जगाधरी, हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया जिसके दौरान परम पूजनीय दिव्य गुरु आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री सरस्वती भारती जी ने भक्ति मार्ग से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सूत्रों को उद्घाटित करते हुए कहा कि गुरु ही भगवान का स्वरूप हैं जो काक प्रवृत्ति के व्यक्ति को भी हंस बना देते हैं। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। शास्त्रों में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वर की उपमा दी गई जो उनके परमेश्वर स्वरूप को उद्घाटित करती है। गुरु केवल ज्ञान देने वाले शिक्षक नहीं होते अपितु वे मानव के भीतर छिपी दिव्यता को जागृत करने वाले मार्गदर्शक होते हैं। काक तथा हंस भारतीय दर्शन में प्रतीकात्मक रूप से दो अलग-अलग प्रवृत्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। काक प्रवृत्ति अशांत मन, स्वार्थ, चंचलता, बाहरी आकर्षण और दोष-दर्शन का प्रतीक है, जबकि हंस विवेक, पवित्रता, सत्य, ज्ञान और सार ग्रहण करने की क्षमता का प्रतीक माना गया है। हंस के बारे में कहा जाता है कि वह नीर-क्षीर विवेक रखता है, अर्थात् वह सार और असार में भेद कर सकता है। सद्गुरु की कृपा और सान्निध्य में साधारण व्यक्ति भी अपने भीतर छिपे दिव्य गुणों को पहचानने लगता है। गुरु अपने तप, त्याग की दिव्य ऊर्जा से शिष्य की चेतना को सदैव पोषित करते हैं और उसके जीवन में ऐसा सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं कि उसकी सोच, दृष्टि, व्यवहार और जीवन का उद्देश्य ही बदल जाता है। यही कारण है कि गुरु को भगवान का साक्षात स्वरूप कहा गया है। गुरु शिष्य के भीतर छिपे अज्ञान, भय, अहंकार, क्रोध, लोभ और मोह के अंधकार को दूर कर आत्मज्ञान का प्रकाश प्रज्वलित करते हैं। उनके मार्गदर्शन से व्यक्ति केवल सांसारिक सफलता ही नहीं अपितु आत्मिक शांति, संतुलन और जीवन के वास्तविक उद्देश्य की भी प्राप्ति करता है। आज के समय में जब भौतिक उपलब्धियों की दौड़ में मानव मानसिक तनाव, भ्रम और असंतोष से घिरा हुआ है तब सद्गुरु का मार्गदर्शन पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है। गुरु हमें बाहरी संसार से अधिक अपने अंतर्मन की यात्रा करना सिखाते हैं। वे बताते हैं कि वास्तविक परिवर्तन बाहर नहीं, भीतर से प्रारंभ होता है। इसलिए यह कहना पूर्णतः सार्थक है कि एक पूर्ण ब्रह्मनिष्ठ गुरु के बिना मानव जीवन अधूरा है। गुरु की कृपा से साधारण मनुष्य भी विवेकवान, करुणामय, चरित्रवान और समाज के लिए प्रेरणा बनने वाला व्यक्तित्व प्राप्त कर सकता है। यही गुरु-शिष्य परंपरा की सबसे बड़ी महिमा है और यही सम्पूर्ण मानव जाति के लिए भारतीय संस्कृति का अमूल्य संदेश भी है। सुंदर भावपूर्ण भजनों एवं विश्व शांति की प्रार्थना हेतु ध्यान साधना के साथ सत्संग कार्यक्रम का समापन किया गया।
Ambala, Ambala | Jul 12, 2026