गया सेंट्रल जेल में रक्षाबंधन की अनोखी तस्वीर: भाइयों की कलाई सूनी, बहनों की आंखें नम… राखी-मिठाई लेकर पहुंचीं, लेकिन बांध नहीं सकीं राखी
गया। भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन शुक्रवार को गया सेंट्रल जेल में भी भावुक माहौल के बीच मनाया गया। सुबह होते ही बड़ी संख्या में बहनें अपने बंदी भाइयों के लिए हाथों में राखी और मिठाई का डिब्बा लेकर सेंट्रल जेल पहुंचने लगीं। किसी के चेहरे पर भाई से मिलने की खुशी थी तो किसी की आंखों में भाई की कलाई पर राखी नहीं बांध पाने का मलाल। इस बार जेल प्रशासन की व्यवस्था में बदलाव के कारण बहनों को अपने भाइयों की कलाई पर सीधे राखी बांधने की अनुमति नहीं दी गई। बहनों द्वारा लाई गई राखी और मिठाई जेल प्रशासन ने जमा लेकर संबंधित बंदियों तक पहुंचाने की व्यवस्था की। रक्षाबंधन के मौके पर गया शहर में सुबह से ही इस त्योहार की रौनक देखने को मिली। बस अड्डे से लेकर रेलवे स्टेशन और सेंट्रल जेल की ओर जाने वाली सड़कों पर कई महिलाएं हाथों में राखी और मिठाई का डिब्बा लेकर जाती दिखाई दीं। इनमें ऐसी भी बहनें थीं, जिनके भाई पिछले कुछ दिनों या महीनों से जेल में बंद हैं। उनके लिए रक्षाबंधन का यह दिन बाकी लोगों से बिल्कुल अलग था। भाई सामने था, लेकिन उसकी कलाई पर बहन अपने हाथों से राखी नहीं बांध सकती थी।
पिछले साल बांधी थी राखी, इस बार बदली व्यवस्था
बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष गया सेंट्रल जेल में रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों को अपने बंदी भाइयों की कलाई पर सीधे राखी बांधने की अनुमति दी गई थी। बहनें जेल के अंदर जाकर अपने भाइयों को राखी बांध सकी थीं। लेकिन इस बार जेल प्रशासन की ओर से व्यवस्था में बदलाव किया गया है। बहनों को जेल के अंदर जाकर राखी बांधने की अनुमति नहीं दी गई। जेल प्रशासन ने बहनों से राखी और मिठाई लेकर उसे संबंधित बंदियों तक पहुंचाने की व्यवस्था की। ऐसे में बहनों ने जेल के बाहर से ही अपने भाइयों के लिए प्यार और आशीर्वाद भेजा। कई महिलाओं ने कहा कि राखी उनके हाथ से भाई की कलाई तक नहीं पहुंच पाई, लेकिन उनकी भावनाएं जरूर उनके भाई तक पहुंचेंगी।
बहनों के लिए जेल प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम
रक्षाबंधन को लेकर गया सेंट्रल जेल प्रशासन ने भीड़ और महिलाओं की सुविधा को देखते हुए विशेष इंतजाम किए थे। जेल परिसर में महिलाओं के बैठने के लिए कुर्सियों की व्यवस्था की गई थी। गर्मी को देखते हुए ठंडे पानी का इंतजाम भी किया गया। इसके साथ ही किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल टीम को भी तैनात रखा गया था। जेल की सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही। जेल परिसर में आने वाले वाहनों की सुरक्षा जांच की गई। इसके बाद ही उन्हें आगे जाने की अनुमति दी गई। सीनियर जेल सुपरिंटेंडेंट खुद पूरी व्यवस्था की निगरानी कर रहे थे, ताकि रक्षाबंधन के मौके पर जेल पहुंचने वाली महिलाओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
15 दिन से जेल में बंद भाई के लिए राखी लेकर पहुंचीं गीता देवी
अपने भाई को राखी बांधने सेंट्रल जेल पहुंचीं गीता देवी ने भावुक होकर बताया कि उनका भाई करीब 15 दिनों से जेल में बंद है। वह अपने भाई के लिए राखी और मिठाई लेकर जेल पहुंची थीं। उन्हें उम्मीद थी कि वह भाई की कलाई पर अपने हाथों से राखी बांधेंगी, लेकिन जेल प्रशासन ने इस बार इसकी अनुमति नहीं दी।
गीता देवी ने बताया कि जेल प्रशासन ने उनकी राखी और मिठाई जमा कर ली है और कहा है कि इसे उनके भाई तक पहुंचा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाई की कलाई पर खुद राखी बांधने से जो सुकून मिलता, वह इस बार नहीं मिल पाया। हालांकि, उन्हें इस बात की उम्मीद है कि उनकी राखी और मिठाई उनके भाई तक जरूर पहुंचेगी।
‘भाई को झूठा फंसाया गया, जल्द बाहर आए’
बेला थाना क्षेत्र की रहने वाली कांति देवी भी अपने भाई के लिए राखी लेकर सेंट्रल जेल पहुंचीं। वह काफी भावुक नजर आईं। कांति देवी ने बताया कि उनका भाई करीब एक महीने से जेल में बंद है। उनका आरोप है कि उनके भाई को झूठा फंसाया गया है।
उन्होंने कहा कि वह भाई की कलाई पर राखी बांधने की उम्मीद लेकर जेल आई थीं, लेकिन यहां राखी बांधने की अनुमति नहीं दी गई। हालांकि, जेल प्रशासन ने राखी और मिठाई ले ली और कहा कि इसे उनके भाई तक पहुंचा दिया जाएगा।
कांति देवी ने भावुक होकर कहा कि वह भगवान से प्रार्थना करती हैं कि उनका भाई जल्द जेल से बाहर आए। वह चाहती हैं कि अगले साल रक्षाबंधन पर वह अपने भाई की कलाई पर खुद राखी बांधें और उस पल को खुशी के साथ मनाएं।
20 दिन से बंद भाई के लिए प्रभादेवी लेकर पहुंचीं राखी
वजीरगंज थाना क्षेत्र की रहने वाली प्रभादेवी भी अपने भाई को राखी बांधने सेंट्रल जेल पहुंचीं। उन्होंने बताया कि उनका भाई करीब 20 दिनों से जेल में बंद है। भाई के जेल में होने से वह काफी दुखी हैं। प्रभादेवी ने कहा कि वह भाई की कलाई पर अपने हाथों से राखी तो नहीं बांध सकीं, लेकिन उसके लिए राखी और मिठाई जेल प्रशासन को सौंप दी है। उन्हें भरोसा है कि उनकी राखी उनके भाई तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कामना की कि उनका भाई जल्द जेल से बाहर आए और अगले साल वह उसके हाथ पर खुद राखी बांध सकें।
राखी की डोर जेल की दीवारों से नहीं रुकी
गया सेंट्रल जेल में इस बार रक्षाबंधन की तस्वीर कुछ अलग रही। जेल की ऊंची दीवारों के बाहर खड़ी बहनों के हाथ में राखी थी, मिठाई थी और दिल में अपने भाइयों के लिए दुआ। वे भाई की कलाई पर राखी तो नहीं बांध सकीं, लेकिन उनके प्रेम और भावनाओं को जेल प्रशासन ने बंदियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाई।
रक्षाबंधन का पर्व केवल राखी बांधने की रस्म नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक है। गया सेंट्रल जेल के बाहर पहुंचीं इन बहनों के लिए इस बार त्योहार अधूरा जरूर रहा, लेकिन उनके चेहरे पर एक उम्मीद थी—अगले रक्षाबंधन तक भाई जेल से बाहर हो और फिर बहन अपने हाथों से उसकी कलाई पर राखी बांधे।
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Gaya Town CD Block, Gaya | Aug 28, 2026