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खरीफ 2026 के लिए किसानों को बड़ी सौगात, मुफ्त मिनीकिट और 50% अनुदान पर मिलेंगे बीज, ई-लॉटरी से होगा चयन उरई (जालौन) खरीफ सीजन 2026 में किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित एवं संकर बीज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने बीज वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उप कृषि निदेशक एस.के. उत्तम ने जानकारी देते हुए बताया कि कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत किसानों को निःशुल्क बीज मिनीकिट तथा 50 प्रतिशत अनुदान पर सामान्य बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन बुकिंग प्रारंभ हो चुकी है। किसान समय रहते आवेदन कर योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं। उप कृषि निदेशक ने बताया कि खरीफ 2026 के लिए विभाग द्वारा संचालित सभी योजनाओं के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष प्रमाणित एवं संकर बीजों की ऑनलाइन बुकिंग शुरू कर दी गई है। इच्छुक किसान कृषि विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण कर अपनी आवश्यकतानुसार बीजों की बुकिंग कर सकते हैं। निर्धारित लक्ष्य से अधिक आवेदन प्राप्त होने की स्थिति में लाभार्थियों का चयन पूरी तरह ई-लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे। उन्होंने बताया कि विभाग का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों तक उन्नत एवं प्रमाणित बीज पहुंचाना है, जिससे उत्पादन में वृद्धि हो और किसानों की आय बढ़ सके। इसलिए इस बार बीज वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया गया है। इन फसलों के मिलेंगे निःशुल्क मिनीकिट कृषि विभाग द्वारा किसानों को निम्नलिखित फसलों के बीज निःशुल्क मिनीकिट के रूप में उपलब्ध कराए जाएंगे— तिल उड़द मूंग अरहर कोदो सांवा रागी संकर बाजरा संकर ज्वार उप कृषि निदेशक ने स्पष्ट किया कि एक किसान को केवल एक ही निःशुल्क मिनीकिट प्रदान किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसानों को योजना का लाभ मिल सके। 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध होंगे ये बीज कृषि विभाग द्वारा निम्नलिखित फसलों के प्रमाणित एवं संकर बीज किसानों को मूल्य का 50 प्रतिशत अनुदान देकर उपलब्ध कराए जाएंगे— धान सामान्य धान संकर धान उड़द मूंग अरहर संकर बाजरा संकर ज्वार संकर मक्का ढैंचा इन बीजों पर सरकार द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा, जिससे किसानों को कम लागत में बेहतर गुणवत्ता के बीज उपलब्ध हो सकें। ई-लॉटरी से होगा लाभार्थियों का चयन उप कृषि निदेशक एस.के. उत्तम ने बताया कि जिन योजनाओं में निर्धारित लक्ष्य से अधिक आवेदन प्राप्त होंगे, उनमें लाभार्थियों का चयन पूरी तरह ई-लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। इससे किसी प्रकार की मानवीय हस्तक्षेप या पक्षपात की संभावना नहीं रहेगी और सभी पात्र किसानों को समान अवसर मिलेगा। POS मशीन से मिलेगा बीज ई-लॉटरी में चयनित किसानों को राजकीय कृषि बीज भंडारों से POS मशीन के माध्यम से बीज वितरित किए जाएंगे। इससे लाभार्थी का सत्यापन डिजिटल माध्यम से होगा और वितरण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहेगी। ऑनलाइन बुकिंग करना अनिवार्य कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि बीज प्राप्त करने के लिए किसानों को पहले विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन बुकिंग करनी होगी। बिना ऑनलाइन बुकिंग के किसी भी किसान को योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा। इसलिए सभी पात्र किसान समय रहते आवेदन कर अपनी पसंद की फसल के बीज की बुकिंग अवश्य करें। समय से करें आवेदन उप कृषि निदेशक ने जनपद के सभी किसानों से अपील की है कि वे खरीफ की बुवाई को ध्यान में रखते हुए समय से ऑनलाइन आवेदन करें, ताकि चयन होने पर निर्धारित समय पर बीज प्राप्त कर सकें और समय पर बुवाई कर अच्छी पैदावार हासिल कर सकें। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को उन्नत कृषि तकनीक और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। किसानों को इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाकर उत्पादन बढ़ाने की दिशा में आगे आना चाहिए। किसान यहां करें आवेदन किसान कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर पंजीकरण एवं बीज बुकिंग कर सकते हैं। पोर्टल: https://agriculture.up.gov.in/ #उरई #जालौन #खरीफ2026 #कृषिविभाग #उपकृषिनिदेशक #एसकेउत्तम #बीजबुकिंग #ईलॉटरी #मुफ्तबीज #मिनीकिट #50प्रतिशतअनुदान #धान #उड़द #मूंग #अरहर #तिल #संकरमक्का #संकरधान #संकरबाजरा #संकरज्वार #कोदो #सांवा #रागी #ढैंचा #प्रमाणितबीज #किसान #किसानसमाचार #कृषिसमाचार #उत्तरप्रदेश #Urai

Kalpi, Jalaun | Jul 11, 2026

MORE NEWS

हरदोई गूजर में ग्राउंड रिपोर्ट ने खोले कई सवाल!
₹24 लाख का मरघट या सरकारी धन की बर्बादी?

 प्रधान-सचिव के बताए स्थान पर पहुंची टीम, जर्जर दीवारें और अधूरी बोरिंग देखकर उठे सवाल—आखिर ₹24 लाख कहां खर्च हुए?

डकोर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत हरदोई गूजर में मरघट निर्माण को लेकर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। 
ऑनलाइन रिकॉर्ड, जियो-टैग लोकेशन और ग्रामीणों से मिली जानकारी के बाद जब मौके पर पड़ताल की गई तो मामला और भी सवालों के घेरे में आ गया।

पिछली रिपोर्ट में जिस स्थान को जियो-टैग के आधार पर मरघट बताया गया था, उस स्थान पर निर्माण होने से प्रधान-सचिव ने इनकार किया। 
इसके बाद प्रधान-सचिव के बताए अनुसार टीम हरदोई गूजर से जालौन जाने वाले मार्ग पर पहुंची, जहां एक मरघट बना हुआ मिला।

प्रधान-सचिव के अनुसार इसी मरघट पर करीब ₹24 लाख की लागत आई है।

लेकिन कैमरे में कैद मौके की तस्वीरें कई सवाल खड़े कर रही हैं। 
दीवारें जर्जर दिखाई दे रही हैं, निर्माण की हालत खराब है और पानी के लिए कराई गई बोरिंग की व्यवस्था भी अधूरी नजर आती है।

 ₹24 लाख खर्च हुए तो निर्माण इतना बदहाल क्यों?

 ₹24 लाख की लागत वाले निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता की जांच हुई या नहीं?

 भुगतान से पहले अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया था?

 MB में कितना काम दर्ज है और जमीन पर कितना काम हुआ?

 बिल-वाउचर और भुगतान का पूरा रिकॉर्ड क्या कहता है?

 बोरिंग कराई गई तो पानी की व्यवस्था अधूरी क्यों छोड़ी गई?

 निर्माण के कुछ समय बाद ही दीवारें खराब होने की नौबत कैसे आई?

 क्या पूरे निर्माण की तकनीकी नाप-जोख और थर्ड पार्टी जांच कराई जाएगी?

 असली सवाल—रिकॉर्ड में लाखों, जमीन पर कितना?

यह मामला सिर्फ एक मरघट का नहीं है। 
सवाल यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज धनराशि और जमीन पर दिखाई दे रहे निर्माण का वास्तविक अनुपात क्या है?

ग्रामीणों द्वारा पंचायत में अन्य विकास कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। 
प्रधान के लंबे समय से पद पर रहने का दावा भी ग्रामीणों की ओर से किया गया है। 
इन सभी आरोपों की सत्यता सरकारी रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकती है।

हम किसी को दोषी घोषित नहीं कर रहे।
 हमारा सवाल सीधा है—
 अगर ₹24 लाख खर्च हुए हैं, तो ₹24 लाख का काम जमीन पर दिखाई क्यों नहीं दे रहा?

अब प्रशासन को चाहिए कि ऑनलाइन रिकॉर्ड, जियो-टैग, MB, बिल-वाउचर, भुगतान रिकॉर्ड और मौके की नाप-जोख का मिलान कराकर सच्चाई सामने लाए।

 वीडियो को आखिर तक देखिए और कमेंट में बताइए—क्या आपको यह मरघट ₹24 लाख की लागत के अनुरूप दिखाई देता है?

आपके गांव में भी सरकारी विकास कार्यों को लेकर सवाल हैं तो हमें जानकारी दें।
 दस्तावेज और मौके की पड़ताल के आधार पर मुद्दा कैमरे के सामने उठाया जाएगा।

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हरदोई गूजर में ग्राउंड रिपोर्ट ने खोले कई सवाल! ₹24 लाख का मरघट या सरकारी धन की बर्बादी? प्रधान-सचिव के बताए स्थान पर पहुंची टीम, जर्जर दीवारें और अधूरी बोरिंग देखकर उठे सवाल—आखिर ₹24 लाख कहां खर्च हुए? डकोर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत हरदोई गूजर में मरघट निर्माण को लेकर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। ऑनलाइन रिकॉर्ड, जियो-टैग लोकेशन और ग्रामीणों से मिली जानकारी के बाद जब मौके पर पड़ताल की गई तो मामला और भी सवालों के घेरे में आ गया। पिछली रिपोर्ट में जिस स्थान को जियो-टैग के आधार पर मरघट बताया गया था, उस स्थान पर निर्माण होने से प्रधान-सचिव ने इनकार किया। इसके बाद प्रधान-सचिव के बताए अनुसार टीम हरदोई गूजर से जालौन जाने वाले मार्ग पर पहुंची, जहां एक मरघट बना हुआ मिला। प्रधान-सचिव के अनुसार इसी मरघट पर करीब ₹24 लाख की लागत आई है। लेकिन कैमरे में कैद मौके की तस्वीरें कई सवाल खड़े कर रही हैं। दीवारें जर्जर दिखाई दे रही हैं, निर्माण की हालत खराब है और पानी के लिए कराई गई बोरिंग की व्यवस्था भी अधूरी नजर आती है। ₹24 लाख खर्च हुए तो निर्माण इतना बदहाल क्यों? ₹24 लाख की लागत वाले निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता की जांच हुई या नहीं? भुगतान से पहले अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया था? MB में कितना काम दर्ज है और जमीन पर कितना काम हुआ? बिल-वाउचर और भुगतान का पूरा रिकॉर्ड क्या कहता है? बोरिंग कराई गई तो पानी की व्यवस्था अधूरी क्यों छोड़ी गई? निर्माण के कुछ समय बाद ही दीवारें खराब होने की नौबत कैसे आई? क्या पूरे निर्माण की तकनीकी नाप-जोख और थर्ड पार्टी जांच कराई जाएगी? असली सवाल—रिकॉर्ड में लाखों, जमीन पर कितना? यह मामला सिर्फ एक मरघट का नहीं है। सवाल यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज धनराशि और जमीन पर दिखाई दे रहे निर्माण का वास्तविक अनुपात क्या है? ग्रामीणों द्वारा पंचायत में अन्य विकास कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रधान के लंबे समय से पद पर रहने का दावा भी ग्रामीणों की ओर से किया गया है। इन सभी आरोपों की सत्यता सरकारी रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकती है। हम किसी को दोषी घोषित नहीं कर रहे। हमारा सवाल सीधा है— अगर ₹24 लाख खर्च हुए हैं, तो ₹24 लाख का काम जमीन पर दिखाई क्यों नहीं दे रहा? अब प्रशासन को चाहिए कि ऑनलाइन रिकॉर्ड, जियो-टैग, MB, बिल-वाउचर, भुगतान रिकॉर्ड और मौके की नाप-जोख का मिलान कराकर सच्चाई सामने लाए। वीडियो को आखिर तक देखिए और कमेंट में बताइए—क्या आपको यह मरघट ₹24 लाख की लागत के अनुरूप दिखाई देता है? आपके गांव में भी सरकारी विकास कार्यों को लेकर सवाल हैं तो हमें जानकारी दें। दस्तावेज और मौके की पड़ताल के आधार पर मुद्दा कैमरे के सामने उठाया जाएगा। #जालौनडीएम #जिलाधिकारीजालौन #जालौनप्रशासन #डकोरबीडीओ #BDOडकोर #खंडविकासअधिकारी #डकोरविकासखंड #सहायकविकासअधिकारी #ADOपंचायत #पंचायतविभाग #जिलापंचायत #जिलापंचायतराजअधिकारी #DPRO #पंचायतीराजविभाग #ग्राम्यविकासविभाग #जालौनसीडीओ #मुख्यविकासअधिकारी #CDOजालौन #डकोरप्रशासन #हरदोईगूजर #डकोर #जालौन #जालौनन्यूज #JalaunNews #DakorNews #UPNews #BreakingNews

Kalpi, Jalaun | Aug 2, 2026

हरदोई गूजर में 24 लाख का मरघट निर्माण! 

जमीन पर न निर्माण, न ढांचा—ऑनलाइन रिकॉर्ड में भुगतान का खेल?

जनपद जालौन के डकोर विकासखंड क्षेत्र के ग्राम हरदोई गूजर से सरकारी विकास कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है।
 उपलब्ध ‘मेरी पंचायत’ ऑनलाइन रिकॉर्ड के स्क्रीनशॉट में मरघट निर्माण से संबंधित कार्यों पर लाखों रुपये के भुगतान का विवरण दिखाई दे रहा है, जबकि ग्रामीणों के साथ मौके पर किए गए निरीक्षण में निर्माण कार्य मौके पर दिखाई नहीं देने का दावा किया गया है।

ऑनलाइन रिकॉर्ड में Marghat Nirman कार्य के लिए अनुमानित लागत ₹24.36 लाख और व्यय ₹23,28,583 दर्शाया गया है। 
रिकॉर्ड में कार्य को 4th State Finance Commission से संबंधित बताया गया है। 
वहीं भुगतान संबंधी स्क्रीनशॉट में KHUSI CONTRACTOR AND SUPPLIERS के नाम से अलग-अलग मदों में भुगतान दर्ज दिखाई देता है।

एक अन्य रिकॉर्ड में Antesthi Sthal Nirman Hetu Bhugtan के नाम से क्रमशः ₹4,98,038, ₹3,70,980, ₹58,205, ₹78,844 और ₹3,23,366 जैसी धनराशियों के भुगतान का विवरण दिखाई दे रहा है। 
इन सभी रिकॉर्डों की वास्तविकता और कार्य की भौतिक स्थिति की आधिकारिक जांच जरूरी है।

 सबसे बड़ा सवाल—24 लाख खर्च हुए तो मरघट कहां है?

ग्रामीणों का आरोप है कि मरघट निर्माण के नाम पर सरकारी धनराशि खर्च दिखाई जा रही है, लेकिन जमीन पर निर्माण कार्य नहीं दिख रहा। 
मौके पर सिर्फ झाड़ियां/देशी झंकार जैसी स्थिति दिखाई देने की बात कही गई है।

यदि ऑनलाइन रिकॉर्ड में लाखों रुपये का खर्च दर्ज है तो—

 क्या खंड विकास अधिकारी ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया था?

 क्या ग्राम पंचायत सचिव ने निर्माण कार्य का सत्यापन किया?

 यदि निरीक्षण हुआ था तो निर्माण की वास्तविक स्थिति क्या पाई गई?

 बिना निर्माण के भुगतान कैसे हुआ?

 क्या माप पुस्तिका (MB), बिल-वाउचर और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र मौजूद हैं?

 क्या भुगतान से पहले जियो-टैग/फोटो के आधार पर सत्यापन किया गया?

 एक ही कार्य के लिए अलग-अलग भुगतान किस आधार पर किए गए?

 क्या संबंधित ठेकेदार/फर्म ने वास्तव में मौके पर काम कराया?

 यदि काम हुआ है तो उसकी वर्तमान भौतिक स्थिति कहां है?

 रिकॉर्ड बनाम जमीन की हकीकत की जांच जरूरी

यह मामला केवल आरोपों के आधार पर निष्कर्ष निकालने का नहीं, बल्कि ऑनलाइन भुगतान रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति का आधिकारिक मिलान कराने का है।
 यदि जांच में रिकॉर्ड के मुताबिक भुगतान और जमीन पर कार्य के बीच अंतर मिलता है तो जिम्मेदार अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित भुगतान प्राप्तकर्ता की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

खबर चलने के बाद क्या जिला प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर मौके पर जांच कराएगा?
 क्या तकनीकी टीम से नाप-जोख कराकर यह पता लगाया जाएगा कि आखिर लाखों रुपये का मरघट निर्माण जमीन पर कहां हुआ?

 यह जांच का विषय है—सरकारी धन का एक-एक रुपया जनता के टैक्स से आता है।

आपके गांव में भी विकास कार्यों के नाम पर ऐसा कोई मामला सामने आया है?
 कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
वीडियो को आखिर तक देखिए और अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

#जालौन #उरई #डकोर #हरदोईगूजर #ग्रामपंचायत #मेरीपंचायत #मरघटनिर्माण #विकासकार्य #सरकारीधन #सरकारीपैसा #भ्रष्टाचार #विकासमेंभ्रष्टाचार #पंचायतभ्रष्टाचार #पंचायत #ग्रामप्रधान #सचिव #खंडविकासअधिकारी #BDO #जालौनन्यूज #उरईन्यूज #डकोरन्यूज #ब्रेकिंगन्यूज #ग्राउंडरिपोर्ट #ग्राउंडरियलिटी #जनताकीसच्चाई 
#जांचकीमांग #सरकारीयोजना #सरकारीखर्च #विकासकाकार्य 
#उत्तरप्रदेश

हरदोई गूजर में 24 लाख का मरघट निर्माण! जमीन पर न निर्माण, न ढांचा—ऑनलाइन रिकॉर्ड में भुगतान का खेल? जनपद जालौन के डकोर विकासखंड क्षेत्र के ग्राम हरदोई गूजर से सरकारी विकास कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। उपलब्ध ‘मेरी पंचायत’ ऑनलाइन रिकॉर्ड के स्क्रीनशॉट में मरघट निर्माण से संबंधित कार्यों पर लाखों रुपये के भुगतान का विवरण दिखाई दे रहा है, जबकि ग्रामीणों के साथ मौके पर किए गए निरीक्षण में निर्माण कार्य मौके पर दिखाई नहीं देने का दावा किया गया है। ऑनलाइन रिकॉर्ड में Marghat Nirman कार्य के लिए अनुमानित लागत ₹24.36 लाख और व्यय ₹23,28,583 दर्शाया गया है। रिकॉर्ड में कार्य को 4th State Finance Commission से संबंधित बताया गया है। वहीं भुगतान संबंधी स्क्रीनशॉट में KHUSI CONTRACTOR AND SUPPLIERS के नाम से अलग-अलग मदों में भुगतान दर्ज दिखाई देता है। एक अन्य रिकॉर्ड में Antesthi Sthal Nirman Hetu Bhugtan के नाम से क्रमशः ₹4,98,038, ₹3,70,980, ₹58,205, ₹78,844 और ₹3,23,366 जैसी धनराशियों के भुगतान का विवरण दिखाई दे रहा है। इन सभी रिकॉर्डों की वास्तविकता और कार्य की भौतिक स्थिति की आधिकारिक जांच जरूरी है। सबसे बड़ा सवाल—24 लाख खर्च हुए तो मरघट कहां है? ग्रामीणों का आरोप है कि मरघट निर्माण के नाम पर सरकारी धनराशि खर्च दिखाई जा रही है, लेकिन जमीन पर निर्माण कार्य नहीं दिख रहा। मौके पर सिर्फ झाड़ियां/देशी झंकार जैसी स्थिति दिखाई देने की बात कही गई है। यदि ऑनलाइन रिकॉर्ड में लाखों रुपये का खर्च दर्ज है तो— क्या खंड विकास अधिकारी ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया था? क्या ग्राम पंचायत सचिव ने निर्माण कार्य का सत्यापन किया? यदि निरीक्षण हुआ था तो निर्माण की वास्तविक स्थिति क्या पाई गई? बिना निर्माण के भुगतान कैसे हुआ? क्या माप पुस्तिका (MB), बिल-वाउचर और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र मौजूद हैं? क्या भुगतान से पहले जियो-टैग/फोटो के आधार पर सत्यापन किया गया? एक ही कार्य के लिए अलग-अलग भुगतान किस आधार पर किए गए? क्या संबंधित ठेकेदार/फर्म ने वास्तव में मौके पर काम कराया? यदि काम हुआ है तो उसकी वर्तमान भौतिक स्थिति कहां है? रिकॉर्ड बनाम जमीन की हकीकत की जांच जरूरी यह मामला केवल आरोपों के आधार पर निष्कर्ष निकालने का नहीं, बल्कि ऑनलाइन भुगतान रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति का आधिकारिक मिलान कराने का है। यदि जांच में रिकॉर्ड के मुताबिक भुगतान और जमीन पर कार्य के बीच अंतर मिलता है तो जिम्मेदार अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित भुगतान प्राप्तकर्ता की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। खबर चलने के बाद क्या जिला प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर मौके पर जांच कराएगा? क्या तकनीकी टीम से नाप-जोख कराकर यह पता लगाया जाएगा कि आखिर लाखों रुपये का मरघट निर्माण जमीन पर कहां हुआ? यह जांच का विषय है—सरकारी धन का एक-एक रुपया जनता के टैक्स से आता है। आपके गांव में भी विकास कार्यों के नाम पर ऐसा कोई मामला सामने आया है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। वीडियो को आखिर तक देखिए और अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। #जालौन #उरई #डकोर #हरदोईगूजर #ग्रामपंचायत #मेरीपंचायत #मरघटनिर्माण #विकासकार्य #सरकारीधन #सरकारीपैसा #भ्रष्टाचार #विकासमेंभ्रष्टाचार #पंचायतभ्रष्टाचार #पंचायत #ग्रामप्रधान #सचिव #खंडविकासअधिकारी #BDO #जालौनन्यूज #उरईन्यूज #डकोरन्यूज #ब्रेकिंगन्यूज #ग्राउंडरिपोर्ट #ग्राउंडरियलिटी #जनताकीसच्चाई #जांचकीमांग #सरकारीयोजना #सरकारीखर्च #विकासकाकार्य #उत्तरप्रदेश

Kalpi, Jalaun | Aug 1, 2026

हरदोई गूजर के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में अव्यवस्थाओं पर उठे सवाल! 

गेट से अंदर घुसते ही घास-फूस का अंबार, कंपाउंड में फैली गंदगी और करीब आधा बीघा क्षेत्र में खड़ी झाड़ियां—क्या इसी माहौल में हो रहा मरीजों का इलाज?

डकोर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम हरदोई गूजर स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय इन दिनों व्यवस्थाओं को लेकर सवालों के घेरे में है। 
अस्पताल परिसर में गेट से प्रवेश करते ही चारों तरफ घास-फूस और झाड़ियां दिखाई देने की बात सामने आई है। 
ग्रामीणों का कहना है कि परिसर में लंबे समय से साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं है।

सबसे बड़ा सवाल कर्मचारियों और डॉक्टर की उपलब्धता को लेकर उठ रहा है। 
ग्रामीणों के अनुसार डॉक्टर कभी-कभी निजी कारणों से अस्पताल नहीं पहुंच पाते, हालांकि सामान्य दिनों में डॉक्टर के आने की बात भी ग्रामीणों ने कही है।

लेकिन सवाल तब और गंभीर हो जाता है जब ग्रामीणों का दावा है कि डॉक्टर की अनुपस्थिति में वार्ड बॉय मरीजों को दवा देता है।

 सवाल यह है कि डॉक्टर की गैरमौजूदगी में मरीजों को दवा देने की अनुमति वार्ड बॉय को किसने दी?
 क्या अस्पताल में डॉक्टर की अनुपस्थिति में मरीजों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था है?
 क्या संबंधित अधिकारियों को अस्पताल की वास्तविक स्थिति की जानकारी है?
 परिसर में इतनी बड़ी मात्रा में घास-फूस और झाड़ियों की सफाई आखिर क्यों नहीं कराई गई?
 क्या स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अस्पताल का नियमित निरीक्षण करते हैं?
 अगर डॉक्टर मौजूद नहीं हैं तो मरीजों की जांच और उपचार की जिम्मेदारी किसकी है?
 क्या वार्ड बॉय द्वारा दवा वितरण की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप है?

 वीडियो को आखिर तक जरूर देखिए, वार्ड बॉय ने कैमरे के सामने क्या कहा और ग्रामीणों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर क्या-क्या बातें बताईं।

अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर मौके पर जांच करता है या फिर ग्रामीणों के सवाल यूं ही अनसुने रह जाते हैं।

 आप भी बताइए—क्या आपके गांव में राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय है? 
अगर है तो क्या डॉक्टर समय से पहुंचते हैं और मरीजों को नियमित उपचार मिलता है?

अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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हरदोई गूजर के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में अव्यवस्थाओं पर उठे सवाल! गेट से अंदर घुसते ही घास-फूस का अंबार, कंपाउंड में फैली गंदगी और करीब आधा बीघा क्षेत्र में खड़ी झाड़ियां—क्या इसी माहौल में हो रहा मरीजों का इलाज? डकोर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम हरदोई गूजर स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय इन दिनों व्यवस्थाओं को लेकर सवालों के घेरे में है। अस्पताल परिसर में गेट से प्रवेश करते ही चारों तरफ घास-फूस और झाड़ियां दिखाई देने की बात सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि परिसर में लंबे समय से साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं है। सबसे बड़ा सवाल कर्मचारियों और डॉक्टर की उपलब्धता को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार डॉक्टर कभी-कभी निजी कारणों से अस्पताल नहीं पहुंच पाते, हालांकि सामान्य दिनों में डॉक्टर के आने की बात भी ग्रामीणों ने कही है। लेकिन सवाल तब और गंभीर हो जाता है जब ग्रामीणों का दावा है कि डॉक्टर की अनुपस्थिति में वार्ड बॉय मरीजों को दवा देता है। सवाल यह है कि डॉक्टर की गैरमौजूदगी में मरीजों को दवा देने की अनुमति वार्ड बॉय को किसने दी? क्या अस्पताल में डॉक्टर की अनुपस्थिति में मरीजों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था है? क्या संबंधित अधिकारियों को अस्पताल की वास्तविक स्थिति की जानकारी है? परिसर में इतनी बड़ी मात्रा में घास-फूस और झाड़ियों की सफाई आखिर क्यों नहीं कराई गई? क्या स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अस्पताल का नियमित निरीक्षण करते हैं? अगर डॉक्टर मौजूद नहीं हैं तो मरीजों की जांच और उपचार की जिम्मेदारी किसकी है? क्या वार्ड बॉय द्वारा दवा वितरण की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप है? वीडियो को आखिर तक जरूर देखिए, वार्ड बॉय ने कैमरे के सामने क्या कहा और ग्रामीणों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर क्या-क्या बातें बताईं। अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर मौके पर जांच करता है या फिर ग्रामीणों के सवाल यूं ही अनसुने रह जाते हैं। आप भी बताइए—क्या आपके गांव में राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय है? अगर है तो क्या डॉक्टर समय से पहुंचते हैं और मरीजों को नियमित उपचार मिलता है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। #ब्रेकिंग_न्यूज #उरई #जालौन #डकोर #हरदोईगूजर #राजकीयआयुर्वेदिकचिकित्सालय #आयुर्वेदिकअस्पताल #जालौन_न्यूज #उरई_न्यूज #डकोर_ब्लॉक #स्वास्थ्य_व्यवस्था #स्वास्थ्य_विभाग #सरकारी_अस्पताल #अस्पताल_की_हकीकत #डॉक्टर #वार्डबॉय #मरीज #ग्रामीणों_की_आवाज #जनता_के_सवाल #जिम्मेदार_कौन #सरकारी_व्यवस्था #स्वास्थ्य_सेवा #ग्रामीण_स्वास्थ्य #अव्यवस्था #साफ_सफाई #जमीनी_हकीकत #ग्राउंड_रिपोर्ट #वायरल_वीडियो #लोकल_न्यूज #जालौन_ब्रेकिंग #

Kalpi, Jalaun | Aug 1, 2026

उरई में दबंगई का मामला 

राजमिस्त्री ठेकेदार पर दबंगों का हमला, मारपीट में फोड़ा सिर—मौके से फरार हुए आरोपी!

उरई कोतवाली क्षेत्र के कोंच रोड स्थित विधि महाविद्यालय के पास राजमिस्त्री ठेकेदार के साथ दबंगों द्वारा मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है।
 आरोप है कि दबंगों ने ठेकेदार के साथ मारपीट की और उसके सिर में चोट पहुंचाई, जिससे वह घायल हो गया। 
घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।

घटना के बाद पीड़ित ने उरई कोतवाली पुलिस को तहरीर सौंपकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। 
पुलिस मामले की जांच में जुटी है। 
घटना के पीछे क्या वजह रही और मारपीट में कौन-कौन लोग शामिल थे, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा।

 सवाल यह है कि आखिर खुलेआम मारपीट करने वाले दबंगों पर पुलिस कब शिकंजा कसेगी?

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उरई में दबंगई का मामला राजमिस्त्री ठेकेदार पर दबंगों का हमला, मारपीट में फोड़ा सिर—मौके से फरार हुए आरोपी! उरई कोतवाली क्षेत्र के कोंच रोड स्थित विधि महाविद्यालय के पास राजमिस्त्री ठेकेदार के साथ दबंगों द्वारा मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि दबंगों ने ठेकेदार के साथ मारपीट की और उसके सिर में चोट पहुंचाई, जिससे वह घायल हो गया। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घटना के बाद पीड़ित ने उरई कोतवाली पुलिस को तहरीर सौंपकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। घटना के पीछे क्या वजह रही और मारपीट में कौन-कौन लोग शामिल थे, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा। सवाल यह है कि आखिर खुलेआम मारपीट करने वाले दबंगों पर पुलिस कब शिकंजा कसेगी? #BreakingNews #Jalaun #Urai #UraiNews #JalaunNews #CrimeNews #UPNews #UttarPradesh #UraiKotwali #Police #Crime #BreakingJalaun #JalaunPolice #मारपीट #दबंगई #उरई #जालौन #क्राइम #पुलिस #कानूनव्यवस्था #कोंचरोड #विधिमहाविद्यालय #राजमिस्त्री #ठेकेदार #घटना #तहरीर #कार्रवाई #दबंग #ViralNews #LatestNews

Kalpi, Jalaun | Aug 1, 2026

उरई तहसील की सरकारी गाड़ी ले जाने की कोशिश? 
चौकीदार ने गेट पर रोका

उरई/जालौन नवीन तहसील परिसर में शुक्रवार 31 जुलाई की शाम करीब 4 बजे सरकारी वाहन को लेकर हड़कंप मच गया।
 सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों के अनुसार, एक युवक तहसीलदार की सरकारी गाड़ी में बैठकर उसे मुख्य गेट की ओर ले गया, लेकिन चौकीदार को शक होने पर उसने गेट खोलने से इनकार कर दिया और युवक को रोक लिया गया।

वायरल जानकारी में युवक का नाम राजा बाबू पासवान बताया जा रहा है। 
दावा है कि वाहन में चाबी लगी थी और चालक किसी काम से गया था।
 घटना के बाद पुलिस को सूचना दिए जाने की बात सामने आई है।

 बड़े सवाल

सरकारी गाड़ी में चाबी क्यों छोड़ी गई? 
युवक वाहन तक पहुंचा कैसे? CCTV में क्या सामने आएगा? अगर चौकीदार समय पर नहीं रोकता तो क्या वाहन परिसर से बाहर चला जाता?

 नोट: यह खबर वायरल वीडियो, तस्वीरों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर है। 
खबर तैयार होने तक तहसीलदार, पुलिस या किसी अन्य अधिकारी का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। 
चोरी के प्रयास की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

आपकी क्या राय है?
 कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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उरई तहसील की सरकारी गाड़ी ले जाने की कोशिश? चौकीदार ने गेट पर रोका उरई/जालौन नवीन तहसील परिसर में शुक्रवार 31 जुलाई की शाम करीब 4 बजे सरकारी वाहन को लेकर हड़कंप मच गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों के अनुसार, एक युवक तहसीलदार की सरकारी गाड़ी में बैठकर उसे मुख्य गेट की ओर ले गया, लेकिन चौकीदार को शक होने पर उसने गेट खोलने से इनकार कर दिया और युवक को रोक लिया गया। वायरल जानकारी में युवक का नाम राजा बाबू पासवान बताया जा रहा है। दावा है कि वाहन में चाबी लगी थी और चालक किसी काम से गया था। घटना के बाद पुलिस को सूचना दिए जाने की बात सामने आई है। बड़े सवाल सरकारी गाड़ी में चाबी क्यों छोड़ी गई? युवक वाहन तक पहुंचा कैसे? CCTV में क्या सामने आएगा? अगर चौकीदार समय पर नहीं रोकता तो क्या वाहन परिसर से बाहर चला जाता? नोट: यह खबर वायरल वीडियो, तस्वीरों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर है। खबर तैयार होने तक तहसीलदार, पुलिस या किसी अन्य अधिकारी का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। चोरी के प्रयास की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। #उरई #जालौन #उरईन्यूज #जालौनन्यूज #BreakingNews #ViralNews #ViralVideo #सरकारीगाड़ी #तहसीलदार #तहसील #चौकीदार #वाहनचोरी #चोरीकाप्रयास #UPNews #UPPolice #CrimeNews #UraiNews #JalaunNews #उरईब्रेकिंग #जालौनब्रेकिंग #बड़ीखबर #ताजाखबर #उत्तरप्रदेश #NewsAlert

Kalpi, Jalaun | Jul 31, 2026