70 से अधिक अनियमित कॉलोनियां होंगी नियमित, विकास कार्यों का खुलेगा रास्ता
1996 की अधिसूचना में हुई त्रुटि सुधरेगी, संपत्ति रिकॉर्ड एनडीसी पोर्टल से होंगे एकीकृत
मंत्रिमंडल की बैठक में कॉलोनियों को नियमित करने की मिली मंजूरी, पार्षदों व शहरवासियों ने मेयर का किया धन्यवाद
यमुनानगर। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में यमुनानगर एवं जगाधरी क्षेत्र की वर्ष 1996 के सर्वेक्षण के दौरान अनियमित रह गई 70 से अधिक कॉलोनियों को नियमित करने की मंजूरी प्रदान की गई है। उस समय जारी अधिसूचना में तकनीकी त्रुटि के कारण कॉलोनियों के बजाय उनमें बने भवनों को नियमित कर दिया गया था, जिससे कॉलोनियां अनियमित बनी रहीं। अब कॉलोनियों को नियमित करने की मंजूरी मिलने से इन क्षेत्रों में विकास कार्यों का मार्ग प्रशस्त होगा।
कॉलोनियों के नियमित होने की मंजूरी मिलने पर कुछ पार्षदों व शहरवासियों ने मेयर सुमन बहमनी से मुलाकात कर उनका आभार व्यक्त किया। दरअसल, इस मामले का संज्ञान मिलने पर मेयर सुमन बहमनी ने इस प्रस्ताव को नगर निगम सदन की बैठक में प्रमुखता से उठाया था। साथ ही उन्होंने विधायक घनश्याम दास अरोड़ा, शहरी स्थानीय निकाय मंत्री तथा संबंधित अधिकारियों से भी इस संबंध में बातचीत की थी। सोमवार को हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में यह मुद्दा उठाया गया, जिसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रोफेसर कॉलोनी पार्ट-2, छोटा मॉडल टाउन, लाल द्वारा रोड सहित 70 से अधिक कॉलोनियों को नियमित करने का निर्णय लिया। इन कॉलोनियों के अनियमित होने के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे। स्पष्ट सीमांकन न होने से प्रॉपर्टी आईडी को एनडीसी पोर्टल से नहीं जोड़ा जा सका था, जिससे भवन नक्शों की स्वीकृति तथा संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में भी कठिनाइयां आ रही थीं।
इन समस्याओं के समाधान के लिए कैबिनेट ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक को नगर निगम यमुनानगर में एक समिति गठित करने के निर्देश जारी करने की मंजूरी दी है। समिति की अध्यक्षता नगर निगम आयुक्त करेंगे। इसमें मुख्य नगर योजनाकार अथवा जिला नगर योजनाकार, मुख्य अभियंता अथवा अधीक्षक अभियंता, अतिरिक्त नगर आयुक्त, कार्यकारी अधिकारी, मेयर द्वारा नामित सदस्य, कार्यकारी अभियंता, राजस्व अधिकारी तथा क्षेत्रीय कराधान अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल होंगे। यह समिति उन कॉलोनियों की पहचान करेगी, जहां 26 सितंबर 2013 से पहले धारा 203-ए के तहत भवनों को नियमित किया गया था और जिनकी अधिसूचना राजपत्र या सरकारी आदेशों के माध्यम से जारी की गई थी। ऐसी कॉलोनियों के लिए न तो खसरा नंबरों का विवरण उपलब्ध है और न ही स्वीकृत लेआउट प्लान। समिति इन कॉलोनियों की बाहरी सीमाएं निर्धारित कर प्रस्ताव तैयार करेगी, जिससे संपत्ति रिकॉर्ड को एनडीसी पोर्टल से जोड़ा जा सकेगा और सुनियोजित विकास सुनिश्चित होगा।
कैबिनेट ने विकास शुल्क (डेवलपमेंट चार्ज) के भुगतान संबंधी प्रावधानों को भी मंजूरी दी है। जिन संपत्ति मालिकों ने वर्ष 1996 में कॉलोनी की अधिसूचना की तिथि या उससे पहले भवन निर्माण कराया था, लेकिन विकास शुल्क जमा नहीं कराया था, उन्हें उस समय लागू शुल्क का भुगतान करना होगा। वहीं, जिन्होंने पहले ही विकास शुल्क जमा कर दिया है, उन्हें शुल्क छूट प्राप्त करने के लिए भुगतान संबंधी प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।
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कॉलोनियां नियमित होने की मंजूरी मिलने पर मेयर सुमन बहमनी का धन्यवाद करते पार्षद व शहरवासी।