उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पारा चढ़ने लगा है... इस बार विवाद के केंद्र में हैं भगवान श्रीकृष्ण और कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री। लखनऊ में समाजवादी पार्टी के दफ्तर के बाहर लगे पोस्टरों ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। एक पोस्टर में धीरेंद्र शास्त्री की तस्वीर पर क्रॉस का निशान लगाया गया है, तो दूसरी होर्डिंग पर अखिलेश यादव के साथ बांसुरी बजाते भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर है। इसके साथ लिखा है— '27 में कृष्ण आएंगे'।
बताया जा रहा है कि ये पोस्टर सपा नेता अब्दुल अजीम मंसूरी की ओर से लगवाए गए हैं। पोस्टर में धीरेंद्र शास्त्री पर निशाना साधते हुए लिखा गया है— 'न प्रभु राम तुम्हारे हैं, न श्रीकृष्ण हमारे हैं... राम-कृष्ण तो इस संसार के प्यारे हैं। जो इनमें भेद बताए, वो कथावाचक नहीं, ढोंगी-पाखंडी व्यापारी है।'
दरअसल, पूरा विवाद 29 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में आयोजित रामकथा के दौरान शुरू हुआ। यहां बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान राम और श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना करते हुए कहा था कि भगवान राम सीधे खड़े होते हैं, जबकि भगवान कृष्ण तीन जगह से झुके हुए दिखाई देते हैं। उन्होंने बांसुरी बजाने को आसान और धनुष चलाने को कठिन बताया था।
इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद ब्रज क्षेत्र के संतों सहित कई लोगों ने आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने पर धीरेंद्र शास्त्री ने सफाई देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण उनके भी आराध्य हैं और उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था।
वहीं, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस टिप्पणी पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इससे यदुवंशियों और रघुवंशियों, दोनों की भावनाएं आहत हुई हैं। अखिलेश ने कहा कि ऐसे लोगों को न ब्रज में प्रवेश मिलना चाहिए और न अवध में। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के आगामी कार्यक्रम बंद करने की बात कही। साथ ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए उनके आश्रम पर बुलडोजर चलाने जैसी टिप्पणी भी की।
इतना ही नहीं, सपा कार्यकर्ताओं ने इस मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई है। मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के प्रदेश सचिव प्रवेश यादव ने लखनऊ के हजरतगंज थाने में शिकायत देकर धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
अब इस पूरे विवाद ने धार्मिक टिप्पणी से आगे बढ़कर सियासी रंग ले लिया है। एक तरफ धीरेंद्र शास्त्री की सफाई है, तो दूसरी तरफ सपा के पोस्टर और अखिलेश यादव के तीखे बयान। ऐसे में सवाल यही है कि 2027 के चुनाव से पहले भगवान राम और श्रीकृष्ण के नाम पर शुरू हुई यह सियासत आगे क्या मोड़ लेगी?
#UPPolitics #UPElection2027 #AkhileshYadav #DhirendraKrishnaShastri #BageshwarDham #JaiShriKrishna #BhagwanShriRam #KrishnaVsRam #SamajwadiParty #PoliticalNews
Hardwar, Haridwar | Nov 8, 2026