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रायगढ़ में स्वास्थ्य और पर्यटन अधोसंरचना को मिलेगी नई गति, वित्त मंत्री श्री ओ.पी.चौधरी ने विभिन्न विकास कार्यों का किया निरीक्षण विजयपुर में 16 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा आधुनिक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, ड्राइंग-डिजाइन में आवश्यक संशोधन कर शीघ्र अंतिम स्वीकृति के लिए भेजने के निर्देश खर्रा घाट में 30 करोड़ की लागत से विकसित होगा मैरीन ड्राइव, पुराने जेल परिसर में व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स निर्माण की कार्ययोजना का भी किया अवलोकन प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी ने जिले में प्रस्तावित विभिन्न विकास कार्यों का स्थल निरीक्षण कर अधिकारियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने विजयपुर में प्रस्तावित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, जीवनदायिनी केलो नदी के खर्रा घाट में विकसित किए जा रहे मैरीन ड्राइव तथा जेल परिसर स्थित पुराने भवन के स्थान पर प्रस्तावित व्यवसायिक परिसर निर्माण की कार्ययोजना का अवलोकन किया। वित्त मंत्री श्री चौधरी ने विजयपुर में लगभग 16 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के लिए चिन्हित स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को सेंटर की ड्राइंग एवं डिजाइन में आवश्यक संशोधन करते हुए इसे अधिक उपयोगी एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी आवश्यक सुधारों के बाद प्रस्ताव को शीघ्र अंतिम स्वीकृति के लिए विभाग को भेजा जाए, ताकि निर्माण कार्य जल्द प्रारंभ हो सके। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के पूर्ण होने से रायगढ़ जिले में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होगा और नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सेवाओं का लाभ मिलेगा। निरीक्षण के दौरान वित्त मंत्री ने केलो नदी के खर्रा घाट में लगभग 30 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किए जा रहे मैरीन ड्राइव का भी अवलोकन किया। लगभग दो किलोमीटर लंबाई में आकार ले रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना का कार्यादेश जारी हो चुका है। उन्होंने अधिकारियों को कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश देते हुए कहा कि मैरीन ड्राइव रायगढ़ की पहचान बनने वाली परियोजना है। इसके माध्यम से न केवल खर्रा घाट का सौंदर्यीकरण होगा, बल्कि नागरिकों को मनोरंजन एवं पर्यटन की बेहतर सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। परियोजना के अंतर्गत घाट का विकास, गजीबो, आरसीसी पाथवे, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था, प्रोमेनेड, फूड कोर्ट, बाह्य विद्युतीकरण सहित अन्य आवश्यक अधोसंरचनात्मक कार्य किए जाएंगे।

9 views | Raigarh, Chhattisgarh | Jul 8, 2026

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मोटू पतलु रायगढ़ घूमने आए लेकिन बिचारे बीच शहर में फंस गए

मोटू पतलु रायगढ़ घूमने आए लेकिन बिचारे बीच शहर में फंस गए

Raigarh, Raigarh | Jul 8, 2026

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रनिष्ठा, त्याग और संकल्प का प्रेरक उदाहरण: वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी

राष्ट्रनिर्माण के लिए युवाओं को लक्ष्य, अनुशासन और सकारात्मक सोच अपनानी होगीः श्री चौधरी

वित्त मंत्री ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय में आयोजित व्याख्यान में युवाओं से किया संवाद

करियर, प्रतियोगी परीक्षाओं, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास पर साझा किए प्रेरक विचार

देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रखर पुरोधा, प्रखर शिक्षाविद्  डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय में व्याख्यान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने भारत माता एवं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया तथा उनके राष्ट्रनिर्माण में योगदान को नमन किया।
 वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रभक्ति, त्याग, शिक्षा, सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा और अदम्य साहस का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने व्यक्तिगत हितों से ऊपर राष्ट्रहित को सर्वोच्च स्थान दिया और भारतीय लोकतंत्र तथा राष्ट्रीय एकता को नई दिशा प्रदान की। उनका जीवन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है। इस अवसर पर उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के राष्ट्र के प्रति योगदान का भी स्मरण किया।

सकारात्मक सोच, स्पष्ट लक्ष्य और अनुशासन ही सफलता की कुंजी

युवाओं को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि स्पष्ट लक्ष्य, अनुशासन, निरंतर परिश्रम और सकारात्मक सोच से प्राप्त होती है। व्यक्ति जैसा सोचता है, वैसा ही बनता है। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्णय से पहले उसके परिणामों पर विचार करना चाहिए तथा अपने निर्णयों की जिम्मेदारी स्वयं स्वीकार करनी चाहिए। असफलताओं के लिए दूसरों को दोष देने के बजाय आत्ममंथन और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति अपनानी चाहिए। उन्होंने युवाओं से आधुनिकता के साथ अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं पर गर्व करने का भी आह्वान किया।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रनिष्ठा, त्याग और संकल्प का प्रेरक उदाहरण: वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी राष्ट्रनिर्माण के लिए युवाओं को लक्ष्य, अनुशासन और सकारात्मक सोच अपनानी होगीः श्री चौधरी वित्त मंत्री ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय में आयोजित व्याख्यान में युवाओं से किया संवाद करियर, प्रतियोगी परीक्षाओं, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास पर साझा किए प्रेरक विचार देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रखर पुरोधा, प्रखर शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय में व्याख्यान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने भारत माता एवं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया तथा उनके राष्ट्रनिर्माण में योगदान को नमन किया। वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रभक्ति, त्याग, शिक्षा, सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा और अदम्य साहस का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने व्यक्तिगत हितों से ऊपर राष्ट्रहित को सर्वोच्च स्थान दिया और भारतीय लोकतंत्र तथा राष्ट्रीय एकता को नई दिशा प्रदान की। उनका जीवन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है। इस अवसर पर उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के राष्ट्र के प्रति योगदान का भी स्मरण किया। सकारात्मक सोच, स्पष्ट लक्ष्य और अनुशासन ही सफलता की कुंजी युवाओं को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि स्पष्ट लक्ष्य, अनुशासन, निरंतर परिश्रम और सकारात्मक सोच से प्राप्त होती है। व्यक्ति जैसा सोचता है, वैसा ही बनता है। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्णय से पहले उसके परिणामों पर विचार करना चाहिए तथा अपने निर्णयों की जिम्मेदारी स्वयं स्वीकार करनी चाहिए। असफलताओं के लिए दूसरों को दोष देने के बजाय आत्ममंथन और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति अपनानी चाहिए। उन्होंने युवाओं से आधुनिकता के साथ अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं पर गर्व करने का भी आह्वान किया।

Raigarh, Chhattisgarh | Jul 8, 2026

कृत्रिम पैर ने लौटाई जिंदगी की रफ्तार, जिला प्रशासन की संवेदनशील पहल से बबीता के जीवन में लौटी नई उम्मीद

वित्त मंत्री श्री ओ.पी.चौधरी और कलेक्टर के संवेदनशील निर्णय से मिली दो लाख रुपए की सहायता, तत्काल लगवाया गया कृत्रिम पैर

अब आत्मविश्वास के साथ सामान्य जीवन जी रही हैं बबीता, शासन-प्रशासन के प्रति जताया आभार

कभी जीवन से निराश हो चुकीं 27 वर्षीय बबीता यादव के जीवन में अब फिर से उम्मीद, आत्मविश्वास और मुस्कान लौट आई है। जिला प्रशासन की संवेदनशील पहल और त्वरित सहयोग ने उन्हें न केवल कृत्रिम पैर उपलब्ध कराया, बल्कि फिर से सामान्य जीवन जीने का संबल भी दिया। आज बबीता आत्मनिर्भर होकर पहले की तरह अपने दैनिक कार्य कर रही हैं और अपने जीवन को नए उत्साह के साथ आगे बढ़ा रही हैं।
 रायगढ़ जिले के ग्राम मुरालपाली निवासी बबीता यादव के साथ पिछले वर्ष एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई थी। घटना के बाद उनके बाएं पैर में गंभीर संक्रमण हो गया, जो धीरे-धीरे हड्डियों तक पहुंच गया। चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद संक्रमण को नियंत्रित करना संभव नहीं हो सका और अंततः 27 जनवरी 2025 को उनका बायां पैर काटना पड़ा। इस घटना ने उनके सामने शारीरिक, मानसिक और सामाजिक चुनौतियों का पहाड़ खड़ा कर दिया। अचानक आए इस बदलाव से उनका जीवन मानो ठहर-सा गया था और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आगे सामान्य जीवन कैसे जी पाएंगी।
 विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बबीता ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी तथा कलेक्टर के समक्ष उपस्थित होकर कृत्रिम पैर लगवाने के लिए सहायता का निवेदन किया। उनकी स्थिति को गंभीरता और संवेदनशीलता से लेते हुए कलेक्टर ने सहानुभूतिपूर्वक उनके आवेदन पर तत्काल दो लाख रुपए की सहायता स्वीकृत की तथा संबंधित अधिकारियों को शीघ्र कृत्रिम पैर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
 कलेक्टर के निर्देशों के अनुरूप रायपुर स्थित इंडो लाइट्स संस्थान से समन्वय स्थापित कर बबीता यादव के लिए आधुनिक कृत्रिम पैर लगवाया गया। कृत्रिम पैर लगने के बाद उनके जीवन में उल्लेखनीय बदलाव आया है। अब वे सहजता से चल-फिर रही हैं, अपने दैनिक कार्य स्वयं कर रही हैं और पहले की तरह सामान्य जीवन जीने लगी हैं। बबीता यादव ने भावुक होकर कहा कि कृत्रिम पैर मिलने के बाद उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है मानो उनका जीवन फिर से पटरी पर लौट आया हो। उन्होंने इस मानवीय सहयोग और संवेदनशील पहल के लिए प्रदेश के वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी तथा कलेक्टर के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए

कृत्रिम पैर ने लौटाई जिंदगी की रफ्तार, जिला प्रशासन की संवेदनशील पहल से बबीता के जीवन में लौटी नई उम्मीद वित्त मंत्री श्री ओ.पी.चौधरी और कलेक्टर के संवेदनशील निर्णय से मिली दो लाख रुपए की सहायता, तत्काल लगवाया गया कृत्रिम पैर अब आत्मविश्वास के साथ सामान्य जीवन जी रही हैं बबीता, शासन-प्रशासन के प्रति जताया आभार कभी जीवन से निराश हो चुकीं 27 वर्षीय बबीता यादव के जीवन में अब फिर से उम्मीद, आत्मविश्वास और मुस्कान लौट आई है। जिला प्रशासन की संवेदनशील पहल और त्वरित सहयोग ने उन्हें न केवल कृत्रिम पैर उपलब्ध कराया, बल्कि फिर से सामान्य जीवन जीने का संबल भी दिया। आज बबीता आत्मनिर्भर होकर पहले की तरह अपने दैनिक कार्य कर रही हैं और अपने जीवन को नए उत्साह के साथ आगे बढ़ा रही हैं। रायगढ़ जिले के ग्राम मुरालपाली निवासी बबीता यादव के साथ पिछले वर्ष एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई थी। घटना के बाद उनके बाएं पैर में गंभीर संक्रमण हो गया, जो धीरे-धीरे हड्डियों तक पहुंच गया। चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद संक्रमण को नियंत्रित करना संभव नहीं हो सका और अंततः 27 जनवरी 2025 को उनका बायां पैर काटना पड़ा। इस घटना ने उनके सामने शारीरिक, मानसिक और सामाजिक चुनौतियों का पहाड़ खड़ा कर दिया। अचानक आए इस बदलाव से उनका जीवन मानो ठहर-सा गया था और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आगे सामान्य जीवन कैसे जी पाएंगी। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बबीता ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी तथा कलेक्टर के समक्ष उपस्थित होकर कृत्रिम पैर लगवाने के लिए सहायता का निवेदन किया। उनकी स्थिति को गंभीरता और संवेदनशीलता से लेते हुए कलेक्टर ने सहानुभूतिपूर्वक उनके आवेदन पर तत्काल दो लाख रुपए की सहायता स्वीकृत की तथा संबंधित अधिकारियों को शीघ्र कृत्रिम पैर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कलेक्टर के निर्देशों के अनुरूप रायपुर स्थित इंडो लाइट्स संस्थान से समन्वय स्थापित कर बबीता यादव के लिए आधुनिक कृत्रिम पैर लगवाया गया। कृत्रिम पैर लगने के बाद उनके जीवन में उल्लेखनीय बदलाव आया है। अब वे सहजता से चल-फिर रही हैं, अपने दैनिक कार्य स्वयं कर रही हैं और पहले की तरह सामान्य जीवन जीने लगी हैं। बबीता यादव ने भावुक होकर कहा कि कृत्रिम पैर मिलने के बाद उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है मानो उनका जीवन फिर से पटरी पर लौट आया हो। उन्होंने इस मानवीय सहयोग और संवेदनशील पहल के लिए प्रदेश के वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी तथा कलेक्टर के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए

Raigarh, Chhattisgarh | Jul 8, 2026

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की पहल से बदली मासूम की जिंदगी

समय पर पहचान और निःशुल्क उपचार से दो वर्षीय देवांशु को मिली नई दृष्टि

 राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत समय पर की गई स्वास्थ्य जांच ने ग्राम बोडाझरिया के दो वर्षीय देवांशु बंजारा के जीवन में नई रोशनी भर दी। जन्मजात मोतियाबिंद से पीड़ित इस मासूम की बीमारी की समय रहते पहचान होने से उसका सफल निःशुल्क ऑपरेशन संभव हो सका और अब वह सामान्य रूप से अपने आसपास की दुनिया को देख पा रहा है। ग्राम बोडाझरिया निवासी राजीव बंजारा के पुत्र देवांशु की आंखों की जांच राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत आरबीएसके टीम-बी पुसौर द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान की गई। जांच में बच्चे की आंखों में जन्मजात मोतियाबिंद (कैटरेक्ट) की पुष्टि हुई। बीमारी की गंभीरता को देखते हुए टीम ने तत्काल रेफरल की प्रक्रिया पूरी कर विशेषज्ञ उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की।
 बीएमओ डॉ. विनोद नायक (शिशु विशेषज्ञ) एवं बीपीएम नवीन शर्मा के मार्गदर्शन में उपचार की संपूर्ण प्रक्रिया संचालित की गई। आरबीएसके टीम-बी पुसौर के टीम प्रभारी डॉ. संदीप भोई, डॉ. मंजू पटेल, कन्हैया किसान, सेवंती कुजूर तथा आशीष प्रधान ने बच्चे की पहचान, स्वास्थ्य परीक्षण, परामर्श, रेफरल एवं उपचार के प्रत्येक चरण में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद 7 जुलाई 2026 को नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मीना पटेल ने देवांशु का सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद उसकी आंखों की रोशनी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और अब वह सामान्य रूप से दैनिक गतिविधियां कर पा रहा है। मासूम के चेहरे पर लौटी मुस्कान और परिवार की खुशी इस बात का प्रमाण है कि समय पर मिला उपचार किसी बच्चे के भविष्य को सुरक्षित बना सकता है। 
  देवांशु के परिजनों ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समय पर बीमारी की पहचान नहीं होती तो बच्चे की दृष्टि पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता था। उन्होंने कहा कि निःशुल्क जांच, उपचार और चिकित्सकीय सहयोग ने उनके बच्चे को नई रोशनी और बेहतर भविष्य दिया है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत जन्मजात विकारों, बीमारियों, पोषण संबंधी समस्याओं, विकासात्मक विलंब एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रसित बच्चों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर उनका निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाता है।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की पहल से बदली मासूम की जिंदगी समय पर पहचान और निःशुल्क उपचार से दो वर्षीय देवांशु को मिली नई दृष्टि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत समय पर की गई स्वास्थ्य जांच ने ग्राम बोडाझरिया के दो वर्षीय देवांशु बंजारा के जीवन में नई रोशनी भर दी। जन्मजात मोतियाबिंद से पीड़ित इस मासूम की बीमारी की समय रहते पहचान होने से उसका सफल निःशुल्क ऑपरेशन संभव हो सका और अब वह सामान्य रूप से अपने आसपास की दुनिया को देख पा रहा है। ग्राम बोडाझरिया निवासी राजीव बंजारा के पुत्र देवांशु की आंखों की जांच राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत आरबीएसके टीम-बी पुसौर द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान की गई। जांच में बच्चे की आंखों में जन्मजात मोतियाबिंद (कैटरेक्ट) की पुष्टि हुई। बीमारी की गंभीरता को देखते हुए टीम ने तत्काल रेफरल की प्रक्रिया पूरी कर विशेषज्ञ उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की। बीएमओ डॉ. विनोद नायक (शिशु विशेषज्ञ) एवं बीपीएम नवीन शर्मा के मार्गदर्शन में उपचार की संपूर्ण प्रक्रिया संचालित की गई। आरबीएसके टीम-बी पुसौर के टीम प्रभारी डॉ. संदीप भोई, डॉ. मंजू पटेल, कन्हैया किसान, सेवंती कुजूर तथा आशीष प्रधान ने बच्चे की पहचान, स्वास्थ्य परीक्षण, परामर्श, रेफरल एवं उपचार के प्रत्येक चरण में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद 7 जुलाई 2026 को नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मीना पटेल ने देवांशु का सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद उसकी आंखों की रोशनी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और अब वह सामान्य रूप से दैनिक गतिविधियां कर पा रहा है। मासूम के चेहरे पर लौटी मुस्कान और परिवार की खुशी इस बात का प्रमाण है कि समय पर मिला उपचार किसी बच्चे के भविष्य को सुरक्षित बना सकता है। देवांशु के परिजनों ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समय पर बीमारी की पहचान नहीं होती तो बच्चे की दृष्टि पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता था। उन्होंने कहा कि निःशुल्क जांच, उपचार और चिकित्सकीय सहयोग ने उनके बच्चे को नई रोशनी और बेहतर भविष्य दिया है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत जन्मजात विकारों, बीमारियों, पोषण संबंधी समस्याओं, विकासात्मक विलंब एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रसित बच्चों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर उनका निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाता है।

Raigarh, Chhattisgarh | Jul 8, 2026