🌾धान की खेती की🌾
......सबसे बड़ी बीमारी....
जड़ों का लाल होना=और सड़ना
इससे मिट्टी की जुताई, निंदाई और जमीन में हर तरह की खाद डालने का औचित्य ही खत्म हो जाता है।
जब जड़ें ही स्वस्थ नहीं है तो इन सबका क्या काम...?
धान की रोपाई के बाद धान की जड़ों का लाल होना अब आम बात हो गई है
क्योंकि
हर जगह अब मिट्टी में सोंधी महक की जगह दुर्गंध बढ़ गया है जो मिट्टी में फंगस को बढ़ाता है, धान की जड़े 8-10 दिन बाद ही लाल पड़ने लगते हैं 35-40 दिन में तो सड़ जाती है तब ऐसे में धान अपने ऊपरी गांठ से एक दो सफेद जड़ निकालकर पोषण लेते रहता है बाकी पत्ती से पोषण लेकर 2-4 बाली में दाना बना लेता है।
यदि सभी जड़ सफेद रहे तो धान में 35 से 40 कंसे में भरपूर बाली वजनदार दाने लेना बहुत सरल बात है और इतने कंसे आएंगे तो उत्पादन प्रति एकड़ 40 क्विंटल आराम से आने लगेगा।
धान की जड़ सफेद रखने के लिए प्रति एकड़ 2 किलो भू निर्वशी भस्म और 4 किलो माइकोराइजा कवक युक्त TCBT का भूमिराजा खाद रोपाई के समय या रोपाई के बाद जमीन पर भुरकाव करें।
इससे जड़ स्वस्थ होने लगेंगे,जड़े स्वस्थ रहेगी तो निकलने वाले कंसे स्वस्थ रहेंगे, तना मोटे होंगे बाली लंबी आएगी और वजनदार दाने आएंगे।
Jabalpur, Jabalpur | Jul 21, 2026