पित्तूवाला पॉलिटेक्निक नकल प्रकरण: क्या सख्त नकल विरोधी कानून की होगी निष्पक्ष परीक्षा?
देहरादून। उत्तराखंड में लागू सख्त नकल विरोधी कानून को लेकर सरकार लगातार अपनी प्रतिबद्धता जताती रही है। बड़े-बड़े मंचों से यह दावा किया गया कि प्रदेश में नकल माफिया और परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। लेकिन हाल ही में सामने आया पित्तूवाला पॉलिटेक्निक का कथित नकल प्रकरण अब इसी कानून की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता दिखाई दे रहा है।
बताया जा रहा है कि परीक्षा के दौरान एक शिक्षक ने एक छात्र को कथित रूप से नकल करने से रोका। आरोप है कि इसके बाद छात्र के दरोगा पिता ने मौके पर पहुंचकर शिक्षक के साथ मारपीट कर दी। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें छात्र के नकल करने और उसके पक्ष में हंगामा होने के दावे किए जा रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि छात्र वास्तव में नकल कर रहा था, तो क्या उसके खिलाफ भी उत्तराखंड के सख्त नकल विरोधी कानून के अंतर्गत कार्रवाई होगी? साथ ही, यदि किसी ने नकल रोकने वाले शिक्षक के साथ मारपीट कर परीक्षा प्रक्रिया में बाधा पहुंचाई है, तो क्या उस पर भी संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा?
यह मामला केवल एक छात्र या एक शिक्षक का नहीं, बल्कि उस कानून की विश्वसनीयता का है जिसका उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है। यदि कानून केवल पेपर लीक या संगठित गिरोहों तक सीमित रह जाता है और परीक्षा केंद्रों पर होने वाली कथित नकल व उसके समर्थन में हिंसा पर लागू नहीं होता, तो इसकी प्रभावशीलता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
अब निगाहें प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर टिकी हैं। क्या सरकार इस मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर छात्र सहित संबंधित सभी आरोपित व्यक्तियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई करेगी, या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
साथ ही, पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ आंदोलन करने वाले युवा संगठनों के सामने भी यह प्रश्न खड़ा हो गया है कि क्या वे परीक्षा कक्ष में कथित नकल और उसे संरक्षण देने वालों के विरुद्ध भी समान रूप से सख्त कार्रवाई की मांग उठाएंगे।
फिलहाल, यह पूरा प्रकरण उत्तराखंड के सख्त नकल विरोधी कानून की वास्तविक परीक्षा बनता नजर आ रहा है। अब देखना यह होगा कि कानून का अनुपालन व्यक्ति के प्रभाव से ऊपर उठकर किया जाता है या नहीं।
Dehradun, Dehradun | Jun 7, 2026