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जीबीएस ने छीनी थी चलने-फिरने की ताकत, नियमित फिजियोथेरेपी ने लौटाया आत्मविश्वास
जिला चिकित्सालय मुरैना में उपचार के बाद 90 प्रतिशत तक स्वस्थ हुए आदित्य बंसल
बीमारी जब अचानक किसी व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी को पूरी तरह बदल देती है, तब उपचार के साथ-साथ उम्मीद और हौसले की भी उतनी ही जरूरत होती है। सबलगढ़ निवासी श्री आदित्य बंसल के लिए वर्ष 2026 ऐसा ही कठिन दौर लेकर आया, जब वे गिलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी की चपेट में आ गए। देखते ही देखते उनके दोनों हाथों और पैरों में इतनी अधिक कमजोरी आ गई कि चलना-फिरना तो दूर, उठना-बैठना, हाथों से कोई वस्तु पकड़ना और स्वयं भोजन करना भी उनके लिए संभव नहीं रह गया। एक समय ऐसा आया जब उन्हें अपने छोटे-छोटे दैनिक कार्यों के लिए भी परिजनों की मदद लेनी पड़ती थी।
आदित्य और उनके परिवार के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण था। सामान्य जीवन जीने वाला व्यक्ति अचानक दूसरों पर निर्भर हो जाए तो उसका असर केवल शरीर पर ही नहीं, बल्कि मनोबल पर भी पड़ता है। प्रारंभिक उपचार के बाद भी जब अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, तब उन्हें जिला चिकित्सालय मुरैना के फिजियोथेरेपी विभाग में उपचार के लिए भेजा गया।
यहीं से आदित्य के जीवन में धीरे-धीरे बदलाव की शुरुआत हुई। फिजियोथेरेपी विभाग में चिकित्सकों ने उनकी स्थिति का परीक्षण कर उनके लिए नियमित फिजियोथेरेपी एवं पुनर्वास कार्यक्रम शुरू किया। डॉ. अनिल इंदौलिया एवं डॉ. विकास सविता के मार्गदर्शन में उन्हें मांसपेशियों की शक्ति बढ़ाने, शरीर का संतुलन विकसित करने और दैनिक गतिविधियों को दोबारा सामान्य बनाने के लिए नियमित अभ्यास कराया गया।
शुरुआत आसान नहीं थी। कमजोर शरीर के साथ प्रत्येक गतिविधि के लिए प्रयास करना पड़ता था, लेकिन आदित्य ने हिम्मत नहीं छोड़ी। नियमित उपचार, लगातार अभ्यास और चिकित्सकीय टीम की निगरानी के साथ उनकी शारीरिक क्षमता में धीरे-धीरे सुधार आने लगा। जो व्यक्ति कुछ समय पहले अपने दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर था, उसने फिर से अपने पैरों पर खड़े होने की दिशा में कदम बढ़ाना शुरू किया।
लगातार फिजियोथेरेपी का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। वर्तमान में आदित्य लगभग 90 प्रतिशत तक स्वस्थ हो चुके हैं। वे अब बिना किसी सहारे चल-फिर सकते हैं, स्वयं उठ-बैठ सकते हैं, हाथों से वस्तुएं पकड़ सकते हैं और अपने दैनिक कार्य स्वयं करने में सक्षम हैं। उनके जीवन में लौटी यह सामान्यता उनके लिए केवल शारीरिक सुधार नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत है।
अपने अनुभव को साझा करते हुए आदित्य बंसल और उनके परिजनों ने जिला चिकित्सालय मुरैना के फिजियोथेरेपी विभाग एवं चिकित्सकीय टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि कठिन समय में चिकित्सकों का मार्गदर्शन, नियमित फिजियोथेरेपी और लगातार देखरेख ने उन्हें न केवल स्वस्थ होने में मदद की, बल्कि फिर से सामान्य जीवन की ओर लौटने का विश्वास भी दिया।
आदित्य की कहानी इस बात की प्रेरक मिसाल है कि गंभीर बीमारी के बाद भी धैर्य, निरंतर प्रयास और विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखरेख से जीवन को फिर से सामान्य दिशा में लाया जा सकता है। जिला चिकित्सालय मुरैना की चिकित्सकीय टीम द्वारा निरंतर किए जा रहे प्रयासों से आदित्य जैसे मरीजों को उपचार के साथ नई उम्मीद और आत्मविश्वास मिल रहा है। यह सफलता सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में आमजन के विश्वास को मजबूत करने वाली एक सकारात्मक मिसाल भी है।
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117 views | Morena, Madhya Pradesh | Aug 8, 2026