📜 भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण की दिशा में औरंगाबाद की ऐतिहासिक उपलब्धि!
🏛️ "ज्ञान भारतम् मिशन" के अंतर्गत औरंगाबाद जिले ने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इस अवसर पर समाहरणालय स्थित योजना भवन के सभा कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी श्रीमती अभिलाषा शर्मा (भा.प्र.से.) ने मिशन के सफल क्रियान्वयन में उत्कृष्ट योगदान देने वाले पदाधिकारियों एवं दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षकों को मोमेंटो एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया।
🇮🇳 संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार तथा कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार के संयुक्त प्रयास से संचालित "ज्ञान भारतम् मिशन" का उद्देश्य भारत की हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान परंपरा, ऐतिहासिक अभिलेखों, धार्मिक एवं सांस्कृतिक ग्रंथों तथा दुर्लभ पांडुलिपियों को संरक्षित कर उन्हें डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित रखना है, ताकि भविष्य की पीढ़ियां भी इस अमूल्य धरोहर से लाभान्वित हो सकें।
डिजिटाइजेशन के माध्यम से इन पांडुलिपियों के अध्ययन, शोध, अनुवाद एवं राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान के आदान-प्रदान को भी नई गति मिलेगी।
📚 15 मार्च 2026 से 15 जून 2026 तक चलाए गए विशेष अभियान के दौरान औरंगाबाद जिले में 26,158 दुर्लभ हस्तलिखित दस्तावेजों एवं पांडुलिपियों का सफलतापूर्वक डिजिटाइजेशन किया गया। इनमें कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र, कपड़ा, धातु सहित विभिन्न पारंपरिक माध्यमों पर लिखी गई 75 वर्ष अथवा उससे अधिक पुरानी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व की पांडुलिपियां शामिल हैं।
🏅 इस उत्कृष्ट कार्य के फलस्वरूप औरंगाबाद जिला राज्यस्तरीय सर्वेक्षण में छठे स्थान पर रहा, जो जिले की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति जिला प्रशासन, संबंधित विभागों एवं समाज के सामूहिक प्रयासों का प्रमाण है।
👏 जिला पदाधिकारी ने इस उपलब्धि को टीमवर्क, जनसहभागिता एवं पांडुलिपि संरक्षकों के अमूल्य सहयोग का परिणाम बताते हुए कहा कि हमारी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का अनमोल स्रोत है। इन धरोहरों का संरक्षण हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
🌟 कार्यक्रम में जिला पंचायती राज पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी दाउदनगर, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सहित मिशन से जुड़े पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही अमझर शरीफ, दाउदनगर, ओबरा एवं मदनपुर क्षेत्र के उन प्रतिष्ठित पांडुलिपि संरक्षकों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपनी दुर्लभ एवं ऐतिहासिक पांडुलिपियां उपलब्ध कराकर इस राष्ट्रीय अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
✨ औरंगाबाद का यह प्रयास केवल दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान, ऐतिहासिक चेतना और ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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Art, Culture and Youth Department, Government of Bihar CMO Bihar Information & Public Relations Department, Government of Bihar
59 views | Aurangabad, Bihar | Jul 13, 2026