प्राकृतिक संसाधन सार्वजनिक संपत्ति और सामूहिक धरोहर हैं. निजी स्वार्थ के लिए नदियों का सीना चीरकर अंधाधुंध अवैध दोहन करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है. अरपा नदी से अवैध रेत उत्खनन के मामले में सजा सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश (खान एवं खनिज) सिराजुद्दीन कुरैशी की अदालत ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कथन “धरती हर व्यक्ति की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन देती है, लेकिन लालच को नहीं” का उल्लेख किया. कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में नरमी बरतने से समाज में गलत संदेश जाएगा. अदालत ने अरपा से अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के मामले में दो आरोपियों को 3-3 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई. दोनों पर 26-26 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है.
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपियों के प्रथम अपराधी और गरीब किसान होने का हवाला देते हुए नरमी बरतने की गुहार लगाई थी. हालांकि, अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए इसे खारिज कर दिया. निर्णय सुनाते ह�