचेगी, तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा।" ✨ #जल_जंगल_पहाड़_बचाओ #केन_नदी_बचाओ #बुंदेलखंड_बचाओ #अवैध_खनन_बंद_करो

Banda, Banda | Jun 3, 2026