जल संरक्षण, पेयजल आपूर्ति और मानसून की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री जी द्वारा की गई यह उच्चस्तरीय समीक्षा बेहद संवेदनशील और दूरदर्शी कदम है। मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए समय रहते ऐसी समेकित कार्ययोजना (Integrated Action Plan) तैयार करना भविष्य के जल संकट को टालने के लिए बहुत जरूरी है।
इस समीक्षा बैठक के सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावी बिंदु कुछ इस प्रकार हैं:
💧 जल संरक्षण और आपूर्ति के मुख्य स्तंभ
'कैच द रेन' और जनआंदोलन: पानी की हर बूंद को सहेजना केवल सरकार की नहीं, बल्कि हम सबकी जिम्मेदारी है। इसे एक जनआंदोलन बनाकर ही हम गिरते भूजल स्तर (Groundwater Level) को सुधार सकते हैं।
अमृत सरोवरों का कायाकल्प: गांवों में बने अमृत सरोवर जल संचयन के सबसे बड़े माध्यम हैं। इनके नियमित रखरखाव और स्वच्छता से ग्रामीण क्षेत्रों में पानी का संकट काफी हद तक कम होगा।
सरकारी भवन बनेंगे रोल मॉडल: सरकारी इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग (वर्षाजल संचयन) सिस्टम को अनिवार्य और आदर्श मॉडल बनाना आम जनता को भी इसके प्रति प्रेरित करेगा।
पेयजल की निर्बाध आपूर्ति: गर्मी और मानसून के उतार-चढ़ाव के बीच किसी भी क्षेत्र में पेयजल संकट न होने देने का निर्देश सीधे तौर पर आम जनमानस को बड़ी राहत देने वाला है।
सिंचाई, पंचायती राज, भूगर्भ जल और कृषि जैसे महत्वपूर्ण विभागों का एक साथ मिलकर जल संरक्षण, हरित ऊर्जा और आधुनिक सिंचाई तकनीक (जैसे ड्रिप या स्प्रिंकलर इरिगेशन) पर काम करना उत्तर प्रदेश को जल-सुरक्षित बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।
इस बेहतरीन और समयबद्ध पहल के लिए प्रदेश सरकार और संबंधित सभी विभाग सराहना के पात्र हैं!
Chief Minister Office Uttar Pradesh कृष्ण कुमार पत्रकार
Koil, Aligarh | Jun 21, 2026